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डॉ. सुभाष चंद्रा ने साझा की संघ से जुड़ी बचपन की यादें

राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ’ ने इस साल अपनी स्‍थापना के 90 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस उपलक्ष्‍य में संघ द्वारा प्रकाशित मुखपत्र ‘ऑर्गनाइजर’ (Organiser) का एक स्‍पेशल एडिशन निकाला है। इस एडिशन में आरएसएस के इतिहास से लेकर अब तक के सफर को बताया गया है। वहीं रामजन्‍मभूमि आंदोलन के समय में इसकी भूमिका के बारे में भी बताया गया है। इसमें संघ से जुड़े कई जानी मानी हस्तियों के विचार भी शामिल किए गए हैं, जिसमें उन्‍होंने संघ से जुड़े अपने अनुभव साझा किए हैं। राज्‍यसभा सदस्‍य और एस्‍सेल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. सुभाष चंद्रा ने लिखा है कि संघ से जुड़ने के बाद ही उनके अंदर राष्‍ट्रभक्ति की भावना बलवती हुई।

डॉ. सुभाष चंद्रा ने लिखा है कि वह छठी कक्षा से दसवीं तक नियमित रूप से आरएसएस की शाखा में जाते थे। यहां पर उन्‍हें देशभक्ति से जुड़ी बातें और कहानियां सुनाई जाती थीं, जिनके अंदर उनके अंदर राष्‍ट्रभक्ति रच-बस गई।

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सुभाष चंद्रा का कहना है कि वह बचपन से आरसएस के स्‍वयंसेवक रहे हैं और वह बता सकते हैं कि आरएसएस की विचारधारा राष्‍ट्रीयता से भरी हुई है। सुभाष चंद्रा उस समय को धन्‍यवाद देते हैं जब उन्‍होंने आरएसएस की शाखा में समय बिताया था। उनका कहना है कि शाखा में जाने का ही नतीजा रहा कि उनके अंदर बचपन से ही राष्‍ट्रभक्ति की भावना भर गई, जिस पर उन्‍हें गर्व है और वह इसे आगे ले जाना चाहते हैं। चंद्रा का कहना है कि उन्‍हें इस बात की काफी खुशी है कि एक सफल कारोबारी और राजनेता होने के बावजूद वह अभी भी अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं और उनकी इस सफलता में कहीं न कहीं संघ के संस्कारों का बहुत बड़ा योगदान रहा है।

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