कोरोना वाइरस – हम चीन पर विश्वास क्यों नहीं कर सकते

वुहान कोरोना वाइरस 2 महीने के अन्दर ही चीन के अलावा दुनिया के 50 से भी अधिक देशों में फैल चुका है। भारत भी इससे अछूता नहीं रह गया है। हांगकांग के मेडिकल विशेषज्ञ प्रो॰ गैबरियल लेउंग के अनुसार यदि कोरोना वाइरस को रोका नहीं गया तो दुनिया की 60% आबादी इससे संक्रमित हो सकती है, जिसमे 4.5 करोड़ लोगों की जान जा सकती है। क्या चीन द्वारा इस विषय पर की गयी शुरूआती लापरवाही, लगातार छिपाने और कम रिपोर्ट करने की प्रवृति ने दुनिया के लोगों को खतरे में नहीं डाल दिया है? आइये इस मामले की तह तक जाकर इसका विश्लेषण करते हैं।

पिछले 70 वर्षों में, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) ने अपने देश को एक के बाद एक मानव निर्मित त्रासदियों के अधीन किया है, जैसे महान अकाल, सांस्कृतिक आन्दोलन, तियानमेन स्क्वायर हत्याकांड, फालुन गोंग का दमन, तिब्बत, शिनजियांग और हांगकांग में मानवाधिकारों का दमन, आदि। प्राकृतिक आपदाओं या महामारियों के बारे में भी CCP की प्रतिक्रिया हमेशा छल और झूठ से भरी रही है।

1976 में वैज्ञानिकों ने तांगशान इलाके में एक बड़े भूकंप के आने की संभावना बतायी थी जिसे राजनीतिक कारणों से दबा दिया गया। जब तांगशान में 7.8 माप का भयानक भूकंप आया तो 2,40,000 लोग मारे गए। 2003 के SARS संक्रमण और 2008 के सिचुआन भूकंप के दौरान भी चीनी शासन पर बड़े पैमाने पर जानकारी छिपाने और गुमराह करने के आरोप लगे।

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का सबसे बड़ा कवर-अप फालुन गोंग दमन से संबंधित रहा है। इसके स्वास्थ्य लाभ और आध्यात्मिक शिक्षाओं के कारण चीन में फालुन गोंग इतना लोकप्रिय हुआ कि 1999 तक करीब 7 करोड़ लोग इसका अभ्यास करने लगे जो CCP की 6 करोड़ मेम्बरशिप से ज्यादा था। जियांग जेमिन ने फालुन गोंग की शांतिप्रिय प्रकृति के बावजूद इसे अपनी प्रभुसत्ता के लिए खतरा माना और 20 जुलाई 1999 को इस पर पाबंदी लगा दी और क्रूर दमन आरम्भ कर दिया जो आज तक जारी है।

अधिकारिक तौर पर चीन में कोरोना वाइरस के 8 मार्च तक 80,000 केस दर्ज हुए हैं जिसमे करीब 3000 लोगों कि मृत्यु हो चुकी है। चीनी समाचार एजेंसी शिनहुआ दावा कर रही है कि चीन में स्थिति नियंत्रण में आ रही है और नये रोगियों की संख्या में कमी आ रही है। सवाल यह है क्या चीन की अधिकारिक ख़बरों पर विश्वास किया जा सकता है? अनेक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मरने वालों की वास्तविक संख्या 10 गुणा तक अधिक हो सकती है।

एपोक टाइम्स के अनुसार, वुहान के शवदाहगृहों के कर्मचारियों के अंडरकवर कॉल के आधार पर, 22 जनवरी के बाद उन्हें 4 से 5 गुणा अधिक शवदाह करने पड़ रहे हैं। निर्वासित चीनी करोड़पति गुओ वेंगुई ने वुहान शवदाहगृहों से लीक ख़बरों के आधार पर दावा किया है कि मरने वालों की संख्या 50,000 तक हो सकती है।

चीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के एक पूर्व अधिकारी चेन बिंगझोंग ने एपोक टाइम्स को बताया कि महामारी नियंत्रण से बाहर है और वुहान अब बहुत खतरनाक स्थिति में है।

भले ही मृत्यु दर कितनी भी हो, कोरोनोवायरस के प्रसार के बारे में कम्युनिस्ट शासन अपनी सूचना के नियंत्रण पर पकड़ बनाये हुए है। सभी चिकित्सा कर्मियों को इस बारे में फोन करने, टेक्स्टिंग, ईमेलिंग, ब्लॉगिंग, या बात करने के लिए मना किया गया है। कोई भी सूचना “लीक” होने पर तीन से सात साल की जेल हो सकती है।

जब कोरोना वाइरस पहली बार 8 दिसम्बर 2019 में वुहान में रिपोर्ट हुआ तो चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की शुरूआती प्रतिक्रिया इसे छिपाने की रही। जब संक्रमित रोगियों की संख्या बढ़ने लगी और स्थिति हाथ से निकलने लगी तो 23 जनवरी को वुहान में आपातकाल घोषित कर लोगों को क्वारंटाइन कर दिया गया। तब तक वाइरस हजारों लोगों में फैल चुका था।
वुहान के एक नेत्र चिकित्सक, ली वेनलियांग ने 30 दिसंबर, 2019 को अपने मेडिकल स्कूल के चैट समूह को एक संदेश भेजा, जिसमें उन्हें नए SARS जैसे वायरस की चेतावनी दी। 1 जनवरी, 2020 को, ली और सात अन्य डॉक्टरों को “अफवाह फैलाने” के लिए गिरफ्तार किया गया था। बाद में स्वयं डॉ। ली की इस संक्रमण से मृत्यु हो गयी।
19 जनवरी को वुहान में बाइब्यूटिंग इलाके में नए साल की दावत दी जिसमे 40,000 से अधिक परिवारों ने भाग लिया। शहर के अधिकारियों ने इस घटना के दौरान संवाददाताओं से कहा कि कोरोनो वायरस के संक्रामक होने की उम्मीद नहीं है और मानव-से-मानव सक्रमण का जोखिम कम है।

20 जनवरी, 2020 के बाद से संक्रमण के मामलों की आधिकारिक संख्या नाटकीय रूप से बढ़ गई। वुहान में सरकार ने शहर को बंद करने की घोषणा की। दो दिनों के अंदर, हुबेई प्रांत के 15 और शहरों को भी बंद कर दिया गया।

देरी से संचार के परिणामस्वरूप, वायरस जल्दी से शहर से शहर और देश से दूसरे देशों में फैल गया। हार्वर्ड विश्वविद्यालय के स्वास्थ्य शोधकर्ता एरिक फ़िग्ल-डिंग ने 25 जनवरी, 2020 को ट्विटर पर कोरोनोवायरस के प्रकोप पर टिप्पणी की, “यह थर्मोन्यूक्लियर महामारी-स्तर जैसा बुरा है ।।। मैं अतिशयोक्ति नहीं कर रहा हूं।”
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का भविष्य

पिछले कुछ समय से भारत और चीन के बीच संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। भारत में कम ही लोग जानते हैं कि पिछले 15 वर्षों से “पार्टी छोड़ो” नामक आन्दोलन CCP के जनाधार को जड़ से समाप्त कर रहा है। चीन में एक के बाद एक राजनीतिक अभियानों से त्रस्त लोग बड़ी संख्या में CCP की मेम्बरशिप त्याग रहे हैं। पिछले 15 वर्षों में 32 करोड़ से ज्यादा चीनी लोग कम्युनिस्ट पार्टी की मेम्बरशिप से इस्तीफा दे चुके हैं। इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए देखें: http://tuidang.epochtimes.com । एक ओर कोरोनोवायरस के कारण चीन संकट के दौर से गुजर रहा है, दूसरी ओर “पार्टी छोड़ो आन्दोलन” CCP का विघटन कर रहा है। कहीं सोवियत कम्युनिस्ट साम्राज्य की तरह CCP भी टूटने के कगार पर तो नहीं है? हांलाकि हम चीन के कोरोनोवायरस संकट से जल्द उबरने की कामना करते हैं किन्तु चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ी यह खबर भारत के लिए खासा महत्त्व रखती है।

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