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साहसिक बातचीत और जीवंत प्रदर्शन के बीच मूल्यों एवं जड़ों से जोड़ता सांस्कृतिक उत्सव अर्थ सम्पन्न

राजनीतिक, कला-संस्कृति, सिनेमा, साहित्य, धर्म, भाषा बोध सहित कई विषयों पर हुई चर्चा
प्रख्यात कलाकारों ने दिया मनोरंजन का तड़का

नई दिल्ली। भारत देश कई मायनों में विश्वभर में अग्रणी है, यहां की कला-संस्कृति, भाषा, साहित्य, पर्यटन, खान-पान से लेकर परिधान, यहां तक कि पॉलीटिकल उतार-चढ़ाव भी सभी को आकर्षित करता है। हालांकि वर्तमान समय में तेजी से हो रहे बदलाव में मूलभूत वास्तविकता और ज्ञान बोध युवाओं के बीच परिपक्वता से अछूती है। ऐसे में जरूरी है उनके बीच इसका प्रसार करना और संदेश देना कि यही अपना देसी अंदाज ही हमें दूसरों से अलग और मजबूती के साथ खड़ा करता है। मूलभूत कला-संस्कृति, जीवन के मूल्यों, गीत-संगीत और खुद को खोजकर उससे सीखने, जुड़ने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की अवधारणा है ज़ी लाइव का सांस्कृतिक उत्सव ‘अर्थ – अ कल्चरल फेस्ट।

सप्ताहअंत के दौरान तीन दिवसीय अर्थ फेस्ट ने दिल्लीवासियों पर एक बार फिर अपना अनूठा प्रभाव छोड़ा। अपने दूसरे संस्करण के दौरान इस फेस्ट में विविधताओं का दौर चरम पर रहा और भारत एवं दुनिया भर के 200 विद्वानों, लेखकों, कलाकारों और शिल्पकारों ने इसमें भाग लेते हुए कला, संस्कृति, साहित्य, इतिहास, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर पैनल चर्चा व डिस्कशन करके युवाओं से रूबरू हुए, उनके साथ सवाल-जवाब भी किये। वहीं दूसरी ओर प्रख्यात कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से तीनों ही दिन दिल्लीवासियों के वीकेंड को यादगार बनाया।

रविवार शाम सम्पन्न हुए अर्थ – अ कल्चर फेस्ट के तीन ही दिन शानदार उत्साह देखने को मिला और लगभग 14,000 से अधिक उपस्थित लोगों की उपस्थिति देखी गई। कार्यक्रम की शुरुआत एक बेहतरीन प्रस्तुति से हुई जहां तारापद रजक द्वारा एक पारंपरिक पारंपरिक नृत्य प्रदर्शन से सभी को अपने जीवंत प्रदर्शन से रोमांचित किया। उसके बाद सुरम नाथ द्वारा एक भावपूर्ण गायन प्रदर्शन भी आकर्षण का केन्द्र रहा। पहले दिन कुमार विश्वास के काव्य प्रदर्शन और उनके अंदाज ने अलग ही समां बांधा, जिसे विराम दिया दिग्गज गायिका शुभा मुद्गल ने। शुभा मुदगल ने एक के बाद एक अपने लोकप्रिय गीत प्रस्तुत किये और दर्शकों को मुग्ध किया।

दूसरे दिन की शुरुआत भाई मनोहर सिंह के प्रदर्शन के साथ हुई, जिन्होंने गुरु (गुरबानी) के गीत प्रस्तुत किये। इसके अतिरिक्त मोहना कृष्णा की प्रस्तुति ने दर्शकों का मनोरंजन किया। शाम के समय में राजस्थानी फोक के लिए प्रसिद्ध मामे खान ने अपने सामुदायिक विरासत संगीत का प्रदर्शन किया, राजस्थान और भारतीय पारम्परिक खुशबू बिखेरता यह प्रदर्शन शानदार था। दूसरे दिन का समापन पलाश सेन के नेतृत्व में यूफोरिया बैंड ने पॉवपैक प्रदर्शन के साथ किया।

तीसरे दिन सिनम बसु का मणिपुरी नृत्य, नर्तकी नटराज द्वारा भरतनाट्यम, कुतबी ब्रदर्स द्वारा कव्वाली बेहद खास और जबरदस्त प्रस्तुतियों में शुमार हुई। लेकिन तीन दिनों के अति-उत्साहित करने वाले सत्रों, प्रदर्शनों आदि का समापन एक लीजेंड के प्रस्तुतिकरण से हो, वह भी ऐसा व्यक्ति जिसकी भारत में ही नहीं विदेशों में भी सशक्त पहचान है तो यह लाज़मी है कि माहौल की गर्म-जोशी, यहां का तापमान उच्चतम स्तर पर पहुंचेगा। एकाएक शांति और उत्सकुता के साथ तीन दिनों के संजीदा दर्शक मस्ती में नज़र आये, पंजाबी मिट्टी एवं संगीत के दिग्गज गुरदास मान के प्रदर्शन में। बेहद आत्मीय प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम के तीन दिन मौजूद रहे प्रसिद्ध लेखक रस्किन बॉन्ड ने कहा, ‘‘मैं अर्थ के तीन दिनों में भाग लेने के लिए खुश हूं। बहुत अच्छा अनुभव रहा है मेरे लिए नये लोगों से जुड़ना, दर्शकों का प्यार और उनकी उत्सुकता, उनकी प्रतिक्रिया दिल छू गयी है। अपनी तरह के इस उत्सव में लोगों का उत्साह विशेष रूप से युवाओं की उपस्थिति इसकी सफलता का पुख्ता प्रमाण है।’’

बहुमुखी प्रतिभा के धनी और सीबीएफसी अध्यक्ष प्रसून जोशी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि ‘‘हम ऐसे समय में रह रहे हैं जहां लोग अधीर हो गए हैं। आज के युवा जब अर्थ जैसे महोत्सव से जुड़ेंगे तो धैर्य का अर्थ समझेंगे। अर्थ जैसे त्योहार आपको अन्य लोगों की बातों को समझने एवं सुनने में मदद करते हैं, जो समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और ज़ी लाइव ने निश्चित रूप से इस महान कार्यक्रम का आयोजन करके एक अच्छा काम किया है।’’

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