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देवभाषा संस्कृत से जुड़ेंगे कंप्यूटर के तार

वाराणसी। संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है। कंप्यूटर के लिए संस्कृत सबसे उपयुक्त भाषा मानी जाती है। यह प्रमाणित भी हो चुका है। बावजूद कंप्यूटर व संस्कृत भाषा में दूरी बनी हुई है। अब ऐसा नहीं होगा। ट्रिपल आइटी, हैदराबाद व संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय मिलकर इस पर प्रोग्रामिंग करने जा रहे हैं ताकि सभी भारतीय भाषाओं को एक साथ जोड़ा जा सके। यही नहीं प्रोग्रामिंग के जरिए भाषाओं की बाधाओं को भी दूर करने का प्रयास किया जाएगा। इस प्रकार देवभाषा के संग जल्द ही कंप्यूटर के तार जुड़ेंगे।

इसे मूर्त रूप देने के लिए कुलपति के निर्देश पर संस्कृत विद्या विभाग, संस्कृत विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. रविशंकर पांडेय पिछले दिनों ट्रिपल आइटी, हैदराबाद भी गए थे। इस दौरान वह कंप्यूटर व संस्कृत से संबंध जोड़ने में भी कामयाब रहे।

उन्होंने बताया कि पाणिनि के अष्टाध्यायी में 3155 सूत्र हैं। सूत्र, वार्तिक, महाभाष्य तीनों सम्मिलित रूप को पाणिनि व्याकरण कहा जाता है। अष्टाध्यायी के सूत्र कंप्यूटर के लिए सबसे उपयुक्त माने जाते हैं। साफ्टवेयर इंजीनियर ने भी कंप्यूटर के लिए संस्कृत को सबसे उपयुक्त भाषा माना। साथ ही दोनों संस्थाओं ने मिलकर प्रोग्रामिंग करने का निर्णय लिया।

कुलपति ने बताया कि प्राच्य विद्या को हाईटेक बनाने के लिए अनुसंधान संस्थान में कंप्यूटर लैब की स्थापना की जा रही है। प्रथम चरण में दस कंप्यूटर लगाए जा रहे हैं ताकि शास्त्री-आचार्य के विद्यार्थियों को कंप्यूटर से जोड़ा जा सके। इसके साथ ही ट्रिपल आइटी के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर एक साफ्टवेयर यानी प्रोग्रामिंग करने का निर्णय लिया गया है ताकि प्राच्य विद्या को कंप्यूटर से जोड़ा जा सके।

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