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डॉन का चुनाव घोषणा पत्र

इस पोस्टिंग पोस्ट करके अपनी ही शर्तों पर जीवन जिया रोमेश जोशी ने वाली पोस्टिंग के नीचे लिंक के रूप में पोस्ट करना है यानी इसको भी पोस्ट करके इसे लिंक के रूप में भी देना है- इस शीर्षक के साथ यह भी पढ़ें – अपनी ही शर्तों पर जीवन जिया रोमेश जोशी ने

कुछ उल्टा-कुछ पुल्टा
डॉन का चुनाव घोषणा पत्र
रोमेश जोशी

‘‘सब एक से बढ़कर एक घोषणा कर रहे हैं, ऐसे में आप क्या वादे करेंगे?’’ मैंने डॉन से सीधा सवाल कर डाला और तत्काल डॉनोचित जवाब मिला, ‘‘देखिए, झूठ बोलने या आसमानी-सुलतानी वादे करने की हमें कोई जरूरत नहीं है। हम तो अपने वोटर से सीधी और दो टप्पी बात करेंगे।’’

डॉन ने मुझे चुनाव घोषण पत्र तैयार करने के लिए अर्जेण्ट में बुलाया था। इस मामले में काफी लेट हो गए थे वे। देर तक वे बताते रहे कि कहाँ-कहाँ, उनके कितने लोग टिकिट उठाकर उम्मीदवार बन गए हैं और अब उनकी जरूरतों को पूरा करने में कैसे दम फूल रहा है, ‘‘ साले, डिमाण्ड भेज देते हैं और ये नहीं बताते कि देसी कितनी और अंग्रेजी कितनी? ’’
‘‘लेकिन घोषणा पत्र में यही होता है। पार्टी वोटर को बताती है कि उसके प्रत्याशी जीत गए तो क्या-क्या होने वाला है। आपको भी कुछ तो वादे करने ही पड़ेंगे। बताना पड़ेगा कि आपके प्रत्याशी दूसरों से डिफरेण्ट क्यों हैं और जीत गए तो क्या करेंगे? ’’ मैंने डॉन के समक्ष अपेक्षित अपरिहार्य विनम्रता के साथ स्थिति स्पष्ट करने का पूरा प्रयास किया। इस बार उत्तर तत्काल नहीं मिला। कुछ देर सोचकर उन्होंने डॉन-सुलभ सादगी के साथ कहा, ‘‘ आप अपने हिसाब से वो क्या बोलते हैं, हिन्दी में लिख लेना। सबसे पहले तो घोषणा पत्र में वोटर को ये याद दिला दीजिए कि किसी भी पार्टी के टिकिट से जीते, हमारा आदमी तो सरकार बनाने वालों के करीब ही रहेगा और उसके कहने पर मन्त्रियों को और अफसरों को भी काम करने ही होंगे। इसलिए वोटर अगर अपने काम करवाना चाहता है, तो हमारे आदमी को वोट दे। ’’

इस बात को घोषणा पत्र में किस तरह लिखा जाएगा, यह सोचते हुए मैं अगला मुद्दा सुनने लगा। उन्होंने आगे कहा, ‘‘ वोटर अगर चाहता है कि माफिया दल का एक दमदार सदस्य अपने अपराधी और गुण्डे साथियों के साथ क्षेत्र से बाहर चला जाए, तो वह हमारे उम्मीदवार को चुने और पाँच साल के लिए राजधानी भेज दे। असल में वोटर के हाथ में उसे सुधारने का यह सुनहरा मौका है। हो सकता है, पाँच साल बाद वह लौटे तो वह इतना सुधर जाए कि जनता को तंग करना बन्द कर दे। वैसे भी इन वर्षों में वह इतना मजबूत तो आर्थिक रूप से हो ही जाएगा कि एकदम गरीब आदमी को तंग करना उसे ओछापन लगे।’’

‘‘हम यह वादा भी करना चाहते हैं कि हर क्षेत्र में जो अपराध सबसे ज्यादा होता होगा, पूरे पाँच साल तक उस अपराध की संख्या में पचास प्रतिशत से ज्यादा की कमी रहेगी।’’ डॉन भाई के स्वर में अब कुछ मानवता का पुट आ गया। मुझे असमंजस में देख उन्होंने समझाया, ‘‘जैसे किसी क्षेत्र में पाँच साल में पाँच हजार बलात्कार होते हैं या आठ हजार अपहरण होते हैं, तो हमारे आदमी का वादा रहेगा कि बलात्कार ढाई हजार से ज्यादा और अपहरण चार हजार से ज्यादा नहीं होंगे। और किसी अनाधिकृत व्यक्ति ने बलात्कार या अपहरण किया तो उसे कड़ी सजा दिलाने में भी हमारे आदमी की टीम पूरा सहयोग करेगी। ’’

यहाँ आकर मैंने डॉन को याद दिलाया कि अगर घोषणा पत्र में भ्रष्टाचार, कुशासन आदि के विरुद्ध कुछ नहीं कहा जाएगा, तो दमदार होकर भी सब अधूरा सा लगेगा। इस मुद्दे पर भी कुछ तो होना चाहिए। जवाब में गालीदार भाषा का जो रेला चला उसे नोट करते हुए मुझे लग रहा था कि यह सब संसदीय भाषा में अनुवाद करने में मेरी प्रतिभा की परीक्षा होने वाली है। और भी जो प्रश्न मैंने सामने रखे, डॉन-शैली में यथातथ्य उत्तर मुझे मिल गए।

मैं महसूस कर रहा था कि डॉन-श्री वोटर से सीधी बात करने के वादे पर कायम थे। अन्य घोषणा पत्रों से बिलकुल अलग वोटर के फायदे की जो बातें वे कह रहे थे, उन पर एकबारगी विश्वास किया जा सकता था और उन्हें पूरा करना भी बहुत मुश्किल नहीं था। फिर भी घोषणा पत्र तो घोषणा पत्र है, कह नहीं सकते कि वोटर के समर्थन से माफिया-टीम के काफी सदस्य यदि जीत गए, तो डॉन महोदय पर भी राजनीतिक रंग नहीं चढ़ेगा और वे घोषणा पत्र में लिखने के लिए बताए गए वादों पर कायम रहेंगे या नहीं। यह भी सोच रहा हूँ कि लोगों को अन्य पार्टियों की तुलना में यह घोषणा पत्र बेहतर लगेगा या नहीं। अभी तो धाँसू शब्दावली में लिखने का प्रयास कर रहा हूँ। अन्य घोषणा पत्रों जैसा व्यवहार न करते हुए, अगर आप इस माफिया डॉन घोषणा पत्र को पढ़ लें, तो बताइएगा, कैसा लगा? – रोमेश-जोशी

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