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वीरता पुरस्कारों की घोषणाः ये हैं हमारे देश के जांबाज, जिन्हें वीरता पुरस्कार मिला

73वें स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर वीरता पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। एयरफोर्स के विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान को वीर चक्र से सम्मानित किया जाएगा। वहीं, भारतीय वायुसेना की ही स्क्वैड्रन लीडर मिनटी अग्रवाल को युद्ध सेवा मेडल देने का ऐलान किया गया। मिनटी ने पाकिस्तान के बालाकोट में एयरस्ट्राइक के बाद 27 फरवरी को पाकिस्तानी वायुसेना के साथ संघर्ष के दौरान फाइटर कंट्रोलर की भूमिका में थीं। आठ आर्मी पर्सनल को शौर्य चक्र से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई है। इनमें पांच को मरणोपरांत सम्मानित किया जाएगा।
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वीरता पुरस्कार 2019 की सूची
कीर्ति चक्र
सिपाही प्रकाश जाधव
सीआरपीएफ कमांडेंट हर्षपाल सिंह

वीर चक्र
विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान

शौर्य चक्र
ले. कर्नल अजय सिंह कुशवाह
मेजर विभूति शंकर ढोंढियाल (मरणोपरांत)
कैप्टन महेश्वर कुमार भूरे
लांसनायक संदीप सिंह (मरोणपरांत)
सिपाही ब्रजेश कुमार (मरणोपरांत)
सिपाही हरि सिंह (मरणोपरांत)
राइफल मैन अजवीर सिंह चौहान
राइफलमैन शिव कुमार (मरणोपरांत)

युद्ध सेवा मेडल
मिनटी अग्रवाल

बालाकोट पर हमला करने वाले पायलट्स को भी अवॉर्ड
वायुसेना के विंग कमांडर अमित रंजन, स्क्वॉड्रन लीडर्स राहुल बोसाया, पंकज भुजडे, बीकेएन रेड्डी और शशांक सिंह को बालाकोट में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर हमले के लिए वायु सेना मेडल से सम्मानित किया गया है। ये सभी मिराज 2000 लड़ाकू विमान के पायलट हैं।

वीरता पुरस्कार: कैसे होते हैं और किसको दिए जाते हैं, जानें सबकुछ

आजादी के बाद भारत सरकार द्वारा 26 जनवरी, 1950 को प्रथम तीन वीरता पुरस्कार यानी परम वीर चक्र, महावीर चक्र और वीर चक्र शुरू किए गए थे, जिन्हें 15 अगस्त, 1947 से प्रभावी माना गया था।इसके बाद भारत सरकार द्वारा 4 जनवरी, 1952 को अन्य तीन वीरता पुरस्कार यानी अशोक चक्र श्रेणी – I, अशोक चक्र श्रेणी-II और अशोक चक्र श्रेणी-III प्रारंभ किए गए थे जिन्हें 15 अगस्त, 1947 से प्रभावी माना गया था । इन पुरस्कारों को जनवरी, 1967 में क्रमशः अशोक चक्र, कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र का नाम दिया गया।ये वीरता पुरस्कार साल में दो बार घोषित किए जाते हैं, गणतंत्र दिवस के अवसर पर और फिर स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर।इन पुरस्कारों का वरीयता क्रम परमवीर चक्र, अशोक चक्र, महावीर चक्र, कीर्ति चक्र, वीर चक्र और शौर्य चक्र है।

किसे दिया जाता है: परमवीर चक्र भारत का सर्वोच्च शौर्य सैन्य अलंकरण है जो दुश्मनों की उपस्थिति में उच्च कोटि की शूरवीरता एवं त्याग के लिए प्रदान किया जाता है। ज्यादातर स्थितियों में यह सम्मान मरणोपरांत दिया गया है।पदक: यह गोलाकार होता है और कांस्य का बना होता है। इसका व्यास 1.38 ईंच होता है। इसके अगले भाग में अग्रभाग पर केंद्र में उभरी हुई राज्य के प्रतीक ( ध्येय सहित ) के साथ ‘इन्द्र के वज्र’ की चार प्रतिकृतियां होती हैं। इसके पिछले भाग में ‘परमवीर चक्र’ हिंदी और इंग्लिश दोनों में उकेरा होता है। हिंदी और इंग्लिश में लिखा परमवीर चक्र कमल के दो फूलों द्वारा अलग किया जाता है। फीता: सादा बैंगनी रंग का फीता बार: अगर कोई पुरस्कार प्राप्तकर्ता भविष्य में वीरता का कुछ ऐसा काम करता है जिससे कि वह शौर्य चक्र से सम्मानित होने का हकदार बन जाता है तो उस स्थिति में उनको एक बार से सम्मानित किया जाता है। बार एक फीते से जुड़ा होता है जिससे चक्र लटकता रहता है। भविष्य में वीरता के ऐसे जितने काम करेंगे, उतने बार मिलते जाएंगे। हर बार के साथ ‘इंद्र के वज्र’ की एक छोटी सी प्रतिकृति प्रदान की जाती है जो एक फीते से जुड़ी होती है। यह अकेले पहनने के लिए होता है।

किसे दिया जाता है: महावीर चक्र
भारत का युद्ध के समय वीरता का पदक है। यह सम्मान सैनिकों और असैनिकों को असाधारण वीरता या प्रकट शूरता या बलिदान के लिए दिया जाता है। यह मरणोपरांत भी दिया जा सकता है। वरीयता क्रम में यह परमवीर चक्र के बाद आता है।पदक: यह गोलाकार होता है और स्टैंडर्ड सिल्वर का बना होता है। इसका व्यास 1.38 ईंच होता है। दोनों किनारे पर इसके रिम होते हैं। अगले भाग में पांच कोनों वाला उभरा हुआ तारा उकेरा गया है जिसके कोने गोलाकार किनारे को छू रहे हैं। तारे के बीच में चक्र होगा और चक्र में राज्य का प्रतीक उकेरा होगा। इसके पिछले भाग में ‘महावीर चक्र’ हिंदी और इंग्लिश दोनों में उकेरा होता है। हिंदी और इंग्लिश में लिखा महावीर चक्र कमल के दो फूलों द्वारा अलग किया जाता है।फीता: फीता आधा सफेद और आधा नारंगी रंग का होगा।बार: अगर कोई पुरस्कार प्राप्तकर्ता भविष्य में वीरता का कुछ ऐसा काम करता है जिससे कि वह शौर्य चक्र से सम्मानित होने का हकदार बन जाता है तो उस स्थिति में उनको एक बार से सम्मानित किया जाता है। बार एक फीते से जुड़ा होता है जिससे चक्र लटकता रहता है। भविष्य में वीरता के ऐसे जितने काम करेंगे, उतने बार मिलते जाएंगे। हर बार के साथ चक्र की एक छोटी सी प्रतिकृति प्रदान की जाती है जो एक फीते से जुड़ी होती है। यह अकेले पहनने के लिए होता है।

किसे दिया जाता है: वीर चक्र
भारत का युद्ध के समय वीरता का पदक है। यह सम्मान सैनिकों को असाधारण वीरता या बलिदान के लिए दिया जाता है। यह मरणोपरांत भी दिया जा सकता है। वरीयता में महावीर चक्र के बाद इसका नंबर आता है।पदक: यह गोलाकार होता है और स्टैंडर्ड सिल्वर का बना होता है। इसका व्यास 1.38 ईंच होता है। दोनों किनारे पर इसके रिम होते हैं। अगले भाग में पांच कोनों वाला उभरा हुआ तारा उकेरा गया है जिसके कोने गोलाकार किनारे को छू रहे हैं। तारे के बीच में चक्र होगा और चक्र में राज्य का प्रतीक उकेरा होगा। इसके पिछले भाग में ‘वीर चक्र’ हिंदी और इंग्लिश दोनों में उकेरा होता है। हिंदी और इंग्लिश में लिखा वीर चक्र कमल के दो फूलों द्वारा अलग किया जाता है।फीता: फीता आधा नीले और आधा नारंगी रंग का होगा।बार: अगर कोई पुरस्कार प्राप्तकर्ता भविष्य में वीरता का कुछ ऐसा काम करता है जिससे कि वह शौर्य चक्र से सम्मानित होने का हकदार बन जाता है तो उस स्थिति में उनको एक बार से सम्मानित किया जाता है। बार एक फीते से जुड़ा होता है जिससे चक्र लटकता रहता है। भविष्य में वीरता के ऐसे जितने काम करेंगे, उतने बार मिलते जाएंगे। हर बार के साथ चक्र की एक छोटी सी प्रतिकृति प्रदान की जाती है जो एक फीते से जुड़ी होती है। यह अकेले पहनने के लिए होता है।

किसे दिया जाता है: ‘अशोक चक्र’
शांति काल में दिया जाने वाला वीरता सम्मान है। यह युद्ध के अतिरिक्‍त शौर्य, बहादुरी और बलिदान के लिए दिया जाता है।पदक: यह गोलाकार होता है और गोल्ड गिल्ड का बना होता है। इसका व्यास 1.38 ईंच होता है। दोनों किनारे पर इसके रिम होते हैं। पदक के अगले भाग में बीचोबीच में अशोक चक्र की प्रतिकृति उकेरी होती है जो एक कमल माला से घिरी रहती है। अंदर की ओर रिम के साथ कमल की पत्तियों, फूल और कलियों का एक पैटर्न होता है। इसके पिछले भाग में ‘अशोक चक्र’ हिंदी और इंग्लिश दोनों में उकेरा होता है। हिंदी और इंग्लिश में लिखा अशोक चक्र कमल के दो फूलों द्वारा अलग किया जाता है।फीता: एक हरे रंग के फीते से पदक लटकता रहता है। फीता एक खड़ी नारंगी लाइन द्वारा दो बराबर भाग में बांटा जाता है।बार: अगर कोई पुरस्कार प्राप्तकर्ता भविष्य में वीरता का कुछ ऐसा काम करता है जिससे कि वह शौर्य चक्र से सम्मानित होने का हकदार बन जाता है तो उस स्थिति में उनको एक बार से सम्मानित किया जाता है। बार एक फीते से जुड़ा होता है जिससे चक्र लटकता रहता है। भविष्य में वीरता के ऐसे जितने काम करेंगे, उतने बार मिलते जाएंगे। हर बार के साथ चक्र की एक छोटी सी प्रतिकृति प्रदान की जाती है जो एक फीते से जुड़ी होती है। यह अकेले पहनने के लिए होता है।

किसे दिया जाता है: कीर्ति चक्र
भारत का शांति के समय वीरता का पदक है। यह सम्मान सैनिकों और असैनिकों को असाधारण वीरता या प्रकट शूरता या बलिदान के लिए दिया जाता है। यह मरणोपरांत भी दिया जा सकता है। वरियता मे यह महावीर चक्र के बाद आता है। पदक: यह गोलाकार होता है और स्टैंडर्ड सिल्वर का बना होता है। इसका व्यास 1.38 ईंच होता है। दोनों किनारे पर इसके रिम होते हैं। पदक के अगले भाग में बीचोबीच में अशोक चक्र की प्रतिकृति उकेरी होती है जो एक कमल माला से घिरी रहती है। अंदर की ओर रिम के साथ कमल की पत्तियों, फूल और कलियों का एक पैटर्न होता है। इसके पिछले भाग में ‘कीर्ति चक्र’ हिंदी और इंग्लिश दोनों में उकेरा होता है। हिंदी और इंग्लिश में लिखा कीर्ति चक्र कमल के दो फूलों द्वारा अलग किया जाता है।फीता: एक हरे रंग के फीते से पदक लटकता रहता है। फीता दो खड़ी नारंगी लाइनों द्वारा तीन बराबर भाग में बांटा जाता है। बार: अगर कोई पुरस्कार प्राप्तकर्ता भविष्य में वीरता का कुछ ऐसा काम करता है जिससे कि वह शौर्य चक्र से सम्मानित होने का हकदार बन जाता है तो उस स्थिति में उनको एक बार से सम्मानित किया जाता है। बार एक फीते से जुड़ा होता है जिससे चक्र लटकता रहता है। भविष्य में वीरता के ऐसे जितने काम करेंगे, उतने बार मिलते जाएंगे। हर बार के साथ चक्र की एक छोटी सी प्रतिकृति प्रदान की जाती है जो एक फीते से जुड़ी होती है। यह अकेले पहनने के लिए होता है।

किसे दिया जाता है: शौर्य चक्र भारत का शांति के समय वीरता का पदक है। यह सम्मान सैनिकों और असैनिकों को असाधारण वीरता या प्रकट शूरता या बलिदान के लिए दिया जाता है। यह मरणोपरान्त भी दिया जा सकता है। वरियता में यह कीर्ति चक्र के बाद आता है।पदक: यह गोलाकार होता है और कांस्य का बना होता है। इसका व्यास 1.38 ईंच होता है। दोनों किनारे पर इसके रिम होते हैं। पदक के अगले भाग में बीचोबीच में अशोक चक्र की प्रतिकृति उकेरी होती है जो एक कमल माला से घिरी रहती है। अंदर की ओर रिम के साथ कमल की पत्तियों, फूल और कलियों का एक पैटर्न होता है। इसके पिछले भाग में ‘शौर्य चक्र’ हिंदी और इंग्लिश दोनों में उकेरा होता है। हिंदी और इंग्लिश में लिखा शौर्य चक्र कमल के दो फूलों द्वारा अलग किया जाता है।फीता: एक हरे रंग के फीते से पदक लटकता रहता है। फीता तीन खड़ी लाइनों द्वारा चार बराबर भाग में बांटा जाता है।बार: अगर कोई पुरस्कार प्राप्तकर्ता भविष्य में वीरता का कुछ ऐसा काम करता है जिससे कि वह शौर्य चक्र से सम्मानित होने का हकदार बन जाता है तो उस स्थिति में उनको एक बार से सम्मानित किया जाता है। बार एक फीते से जुड़ा होता है जिससे चक्र लटकता रहता है। भविष्य में वीरता के ऐसे जितने काम करेंगे, उतने बार मिलते जाएंगे। हर बार के साथ चक्र की एक छोटी सी प्रतिकृति प्रदान की जाती है जो एक फीते से जुड़ी होती है। यह अकेले पहनने के लिए होता है।

हर साल राष्ट्रपति भवन में रक्षा अलंकरण समारोह का आयोजन होता है। उस मौके पर पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं और उनके निकटतम परिजन को वीरता पुरस्कार दिए जाते हैं। इस मौके पर कुछ अन्य रक्षा विशिष्ट सेवा पुरस्कार भी दिए जाते हैं। लेकिन दो पुरस्कार परम वीर चक्र और अशोक चक्र ऐसे पुरस्कार हैं जो गणतंत्र दिवस परेड के मौके पर राजपथ पर पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं और उनके निकटतम परिजनों को दिए जाते हैं।

छह वीरता पुरस्कार
गौरलतब है कि वीरता पुरस्कारों के तहत छह सम्मान दिए जाते हैं। ये वरीयता क्रम में क्रमशः परमवीर चक्र, अशोक चक्र, महावीर चक्र, कीर्ति चक्र, वीर चक्र और शौर्य चक्र होते हैं। परम वीर चक्र, महावीर चक्र और वीर चक्र युद्ध काल में सर्वोच्च त्याग और बलिदान के लिए नवाजा जाता है जबकि अशोक चक्र, कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र शांति काल में सर्वोच्च सेवा और बलिदान के लिए दिया जाता है। इन वीरता पुरस्कारों की घोषणा वर्ष में दो बार- गणतंत्र दिवस के अवसर पर और फिर स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर होती है।

राष्ट्रपति देते हैं पुरस्कार
प्रत्येक वर्ष कुछ अन्य रक्षा प्रतिष्ठित सेना पुरस्कारों के साथ वीरता पुरस्कार देने के लिए राष्ट्रपति भवन में अलंकरण समारोह का आयोजन किया जाता है। राष्ट्रपति इस समारोह में पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं अथवा उनके निकट संबंधियों (एनओके) को पुरस्कार प्रदान करते हैं। हालांकि, परम वीर चक्र और अशोक चक्र के मामले में ऐसा नहीं होता है। राष्ट्रपति ये दोनों पुरस्कार राजपथ पर गणतंत्र दिवस परेड के अवसर पर पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं अथवा उनके निकट संबंधियों को प्रदान करते हैं।

वीरता पुरस्कारों के बारे में विस्तार से जानकारी इस साईट http://gallantryawards.gov.in/hi पर उपलब्ध है

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