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राजस्थान में किसान और आदिवासी आंदोलन के समर्पित योध्दा डॉ. ब्रज किशोर शर्मा

इतिहास के क्षेत्र में जयपुर निवासी डॉ.ब्रज किशोर शर्मा एक एसी सखशियत हैं जिन्होंने अलवर जिले की तहसील कठूमर के ग्राम गारू के एक किसान परिवार में स्व. कन्हैया लाल शर्मा के यहां 7 जुलाई 1953 को जन्म लेकर किसानों की पीड़ा और परिस्थितियों को नजदीक से देखा – समझा। किसान परिवार की जिंदगी इनकी रग – रग में समाई है। यही वजह रही कि इन्होंने राजस्थान के सन्दर्भ में किसान और आदिवासी आंदोलन को अपने अध्यन का मुख्य विषय बनाया। आज किसी को इस विषय की गहनता और सत्यता को जानना है तो इनके साहित्य को पढ़ना चाहिए। सहज, सरल,मृदुभाषी डॉ.शर्मा अपने अध्यन क्षेत्र में दक्ष और बौद्धिक कौशल क्षमता से मालामाल हैं।

किसान और आदिवासी आंदोलन का कोई पक्ष ऐसा नहीं है जो इन्होंने नहीं छूआ हो या इनकी नज़र से बच गया हो। समय – समय पर हर युग में चाहे वह राजतंत्र हो या लोकतंत्र किसानों और आदिवासियों की स्थिति, उन पर हुए अत्याचार – शोषण और इसके विरुद्ध उठाई गई उनकी आवाज आदि हर पहलुओं को अपने अध्यन का विषय बना कर निरन्तर लिखते रहे, आगे बढ़ते रहे एवं आज भी सतत रूप से पूर्ण सक्रिय हैं। आप आधुनिक भारत सहित आधुनिक राजस्थान का सामाजिक एवं आर्थिक इतिहास एवं आजादी का आंदोलन और समकालीन भारत क्षेत्र में पारंगत हैं।

एक छोटे से गांव में जन्म लेकर अपने बौद्धिक चातुर्य से डॉ. शर्मा इतिहास के क्षेत्र में न केवल राजस्थान वरन देश के आसमान पर नक्षत्र की तरह उभर कर चमके। आपने अपने अध्यन के साथ – साथ देश के कई विद्यार्थियों को
पीएच. डी. के लिए मार्ग दर्शन किया, कई शोध पत्र और शोध पुस्तकें लिखी और शोध पत्रों का वाचन किया और शोध जर्नल में प्रकाशित होकर पूरे देश में ज्ञान का प्रसार किया। यही नहीं बदलते समय के साथ आधुनिक तकनीक से जुड़ कर आज स्वयं के यूटयूब चैनल पर विद्यार्थियों को अपने शोध आलेख उपलब्ध करा रहे हैं।

आपकी प्रारम्भिक शिक्षा अलवर एवं भरतपुर जिलों में हुई। महारानी श्री जया महाविद्यालय भरतपुर से इतिहास विषय के साथ बी. ए.(ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की।
राजस्थान विश्वविद्यालय,जयपुर से इतिहास में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त कर “लैंड सेटेलमेंट एंड द रेवेन्यू सिस्टम इन जयपुर स्टेट (1880-1949)” विषय पर एम.फिल.किया। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. देवेंद्र कुमार कौशिक के निर्देशन में ” इकनॉमिक कंडीशन ऑफ पीजेंट्स इन द जयपुर स्टेट (1880-1949)” विषय पर आपने पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। करीब 35 वर्ष के शोध अनुभव के साथ 32 वर्ष का स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को अध्यापन एवं 25 वर्षो का शोध गाइड का अनुभव आपकी अमूल्य पूंजी है।

आपको राजस्थान के पहले खुला विश्वविद्यालय कोटा में इतिहास विभाग में अध्यापन का लंबा अनुभव प्राप्त हुआ और आप इसी विश्वविद्यलाय जिसका नाम बाद में बदल कर वर्धमान महावीर खुला विश्व विद्यालय,कोटा हो गया से प्रोफेसर इतिहास के रूप में सेवा निवृत हुए। आपको अपने सेवाकाल में इतिहास विभाग का विभागाध्यक्ष बनाया गया। आपकी योग्यता और कुशलता की वजह से विभिन्न अकादमिक पदों शैक्षणिक मीडिया उत्पादन केंद्र, रजिस्ट्रार, डायरेक्टर – एकेडमिक, डायरेक्टर – सेंटर फॉर इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस, डायरेक्टर – स्टाफ ट्रेनिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट इन डिस्टेंस एजुकेशन, डायरेक्टर रिजनल सर्विस, रिसर्च एवं डायरेक्टर मेंटेरियल प्रोडक्शन एवं डिस्ट्रीब्यूशन के पदों पर नियुक्त किया गया, जिससे आपको अपनी प्रशासनिक दक्षता प्रदर्शित करने का सुअवसर प्राप्त हुआ।

यही नहीं आप वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय में प्रबन्धन बोर्ड, वित्त समिति,एकेडमिक परिषद के साथ – साथ इतिहास कांग्रेस,राजस्थान इतिहास कांग्रेस और एशियन एसोसियेशन ऑफ ओपन यूनिवर्सिटीज के सदस्य भी रहे।

शोध क्षेत्र में डॉ.शर्मा भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद,नई दिल्ली में पूर्व सीनियर फैलो एवं भारतीय समाज विज्ञान शोध परिषद,नई दिल्ली में सीनियर एकेडमिक फैलो रहे। आपके शोध प्रकाशन की चर्चा करें तो राजस्थान में 1818 से 1949 के मध्य जन आंदोलन एवं आजादी संग्राम, समसामयिक भारत (1947-2000), राजस्थान में किसान एवं आदिवासी आंदोलन, अखिल भारतीय जाट महासभा के सन्दर्भ में उत्तरी भारत में सामाजिक ,आर्थिक एवं राजनीतिक योगदान, भारत का इतिहास (1740-1950), आधुनिक आर्थिक एवं सामाजिक इतिहास, आदिवासी विद्रोह ,आधुनिक राजस्थान का इतिहास (1920-1949), सामंतवाद एवं किसान संघर्ष, राजस्थान में किसान आंदोलन ( 1920-1949), भारत में किसान आंदोलन – एक अध्ययन जयपुर राज्य में किसानों की आर्थिक स्थिति (1880-1949) आदि प्रमुख पुस्तकों के साथ कई अन्य पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।

आपके अंग्रेजी एवं हिदी भाषा में 100 से अधिक शोध पत्र विभिन्न जर्नल्स और शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। राष्ट्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय,राज्य स्तर के 84 कॉन्फ्रेंस, सेमिनार्स एवं कार्यशालाओं में भाग लेकर शोध पत्र प्रस्तुत किए एवं देश की करीब 25 यूनिवर्सिटीज में रिसोर्स पर्सन के रूप में व्याख्यान दिए। इसी सन्दर्भ में आपको 1997 में थाईलैंड और मलेशिया जाने का अवसर प्राप्त हुआ। देश के विभिन्न क्षेत्रों के 13 विद्यार्थी आपके निर्देशन में पीएच.डी. कर चुके हैं, जिनमें भारतीय प्रशासनिक सेवा सहित कई अधिकारी भी शामिल हैं।

आपके राजस्थान के राज्य स्तरीय समाचारपत्रों में इतिहास सम्बन्धी सैंकड़ों आलेख भी प्रकाशित हुए हैं। आपको दो बार राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी द्वारा आपकी पुस्तकों के लिए प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया है। वर्तमान में आप जयपुर में निवास कर शोध कार्य में जुटे हैं और ई- मीडिया पर अपना यू ट्यूब चैनल बना कर आधुनिक भारत का इतिहास से संबंधित वीडियो बना कर विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध करा रहे हैं। अब तक 45 वीडियो जारी कर चुके हैं। वर्तमान में आपको संघ लोक सेवा आयोग, राजस्थान लोक सेवा आयोग एवं विश्वविद्यालय की चयन समितियों में विशेषज्ञ के रूप में आमंत्रित किया जाता है। सतत अध्यन, शोध,लेखन आपकी प्रमुख अभिरुचियां हैं। इनसे मो. 90790 49796 पर सम्पर्क कर सकते हैं।
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डॉ.प्रभात कुमार सिंघल
स्वतंत्र अधिस्वीकृत पत्रकार
कोटा ( राज.)
मों. 9928076740

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