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… और सीपी जोशी का समय शुरू होता है अब !

<p><span style="line-height:1.6em">सीपी जोशी को गुस्सा बहुत जल्दी आता है। छोटी सी बात पर भी भड़क जाते हैं और किसी को भी खूब सुना भी देते हैं। कार्यकर्ताओं को कभी कभी तो ऐसी झाड़ पिला देते हैं कि कच्चा &ndash; पोचा तो उनके सामने खड़ा भी नहीं रह सकता। फिर भले ही उसे पुचकार भी देते हैं। अपने मन में उनके लिए सम्मान हैं, फिर भी अपने जैसे आदमी को भी वे कभी कभार परशुराम के अवतार में नजर आते रहे हैं। इसके पीछे वजह सिर्फ एक ही है कि उनको किसी का डर नहीं है।&nbsp;</span></p>

<p>राजनीति में तो खैर, वैसे भी उनको एक निडर नेता के तौर पर देखा जाता है। सचमुच कोई डर नहीं। कोई उनका कुछ बिगाड़ लेगा, यह वे सोचते ही नहीं। और ऐसा इसलिए नहीं है कि वे कांग्रेस के बहुत बड़े आदमी राहुल गांधी के नजदीकी हैं, और सोनिया गांधी उनको जानती हैं। बल्कि इसलिए है क्योंकि राजनीति में चोर लोग डरते हैं। भ्रष्ट लोग किसी को भी कुछ कहने से बचते हैं। और, बेईमान लोग अपने कारनामों के खुल जाने की वजह से कहीं भी टांग अड़ाने से दूर रहते हैं।&nbsp;</p>

<p>लेकिन सीपी जोशी को किसका डर। दाग उन पर कोई है नहीं। नाम भी उनका चमकदार है और बदनाम उनको अब तक तो कोई कर नहीं सका। लेकिन फिर भी वे जल्दी चिढ़ते हैं और गुस्सा भी करने लग जाते हैं। पता नहीं क्यू। इसे उनकी व्यक्तिगत कमजोरी माना जा सकता है और यह वे समझदार हैं इसलिए खुद भी जानते ही हैं। पर, अब उनको थोड़ा संभलकर चलना होगा, क्योंकि उनकी असली अग्नि परीक्षा की शुरूआत होनेवाली है। कुछ ही दिनों में राजस्थान विधानसभा के चुनाव हैं और पीछे के पीछे फट से लोकसभा के चुनाव भी आनेवाले हैं। लोकसभा तो फिर भी दूर की बात है, पर विधानसभा के चुनाव उनके लिए एक बहुत बड़ा चैलेंज है। दिलीप कुमार की बहुत पुरानी फिल्म &lsquo;गोपी&rsquo; का एक गीत हैं – &lsquo;काजल की कोठरी में कैसो भी जतन करो, काजल का दाग भाई लागे ही लागे रे…. भाई काजल का दाग भाई लागे ही लागे&rsquo;… हमारे कांग्रेस महासचिव सीपी जोशी के लिए भी विधानसभा के चुनाव काजल की कोठरी साबित हो सकते हैं। जोशी के लिए यही सबसे बड़ा चैलेंज है।&nbsp;<br />
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वैसे, सीपी जोशी को अपन बीते 25 साल से जानते हैं। मगर, उनकी निजी जिंदगी के बारे में बहुत कुछ नहीं जानते। कभी इसकी जरूरत भी नहीं पड़ी। सो, ज्यादा कुछ कह नहीं सकते। पर, लगता है कि वे अच्छे आदमी हैं और व्यवहार कुशल भी लगते रहते हैं। पढ़े लिखे तो हैं ही और बात भी तथ्यों के साथ करते हैं। लेकिन, जो लोग उनको भोला और भला आदमी मानते हैं, उनको अपनी सलाह है कि राजनीति में कोई भी भोला और भला नहीं होता। वहां तो सीधे सादे लोगों के लिए कोई जगह ही नहीं होती। सो, बात अगर राजनीति की करें, तो सीपी की राजनीतिक जिंदगी मैं चैलेंज शुरू से ही कभी कम नहीं रहे।&nbsp;</p>

<p>नाथद्वारा से लेकर उदयपुर और जयपुर से लेकर दिल्ली और अब बिहार तक हर जगह चैसेंज ही चैलेंज। और जो आदमी हर बार हर चैलेंज को फतह करके आगे बढ़ता रहा हो, वह कहां से भला और भोला आदमी हो सकता है। उस पर भी, जो आदमी हर पल अशोक गहलोत जैसे धुरंधर राजनेता की टंगड़ी में लंगड़ी लगाकर खुद के सीएम बनने के सपने देखता रहा हो, वह तो किसी भी नजरिये से भोला और भला नहीं हो सकता। लेकिन हां, अपन इतना जरूर जानते हैं कि जोशी बदमाश और बहुत तेजतर्रार किस्म के राजनेता नहीं हैं। अगर देश चलानेवाले हमारे बाकी बहुत सारे राजनेताओं की तरह जोशी भी चालाक और धूर्त होते, तो जो रेल मंत्रालय उनको मिला था, वह उनके राजनीतिक कद और छवि के हिसाब से भले ही बहुत बड़ा चैलेंज था, फिर भी वे सारी तिकड़म लगाकर उसी में जमे रहते। कोई कुछ भी कर लेता, जोशी वहां से हिलते नहीं। रेल मंत्रालय में मलाई और माल दोनों खूब थे। पर, जोशी ठहरे कांग्रेस के सिपाही। सो, जो पार्टी के महासचिव का काम मिला तो आदेश मानकर रेल मंत्रालय से सरक लिए।&nbsp;</p>

<p>अब वे कायदे से उस बिहार के प्रभारी हैं, जहां कांग्रेस पिछले कई चुनावों में धूल चाटती नजर आती रही है और आगे भी लगता है कई सालों तक ऐसा ही होता रहेगा। राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी भी इतने सालों से बिहार में जब कुछ भी नहीं कर पाए, तो सीपी जोशी के पास को कोई जादू की छड़ी तो नहीं है कि वे… जय काली कलकत्ते वाली, तेरा वचन न जाए खाली… कहते हुए उसे हिला देंगे और बिहार में कांग्रेस का कल्याण कर देंगे। &nbsp; &nbsp;&nbsp;</p>

<p>सीपी जोशी राजस्थान के ताकतवर नेता कहे जाते हैं। सो, बात कुछ महीनों पहले की भी कर ली जाए। जोशी अगर रेल मंत्री रहे होते, तो कम से कम मेवाड़ का तो कल्याण हो जाता और इस पहाड़ी इलाके के लोगों की रेल विकास की अपेक्षाओं पर रेल मंत्री के रूप में जोशी जरूर खरे उतरते, ऐसा लगभग सभी मानते हैं। पर शायद ठीक ही हुआ, कि अभी तो वे रेल मंत्रालय के सुर, ताल और लय को समझने की कोशिश कर ही रहे थे, कि पार्टी में महासचिव बना दिए गए। अपना मानना है यह बहुत अच्छा हुआ। खासकर, सीपी जोशी जैसे कड़क आदमी के लिए तो रेल मत्रालय और भी मुश्किल होता। क्योंकि खाऊ आदमी के लिए तो हर जगह, हर तरह के हजार रास्ते खुल जाते हैं, लेकिन बहुत सारे बेईमान लोगों के कुनबे के बीच किसी ठीकठाक आदमी के लिए अपना आशियाना बनाना कांटों भरे रास्ते से कम नहीं होता। रेल मंत्रालय हमारे देश में भ्रष्टाचार, बेईमानी और दलाली के सबसे बड़े गढ़ के रूप में कुख्यात रहा है।&nbsp;</p>

<p>विकास के नाम पर रोज अनेक ठेके निकलते हैं और सुबह से शाम तक कई करोड़ के वारे न्यारे भी होते रहते हैं। और ऐसी जगहों का रिवाज रहा है कि आप किसी का कोई काम नहीं भी करें, तो भी बहुत सारी मलाई खुद चलकर आपके होठों तक पहुंच ही जाती है। ऐसे में जोशी के लिए अपनी ईमानदार छवि को बनाए रहना बहुत मुश्किल होता। वैसे, सीपी जोशी किसी पर भी आसानी से मेहरबानियां न करने के लिए काफी कुख्यात रहे हैं। लेकिन रेल मंत्रालय का इतिहास है कि हर मंत्री की मातृभूमि अपने सपूत से विकास की गंगा को थोड़ा सा अपनी तरफ भी मोड़ने की आस करती रही है। सो, भले ही बहुत कम दिन के लिए रेल मंत्री रहे, पर भीलवाड़ा में रेल कारखाना तो खोल ही दिया। शायद इसलिए, क्योंकि सीपी जोशी भी आखिर मेवाड़ी इतिहास की उस परंपरा के प्राणी हैं, जिसमें, मायड़ थारो वो पूत कठै… के गीत गीए जाते हैं।</p>

<p>&nbsp;पर, अब राजस्थान में चुनाव हैं। पता नहीं नतीजा क्या होगा। पर, पिछली बार से लेकर इस बार तक पांच सालों से सीएम बनने का सपना सीपी की आंखों में टंगा हुआ है। अखिल भारतीय कांग्रेस की अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने भले ही अशोक गहलोत को पूरी छूट दे दी हो और पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी भले ही सभी को अनुशासन में रहने की हिदायत दी हो, पर, राजनीति की महत्वाकांक्षाओं में ऐसा होता कहां है हुजूर… कि लोग अपनी हदों में रहें।&nbsp;</p>

<p>राजनीति में अपनी ताकत का दूसरे के लिए इस्तेमाल होते देखने से बड़ा दुख और कोई नहीं होता। इसलिए पार्टी के आदेश मानकर एक अनुशासित सिपाही की तरह काम करके कांग्रेस को भारी बहुतमत से जिताकर अशोक गहलोत को फिर से राजस्थान का सीएम बनते चुपचाप देखना सीपी जोशी के लिए कोई कम तकलीफदेह नहीं है। पर, जो कुछ भी करना है, तत्काल ही करना होगा। क्योंकि चुनाव शुरू हो गया है। अगर यह मान भी लें कि सीपी जोशी वास्तव में बहुत भले और भोले आदमी हैं, फिर भी राजनीति की राह में रोड़े बहुत हैं और फिसलन भी कोई कम नहीं। इसलिए, अब तक सारी भवबाधाओं को सहज तरीके से पार कर लेनेवाले सीपी जोशी चुनाव के इस आखरी वक्त में क्या कर गुजरते हैं, यह आप और हम सब मिलकर देखेंगे। क्योंकि सीपी जोशी का असली समय शुरू होता है अब… सही है ना ?&nbsp;<br />
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार हैं) &nbsp; &nbsp;<br />
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