आप यहाँ है :

गोबर और मुर्गियों के मल से बनाई बिजली

करनाल । मल से बिजली बनाना भले ही आपको अव्यवहारिक बात लगे, लेकिन आदित्य अग्रवाल और उनके भाई अमित अग्रवाल हरियाणा के करनाल में ऐसा कर रहे हैं। उनकी कील और रिवेट्स बनाने वाली दो फैक्ट्रियां हैं। दोनों फैक्ट्रियां पूरी तरह गाय के गोबर से बनाई गई बिजली से चलती हैं। यह गोबर वे गोशालाओं और गाय के शेल्टर्स से लेकर आते हैं।

दोनों भाइयों ने साल 2014 में बिना सरकारी सहायता लिए अपनी फैक्ट्रियों में गोबर गैस प्लांट लगाया था। यह प्लांट रोज दो मेगावॉट बिजली पैदा करता है। उन्होंने बताया कि उन लोगों को रोज 20,000 से 30,000 किलो गाय के गोबर की आवश्यकता पड़ती है। जिस तरह लोग दूध को सफेद सोना कहते हैं, उसी तरह वे लोग गोबर को हरा सोना कहते हैं।

मुर्गियों के मल से भी बिजली
झज्जर के सिलानी गांव में रहने वाले सुखबीर सिंह ने बिजली विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों से परेशान होकर 2010 में अपने पोल्ट्री फार्म में मुर्गियों के मल से बिजली बनाना शुरू किया था। उनके पिता सूबेदार राम मेहर और भाई रनबीर पर आज बिजली विभाग ने कई मुकदमे दर्ज कर रखे हैं। सुखबीर के बायो गैस प्लांट्स से चार पोल्ट्री फार्म के लिए पर्याप्त बिजली पैदा हो जाती है।

58 साल के सुखबीर ने बताया कि पहले वह टीवी ठीक करने का काम करते थे। बाद में वह पिता और भाई के साथ पोल्ट्री व्यवसाय से जुड़ गए। उन लोगों को बिजली की बहुत जरूरत थी, इसलिए मुर्गियों के मल से बिजली बनाने के आइडिया आया। उनका बिजली विभाग से भी विवाद था। विभाग के अधिकारी उन लोगों से घूस मांग रहे थे। ऐसे में सेना से रिटायर हुए उनके पिता ने घूस देने से साफ इनकार कर दिया। बिना किसी सरकारी सहायता के उन लोगों ने गोबर गैस प्लांट से बिजली बनाने का काम शुरू किया।

इन दोनों की तरह ही उत्तराखंड, पंजाब और तमिलनाडु में भी कई मामले हैं जो पीएम मोदी की गोबर धन स्कीम का समर्थन करते हैं। बिना किसी सरकारी सहायता के वे उद्योगों को बढ़ावा दे रहे हैं। गाय के गोबर से उनके बिजनेस मॉडल के लिए बायो गैस, बिजली और खाद बना रहे हैं।

सरकारी आंकड़ों की मानें तो भारत में पशुओं की तादाद 30 करोड़ से ज्यादा है। रोज लगभग 30 लाख टन गोबर उत्पन्न होता है। गोबर और बायो गैस के लिए यह एक बड़ा स्रोत हो सकता है।

बायो गैस प्लांट के लिए सरकारी मदद भी
अब सरकार ने गोबर धन योजना से पहल की है। इस योजना के पहले फेज में 350 जिलों और दूसरे फेज में बाकी बचे जिलों को शामिल किया जाएगा। सरकार की योजना है कि 2018-19 में 700 बायो गैस प्लांट्स शुरू हो सकें। ये प्लांट्स ग्राम पंचायत की पहल, स्वयं सहायता समूह और गोशालाओं की मदद से लगाए जाएंगे। अधिकारियों ने बताया कि बायो गैस प्लांट के लिए सरकार 25 फीसदी सहायता एडवांस में देगी।

साभार- टाईम्स ऑफ इंडिया से



Leave a Reply
 

Your email address will not be published. Required fields are marked (*)

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>

सम्बंधित लेख
 

Back to Top