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शिक्षा में भारतीय भाषाओं के लिए शिक्षा संस्कृति न्यास की व्यापक योजना

नई दिल्ली। शिक्षा में नये विकल्प हेतु कृतसंकल्पित शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली द्वारा राष्ट्रीय शैक्षिक कार्यशाला का आयोजन रयात-बाहरा विश्वविद्यालय, रोपड़ परिसर, पंजाब में माननीय दीनानाथ बत्रा की अध्यक्षता में हुआ, जिसमें कुल 27 प्रान्तों से 215 प्रतिनिधियों ने भाग लिया । कार्यशाला में कुलपति, शिक्षाविद्, शिक्षक, शोधार्थी तथा शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की ।

कार्यशाला का उद्घाटन शिक्षाविद् श्री अनिरूद्ध देशपाण्डे (पुणे) द्वारा किया गया । श्री देशपाण्डे जी ने कहा कि इस कार्यशाला में गम्भीर चिन्तन किया जाएगा, जिससे देश की शिक्षा में सार्थक परिणाम प्राप्त हो सकेंगे । कार्यशाला के उद्देश्यों एवं लक्ष्यों पर विस्तृत रूप से न्यास के राष्ट्रीय सचिव श्री अतुल कोठारी जी ने प्रकाश डाला तथा उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता माननीय दीनानाथ बत्रा जी ने की ।

शिक्षाविद् सम्मानः- शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा विगत छः वर्षों से पंडित मदन मोहन मालवीय शिक्षाविद् सम्मान देश के किसी एक मूर्धन्य शिक्षाविद् को दिया जाता है । इस वर्ष यह सम्मान दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर एवं संस्कृत भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. चांद किरण सलूजा जी को हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल महामहिम आचार्य देवव्रत जी द्वारा प्रदान किया गया, जिसमें 400 से अधिक लोगों ने सहभागिता की । इस अवसर पर भारतीय रेडक्रास सोसायटी के उपाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद श्री अविनाश राय खन्ना, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कपिल देव मिश्र, इन्दिरा गांधी विश्वविद्यालय, रेवाड़ी के कुलपति डॉ. एस.सी. बंसल, डॉ. सुरेश टंडन एवं रयात बाहरा विश्वविद्यालय के अध्यक्ष श्री गुरविन्दर सिंह बाहरा एवं निदेशक डॉ. एस.सी. बेदी, पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की अध्यक्षा डॉ. तेजेन्दर कौर धालीवाल एवं एस.सी.ई.आर.टी. पंजाब उपनिदेशक श्रीमती श्रुति शुक्ला भी विशेष रुप से उपस्थित रहे ।

न्यास की इस वर्ष की विशेष उपलब्धियां
न्यास द्वारा उच्च शिक्षा हेतु चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व के समग्र विकास का पाठ्यक्रम भी तैयार किया गया हैः-
1. छः मास का प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम ।
2. क्रेडिट कोर्स (अनिवार्य पाठ्यक्रम के रूप में)
विवेकानन्द निजी विश्वविद्यालय, सागर, मध्य प्रदेश एवं न्यास के मध्य अनुबन्ध द्वारा इस पाठ्यक्रम को सत्र 2016-17 से विश्वविद्यालय में प्रारम्भ किया जा रहा है । इसी प्रकार छः राज्यों के 150 से अधिक विद्यालयों में विद्यालय स्तर के पाठ्यक्रम को लागू किया गया है ।

वैदिक गणितः- उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए वैदिक गणित के भी पाठ्यक्रम तैयार किये गए हैं–
1. छः मास का प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम
2. एक वर्ष का डिप्लोमा पाठ्यक्रम

निम्नांकित संस्थाओं के साथ अनुबन्ध करके प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम प्रारम्भ किया गया हैः-
1. कालिदास संस्कृत विद्यापीठ, नागपुर
2. अटल बिहारी बाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय, भोपाल
3. पंजाब तकनीकी विश्वविद्यालय, जालन्धर
डिप्लोमा पाठ्यक्रम भी कालिदास संस्कृत विद्यापीठ के द्वारा सत्र 2016-17 से प्रारम्भ किया गया है ।

पर्यावरण शिक्षाः- न्यास के द्वारा विद्यालयीन शिक्षा के लिए पर्यावरण का पाठ्यक्रम हिन्दी में तैयार किया गया है । इस पाठ्यक्रम के आधार पर डेक्कन एज्युकेशन सोसायटी पूणे के सहयोग से मराठी भाषा में कक्षा 1 से 12 तक की पुस्तक तैयार की जा रही है । साथ ही स्नातक स्तर की तकनीकी शिक्षा एवं कृषि शिक्षा के लिए पर्यावरण के पाठ्यक्रम का प्रस्तावित प्रारूप तैयार किया गया है ।

नयी शिक्षा नीतिः– मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा शिक्षा व्यवस्था में सुधार हेतु नयी शिक्षा नीति की घोषणा की गई, जिसमें समस्त देश से नई शिक्षा-नीति के बारे में सुझाव मांगे गये थे । शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा भी नयी शिक्षा नीति पर 14 राज्यों में 41 संगोष्ठियों का आयोजन किया गया, जिसमें 7000 से अधिक विद्वानों ने भाग लिया । इसमें आये हुए सुझावों को संकलित करके एक प्रस्ताव केन्द्र सरकार द्वारा गठित समिति तथा मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भी प्रस्तुत किया गया हैं ।

प्रस्तावः- राष्ट्रीय शैक्षिक कार्यशाला में दो प्रस्ताव भी पारित किये गये । दीक्षान्त समारोहों का आयोजन भारतीय वेश-भूषा में हो एवं पाठ्यपुस्तकों में व्याप्त विसंगतियों को समाप्त किया जावे । (प्रस्ताव की प्रति संलग्न है)

भारतीय भाषा मंचः-दिनांक 20 दिसम्बर 2015 को दिल्ली में देशभर से आये हुए भाषा प्रेमियों के बीच भारतीय भाषा मंच का गठन किया गया । यह मंच, भारतीय भाषाओं के विकास, विस्तार हेतु समग्र देश में कार्य करेगा । इस मंच के संयोजक प्रो. वृषभ प्रसाद जैन नियुक्त किए गए हैं ।

अन्तराष्ट्रीय मातृ भाषा दिवसः-अन्तराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर 11 राज्यों में 51 स्थानों पर 55 कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें 10000 से अधिक लोग सहभागी हुए ।

भारतीय भाषा अभियानः- विधि एवं न्याय के क्षेत्र में भारतीय भाषाओं की पुनर्स्थापना हेतु इस मंच को प्रारम्भ किया गया है । इस मंच में प्रमुख रूप से अधिवक्ता वर्तमान एवं पूर्व न्यायधीश, विधि के छात्र एवं अध्यापक सक्रिय रूप से जुड़े हैं । इस मंच के संयोजक श्री अरुण भारद्वाज नियुक्त हुए हैं ।

भारतीय भाषा अभियान के द्वारा दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड राज्यों में बृहद स्तर पर संगोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है । इसके साथ-2 गुजरात, केरल, तमिलनाडु आदि राज्यों में भी सम्पर्क स्थापित किया गया है । शीघ्र ही समग्र देश में इसके कार्य के विस्तार की योजना है ।

संघ लोक सेवा आयोग(UPSC):- अपनी मांक के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग के द्वारा आई.ए.एस आदि की परीक्षाओं के पाठ्यक्रम की समीक्षा हेतु 7 विद्वानों की एक समिति का गठन किया गया है । न्यास के द्वारा आई.ए.एस, आई.पी.एस वर्तमान एवं पूर्व तथा इस परीक्षा व्यवस्था में जुड़े शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों की बैठकों, गोष्ठियां करके सुझाव प्राप्त करके एक ज्ञापन संघ लोक सेवा आयोग द्वारा गठित समिति को दिया गया है ।

छात्रों की राष्ट्रीय कार्यशालाः- शिक्षा का कोई भी कार्य छात्रों के बिना अधुरा है । इस हेतु अपने साथ जुड़े शैक्षिक संस्थानों के छत्रों की एक राष्ट्रीय स्तर की कार्यशालामें 8 प्रांतो से 194 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया ।

शिक्षक शिक्षा पाठ्यक्रमः- राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद् (NCTE) के द्वारा दो वर्ष के पाठ्यक्रम पर न्यास के द्वारा उज्जैन में राष्ट्रीय स्तर की दो कार्यशालाओं का आयोजन किया गया जिसमें 6 राज्यों से 232 प्रतिभागी सहभागी हुए । इसमें प्राप्त सुझाव मानव संसाधन विकास मंत्रालय एवं एनसीईआरटी को देने की योजना है ।

प्रबंधन का भारतीय दृष्टि से पाठ्यक्रमः- दिल्ली में अग्रसेन विश्वविद्यालय, बद्दी के साथ मिलकर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें 63 विद्वानों ने प्रतिभाग किया था । इसके परिणामस्वरूप तुरन्त छः माक का क्रेडीट कोर्स तैयार किया जा रहा है जो आगामी सत्र से अग्रसेन विश्वविद्यालय बद्दी एवं भारतीय प्रबंधन संस्थान (देवी अहिल्या बाई विश्वविद्यालय) में प्रारंभ किया जाएगा ।

इसी प्रकार दिनांक 2 जनवरी एवं 17, 18 फरवरी 2016 को दो कार्यशालाओं का आयोजन प्रबंधन अध्ययन संस्थान, इंदौर में किया गया ।

विद्यालीन शिक्षण के पाठ्यक्रम की दशा एवं दिशाः- विद्यालीन शिक्षा दिनांक 4-5 अप्रैल 2015 को जयपुर में 2 दिवसीय कार्यशाला संपन्न की गई । जिसमें 7 प्रांतों से 72 विद्वानों ने सहभागिता की ।

शिक्षा उत्थानः- शिक्षा उत्थान के गुणात्मक विकास एवं सदस्य संख्या में वृद्धि पर विचार किया गया । सदस्यों की संख्या बढ़ाने हेतु प्रांतों में विचार करके लक्ष्य तय करने के बारे में निर्णय किया गया । न्यास के प्रत्येक कार्यक्रम का आवश्यकतानुसार, प्रचार एवं प्रसार होना चाहिए । इस हेतु फेसबुक, ट्विटर, वाह्टसप के उपयोग को बढ़ाने की आवश्यकता पर भी विचार किया गया ।

साथ ही समाचार पत्र एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी अपने विषय पहुंचाने की प्राथमिकता होनी चाहिए, इस पर भी चिन्तन किया गया ।

शिक्षा स्वास्थ्य न्यासः- आर्थिक कमी के कारण देश में लाखों छात्र शिक्षा से वंचित हो रहे हैं । ऐसे छात्रों को आर्थिक सहायता एवं ऋण उपलब्ध कराने के लिए यह न्यास कार्य करेगा । इसी प्रकार आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्ग के लोगों को चिकित्सा की दृष्टि से विभिन्न प्रकार से सहायता देने का प्रयास शिक्षा स्वास्थ्य न्यास द्वारा किया जाएगा ।

प्रतियोगी परिक्षाएं:- विगत वर्ष अपने प्रयास एवं समर्थन से संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की जा रही सिविल सेवा परीक्षा में समश्याओं के समाधान के साथ आयोग द्वारा इसके पाठ्यक्रम की समीक्षा एवं सुधार हेतु एक समिति का गठन किया है । न्यास के द्वारा इस समिति को सुझाव भी प्रस्तुत किये गये है । इस क्रम को आगे बढ़ाने हेतु विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं पर भी कार्य करने पर इस कार्यशाला में विचार किया गया ।

कार्य विस्तार योजनाः- न्यास के कार्य के विस्तार एवं विभिन्न आयामों के विकास के लिए कार्य विस्तार योजना पर भी विचार किया गया । इस हेतु छुट्टियों में कार्यकर्ता 7 दिन शिक्षा के इस कार्य हेतु समर्पित करें तथा नियमित रूप से प्रवास की योजना पर विचार किया गया ।

समापन सत्र में राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयीन संस्थान के अध्यक्ष डॉ.चन्द्र भूषण शर्मा ने विशेष रूप से उपस्थित रहकर शिक्षा बचाओ आंदोलन से प्रारम्भ यात्रा का जिस प्रकार आज देश भर में विस्तार हो रहा है, इस पर संतोष व्यक्त किया ।

समापन उद्बोधन में न्यास के सचिव श्री अतुल कोठारी ने “देश को बदलना है तो शिक्षा को बदलो” नारे को साकार करने हेतु तन-मन-धन से इस कार्य में अपना योगदान देने हेतु आह्वान किया । साथ ही बढ़ते हुए कार्य के विस्तार एवं समाज की अपेक्षाओं को पूर्ण करने हेतु निःस्वार्थ एवं समर्पण भाव से अधिक समय देकर कार्य करने हेतु भी आह्वान किया ।

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