बड़े दिल से करें छोटे-छोटे काम

मदर टेरेसा के कोलकाता स्थित अनाथालय की दीवार पर कुछ दिल को छूने वाली बातें लिखी हैं। दो पल के लिए ही सही, आप ठहर जायेंगे। पढ़ेंगे तो कुछ सोचने-समझने के लिए भी विवश हो जायेंगे। हर बात ऐसी है कि आपको हौसला देती है। आपके भीतर हर हाल में बेहतर करते रहने का ज़ज़्बा पैदा करती है। जैसे लोग आपके प्रति अक्सर स्वार्थी हो सकते हैं, फिर भी आप उन्हें माफ़ कर दें। हो सकता है आप दयालु हों लेकिन लोग आपको छुपी हुई मंशा का व्यक्ति मान सकते हैं। फिर भी आप उनके प्रति दयालु बने रहें। आप अगर सफल होते हैं तो आपके हिस्से में आयेंगे कुछ गलत मित्र और कुछ सही दुश्मन ! फिर भी आप आगे बढ़ते रहें।

आगे गौर कीजिए – अगर आप ईमानदार और दो टूक हैं तब भी लोग आपको धोखा दे सकते हैं, फिर भी ईमानदारी और बेबाकी मत छोड़ें। आपने वर्षों मेहनत करके जो निर्माण किया है, लोग विश्वासघात कर उसे रातों रात नष्ट कर सकते हैं, फिर भी आप सृजन जारी रखें। अगर आप सुखी और शांत हैं, लोग आपसे जलन कर सकते हैं, फिर भी आप खुशमिजाजी बनाए रखें। अगर आज आप कोई भलाई करते हैं, लोग उसे कल भुला सकते हैं, फिर भलाई की राह न छोड़ें। अगर आपने दुनिया को अपना सर्वश्रेष्ठ भी दे दिया हो और वह भी कम पड़े फिर भी बेहतर देने का ज़ज्बा न छोड़ें। आप अंततः आप देखेंगे कि ज़िन्दगी में सब कुछ आपके और ईश्वर के बीच ही घटित होता है। किसी भी तरह से आपके और लोगों के बीच नहीं !

हम कोई बड़ा काम भले ही न कर सकते हों लेकिन छोटे-छोटे काम बड़े दिल से कर सकते हैं ! भले ही आपको लगता हो कि ये सब कहना आसान है पर करना मुश्किल। लेकिन, वास्तव में इस दुनिया में हौसले की हार कभी नहीं होती। देखा जाये तो बुरे से बुरे दिन गुज़ार रहे आदमी के लिए भी कुछ न कुछ अच्छा कर दिखाने की संभावना हमेशा जीवित रहती है। सब मुंह फेर लें तो भी क्या परवाह मत करें तो संभव है कि आपकी बिगड़ी बात भी बन जाए। अपने आप को प्यार करना दुनिया की सबसे बड़ी ताकत है।

फर्ज करें कि आप खुद को सुखी नहीं मानते हैं तो कुछ ऐसे हालातों पर गौर करें जिन्हें आप अक्सर नज़रंदाज़ कर दिया करते हैं। उदाहरण के लिए अगर बारिश में आपको घर से निकलने में डर लगता हो तो उस व्यक्ति के विषय में आप क्या कहना चाहेंगे जो मात्र दो साल के अपने कलेजे के टुकड़े को भारी बाढ़ के बीच खुद लगभग गले तक नदी के पानी में डूबे रहकर भी उसे अपने सिर पर एक टोकरी में रखे हुए किनारे तक पहुँचने की हरसंभव कोशिश कर रहा हो ? इसी तरह जब कभी आपको लगे कि आपकी तनख्वाह कम है या आमदनी नाकाफी है तब पल भर के लिए उस गरीब बच्चे के बारे में सोचें जिसे उसके माँ-बाप का अता-पता नहीं है और जो अपने पावों से लाचार भी है। बावजूद इसके वह पूरी हिम्मत से घिसट-घिसट कर ही सही, लेकिन मदद की गुहार लेकर आप जैसे कई-कई भाग्यवान लोगों तक पहुँचने से नहीं कतराता। सच ही कहा गया है कि ऊपर वाले ने हर हाल में हमें इतनी नेमतें दी हैं कि हम चाहें तो उन्हें सौभाग्य में बदल सकते हैं।

अंत में एक छोटा सा प्रसंग। एक वृद्ध तीर्थ यात्री कड़ाके की सर्दी में हिमालय पर्वत की ओर रवाना हो रहा था। तभी एक व्यक्ति ने उससे पूछा – इतने खराब मौसम में आप वहां कैसे जायेंगे ? बूढ़े इंसान ने मुस्कराते हुए कहा – मेरा दिल तो पहले ही वहाँ पहुँच चुका है, इसलिए अब वहाँ कोई मुश्किल काम नहीं। जीवन के हर पहलू पर यह बात लागू होती है। जरूरत इस बात की है कि हम शिकायत करना छोड़कर समाधान की राह पर चलना शुरू कर दें।

(लेखक राजनांदगाँव में शासकीय महाविद्यालय में प्राध्यापक हैं व विभिन्न सामाजिक विषों पर नियमित लेखन करते हैं)

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