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मासूम लड़कियों की जिंदगी बरबाद करने वाले प्यारे मियाँ को आजीवन कारावास

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नाबालिग लड़कियों से रेप के मामले में बुरी तरह से फंस चुके एक स्थानीय अखबार के मालिक प्यारे मियां को यहां की एक विशेष अदालत ने दोषी करार दिया है।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नाबालिग लड़कियों से रेप के मामले में बुरी तरह से फंस चुके एक स्थानीय अखबार के मालिक प्यारे मियां को यहां की एक विशेष अदालत ने दोषी करार दिया है। भोपाल की विशेष अदालत ने 66 वर्षीय प्यारे मियां और उसके 22 वर्षीय साथी मोहम्मद उवैस को सोमवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) कविता वर्मा ने इसके अलावा, पीड़िता के यौन शोषण में दोषियों का सहयोग करने और उसका गर्भपात कराने के लिए स्वीटी विश्वकर्मा (21) को 20 वर्ष का कारावास और डॉ. हेमंत मित्तल (45) को पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

अदालत ने प्यारे मियां पर 5.59 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है, जबकि तीन अन्य दोषियों पर 10-10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है।

जबलपुर की केंद्रीय जेल से मुख्य आरोपी मियां ने, जबकि भोपाल जेल से उवैस और विश्वकर्मा ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सुनवाई में हिस्सा लिया। मित्तल जमानत पर बाहर होने के कारण अदालत में पेश हुआ।

विशेष लोक अभियोजक पी.एन. सिंह राजपूत ने बताया कि पीड़िता ने 13 जुलाई 2020 को भोपाल स्थित कोहेफिजा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।

जिला अदालत के जनसंपर्क अधिकारी मनोज त्रिपाठी ने बताया कि भारतीय दंड संहिता और यौन अपराधों से बाल संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत दर्ज शिकायत के अनुसार, पीड़िता के साथ तीन साल तक बलात्कार किया गया था और उसका विरोध करने पर दोषी उसे धमकी देते थे कि वे उसके परिवार के सदस्यों को जान से मार देंगे।

प्यारे मियां पर अन्य नाबालिगों के साथ बलात्कार करने के आरोप में अन्य मामलों में भी मुकदमा चला रहा है। वह कथित तौर पर घरेलू सहायिका का काम दिलाने के बहाने झुग्गी-बस्तियों की गरीब लड़कियों को लुभाता था और फिर उन्हें पार्टियों में ले जाता था, जहां लड़कियों का शारीरिक शोषण किया जाता था।

मामला तब खुला जब, 2 जुलाई 2020 रात करीब तीन बजे पुलिस ने भोपाल के रातीबड़ इलाके से पांच लड़कियों को नशे की हालत में घूमते हुए पकड़ा था। सभी शराब के नशे में थी। पुलिस ने उन्हें चाइल्ड हेल्प लाइन के हवाले कर दिया था, जहां उनसे की गई पूछताछ में मियां की सच्चाई सामने आई।

जुलाई 2020 में पुलिस ने प्यारे मियां के विदेश भागने की आशंकाओं के बीच लुकआउट नोटिस जारी किया गया था। 14 जुलाई को प्यारे के जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में होने की जानकारी मिली था, जिसके बाद मध्य प्रदेश पुलिस ने उसे श्रीनगर पुलिस की मदद से 15 जुलाई को गिरफ्तार किया था। प्यारे मियां आष्टा में अपनी गाड़ी छोड़कर टैक्सी लेकर इंदौर चला गया था, जहां से फ्लाइट से पहले दिल्ली और फिर फ्लाइट से ही श्रीनगर पहुंचा था।

वहीं, इस मामले के बाद भोपाल स्थित सरकारी बालिका आश्रय गृह भेजी गई पांच युवतियों में से एक ने नींद की गोलियां खा ली थीं, जिसके बाद उसे गंभीर हालत में सरकारी हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उसकी मौत नींद की दवा का ओवरडोज लेने से हो गई थी।

एक नहीं बल्कि कई अपराधों में लिप्त 70 वर्षीय प्यारे मियां कथित तौर पर एक पत्रकार था, लेकिन इसके कारनामे शर्मसार कर देने वाले हैं। इसने कई नाबालिगों को अपनी हवस का शिकार बनाया। बताया जाता है कि एक जमाने में वो एक प्रिंटिंग प्रेस में चंद रुपयों की नौकरी किया करता था। एक समय आया जब मियां को एक बड़े अखबार में नौकरी मिली और करीब 15 साल काम करने के बाद मियां ने खुद का अखबार शुरू किया, जिसका नाम ‘अफ़कार’ था, जो एक उर्दू अखबार था।

मियां के खिलाफ लगभग 7 नाबालिग लड़कियों ने रेप का आरोप लगाया था। इस पर पॉक्सो समेत अलग-अलग धाराओं में मामले दर्ज किए गए थे। यौन शोषण के अलावा प्यारे मियां के खिलाफ वन्य जीव अधिनियम के तहत भी केस दर्ज है। उस पर गैर कानूनी तरीके से साभार के सींग रखने का आरोप है। इसके साथ-साथ प्यारे मियां पर अपने घर के सदस्यों के नाम पर ई-ब्लाक वेलफेयर सोसायटी बनाकर 60 लाख रुपए गबन करने का भी आरोप है।

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