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आज़ादी, ज़िन्दगी, बराबरी और सम्मान की रक्षा में है मानव अधिकारों का गौरव – डॉ.चंद्रकुमार जैन

राजनांदगांव। विश्व मानवाधिकार दिवस के अवसर पर उज्ज्वल फाउंडेशन ने जिले में एक यादगार कार्यक्रम आयोजित किया। मानव अधिकारों के सिलसिले में ग्रामीण भारत से जुड़ीं राष्ट्र की उम्मीदों और राष्ट्र के नव निर्माण की तरकीबों को जन-मन तक पहुँचाने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम समीपस्थ ग्राम रेंगाकठेरा के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में हुआ। मुख्य अतिथि और प्रमुख वक्ता दिग्विजय कालेज के राष्ट्रपति सम्मानित प्रोफ़ेसर डॉ.चंद्रकुमार जैन के रोचक, ज्ञानवर्धक और उत्साहवर्धक संबोधन और मार्गदर्शन से आयोजन मील का पत्थर सिद्ध हुआ। गरिमामय कार्यक्रम कीअध्यक्षता उज्ज्वल फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. एल.सी. ठाकरे ने की। विशिष्ट अतिथि सरपंच श्रीमती निर्मला वर्मा,डॉ. बलदाऊ साहू, उज्जवल फाउंडेशन के उपाध्यक्ष राजेश मेच्छीया, और उप सरपंच शत्रुघ्न वर्मा, प्राचार्य श्री साव और थे। कार्यक्रम में मानव अधिकार संरक्षणअवार्ड प्रदान किये गए। मुख्य अतिथि डॉ. जैन ने दिव्यांग छात्र-छात्राओं के हौसले को सम्मानित किया।

Captureमुख्य अतिथि डॉ.चंद्रकुमार जैन ने अपने प्रभावी संबोधन में बड़ी आसानी से विद्यार्थियों को मानव अधिकार का अर्थ समझाया कि हर इंसान की आज़ादी, ज़िन्दगी, बराबरी,और सम्मान की रक्षा ही मानव अधिकार हैं। इन अधिकारों की समझ मानव होने के लिए जरूरी है और इनकी रक्षा करना मानवता का सबूत देना है। विकास की तेज गति, बढ़ती आबादी और अंध प्रतिस्पर्धा के वर्तमान दौर में समाज निरंतर जटिल होता जा रहा है। इसलिये मानव अधिकारों के संरक्षण की आवश्यकता पहले से अधिक है। डॉ. जैन ने कहा कि फ़र्ज़ हर मर्ज़ का इलाज़ है। जीवन में जहां भी कर्तव्य का सौंदर्य है वहां मानव अधिकारों की धड़कनें सहज सुनी जा सकती हैं। इसलिए हर व्यक्ति को अपना काम ईमानदारी से करना होगा ताकि किसी और के बेवजह नुक्सान का वह कारण न बने।
डॉ. चंद्रकुमार जैन ने जिज्ञासु विद्यार्थियों को मैग्नाकार्टा से लेकर आज तक मानव अधिकारों के चिंतन के इतिहास की सारगर्भित चर्चा की। संयुक्त राष्ट्र संघ की घोषणा का सार बताया। मानव अधिकार दिवस मनाने का औचित्य समझाया और भारत में मानव अधिकार क़ानून, आयोग और लोगों के हक़ से ढूढे कई अन्य प्रावधानों का महत्त्व भी बताया। लेकिन, डॉ.जैन ने कहा कि जियो और जीने दो का उद्घोष करने वाले भारतीय जीवन दर्शन में मानव ही नहीं, प्राणी मात्र की रक्षा का संकल्प है। व्यक्ति के अधिकार, प्रकृति के उपकार और समाज के आधार को कभी नहीं भूलने में ही मानव अधिकारों का गौरव और वैभव निहित है। डॉ. जैन ने विद्यार्थियों को प्रेरणा दी कि हर दिन अपने छोटे-छोटे कार्यों और प्रयासों में मानवता का परिचय दें। किसी की मदद करें, किसी को मदद के दूर न करें। दुःख दर्द बाँटें, खुशियों का प्रसार करें। सिर्फ अपने लिए नहीं, कुछ दूसरों के लिए भी जियें। यह काम घर या बाहर कहीं भी संभव है। परिणाम समाज के नव निर्माण के रूप में सामने आएगा।

अध्यक्षता कर रहे मानव अधिकारों और स्वयं सेवी कार्यों के समर्पित स्तम्भ डॉ. एल.सी.ठाकरे ने मानव अधिकारों की संवैधानिक व्यवस्था पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अपनों की रक्षा का हर संभव उपाय करने वाले लोगों को परायों को भी नेकनीयत से देखना चाहिए। किसी की हानि को जब हम अपनी हानि की तरह समझना सीख जाएंगे तभी मानव अधिकारों की रक्षा हो सकेगी। कार्यक्रम में गोविन्द साहू, एल.पी.भीमटे, भागवत वर्मा, सतीश साहू, गजराज साहू, मनीषा भीमटे आदि विशेष रूप से उपस्थित थे।



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