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चिंतन, संकल्प और व्यवहार से स्वयं को निखारें युवा

राजनांदगांव। शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय में अखिल भारतीय युवा जागरण कार्यक्रम के अन्तर्गत गायत्री परिवार के विशिष्ट मार्गदर्शकों ने विद्यार्थियों को श्रेष्ठ जीवन और कर्तव्य निष्ठा का गौरव अर्जित करने की राह बतायी। गरिमामय आयोजन में प्रमुख अतिथि गायत्री परिवार के युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय संयोजक श्री के. पी. दुबे, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा जोन के प्रमुख श्री गंगाधर चौधरी, युवा प्रकोष्ठ के प्रांतीय संयोजक श्री ओमप्रकाश राठौर,गायत्री परिवार के वरिष्ठ श्री प्रकाश शुक्ला, श्री हरीश गांधी, वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. चन्द्रिका नाथवानी और कार्यक्रम के संयोजक डॉ. चन्द्रकुमार जैन मंचस्थ थे।

प्रारम्भ में अतिथियों के स्वागत के उपरान्त प्रास्ताविक उद्बोधन डॉ. चन्द्रिका नाथवानी ने दिया। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में पढ़ने-पढ़ाने के साथ-साथ व्यक्तित्व निर्माण की दृष्टि से यह आयोजन अत्यंत उपयोगी है। उन्होंने युवाओं से इसका अधिक से अधिक लाभ प्राप्त करने का आह्वान किया। श्री हरीश गांधी ने हिम्मत न हारिये का सन्देश प्रसारित करते हुए प्रेरक गीत सुनाया। आधार वक्तव्य देते हुए डॉ. चंद्रकुमार जैन ने एक मर्मस्पर्शी कविता के माध्यम से कहा कि एक स्वप्न को सत्य में बदलने की तीव्र चाहत और अदम्य उत्साह के साथ कुछ कर दिखाने के हौसले का दूसरा नाम यौवन है जिसे सही समय में सही दिशा मिल जाये तो जीवन धन्य और समाज गौरवान्वित होता है। इसी ध्येय को सामने रखकर यह आयोजन किया गया है। डॉ. जैन ने शब्दों अतिथियों तथा गायत्री परिवार के कार्यकर्ताओं का आत्मीय परिचय देते हुए उन्हें सम्मानित किया।

मुख्य वक्ता राष्ट्रीय संयोजक श्री के.पी.दुबे ने प्रभावशाली वक्तव्य में भारत की सांस्कृतिक विरासत का परिचय देते हुए कहा कि युवाओं को अपने गुण, कर्म और स्वभाव से उत्कृष्ट बनना होगा। अच्छा इंसान बनना जीवन की परम उपलब्धि है। मानवता सबसे बड़ा धर्म है। ईश्वर पर भरोसा हो तो अर्जुन की तरह श्रीकृष्ण भी उसे सारथी के रूप में सहायता देने तैयार हो जाते हैं। भगवान से सदैव और कुछ नहीं बस इतना ही मांगें कि वह बल पूर्वक आपको अच्छे कर्मों की दिशा में ले चलें। आगे बात खुद बनती जाएगी। हमारे युवा संस्कृति दूत बनकर आगे बढ़ें। अपने देश के गौरव को जानें, समझें और उसकी महिमा का प्रसार करें। उन्होंने कहा कि युवावस्था उम्र की मोहताज नहीं है। जिसमें श्रेष्ठ चिंतन हो, जो आशावान हो और जो दृढ निश्चयी हो वही युवा है। हम यद् रखें कि भारत का पूरा इतिहास युवाओं का इतिहास है। अब नया इतिहास रचना हमारे आज के युवाओं के हाथ है।

विशिष्ट अतिथि श्री गंगाधर चौधरी ने प्रेरक संबोधन में महाविद्यालय से जुड़ी अपनी यादें साझा की। उन्होंने कहा कि साहित्य मनीषियों और प्रतिभाशाली प्राध्यापकों ने इस संस्था का गौरव बढ़ाया। उन्होंने कहा कि हमारी युवा पीढ़ी को चिंतन, चरित्र और व्यवहार के संगम से श्रेष्ठ व्यक्तित्व का निर्माण करना होगा। संतुलित व्यक्तित्व, समर्पित और सजग भी होता है। युवक याद रखें कि संकल्प की शक्ति सबसे बड़ी सम्पदा है। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापक, गायत्री परिवार से जुड़े अनेक सम्मानित सदस्य और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे। गायत्री परिवार ने इस अवसर पर सत्साहित्य भेंट किया। डॉ. चंद्रकुमार जैन ने अंत में आभार व्यक्त किया।

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