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कार्यलायीन हिंदी के सटीक प्रयोग के आसान होता है कामकाज़

राजनांदगांव। शासकीय दिग्विजय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय के हिंदी विभाग के तत्वावधान में छह अक्टूबर को राज्य स्तरीय हिंदी कार्यशाला का शुभारम्भ मुख्य अतिथि दिग्विजय महाविद्यालय की पूर्व प्राचार्य एवं शिक्षाविद डॉ. हेमलता मोहबे ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ सरस्वती पूजन कर किया। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता शासकीय शिवनाथ विज्ञान महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सुमन सिंह बघेल ने की। समापन सत्र की मुख्य अतिथि शासकीय कमलादेवी राठी महिला महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. बी.एन.मेश्राम थीं । अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. आर.एन.सिंह ने की। विभागाध्यक्ष डॉ. शंकर मुनि राय ने स्वागत वक्तव्य देते हुए कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। कार्यालयीन हिंदी के व्यवहारिक पक्ष पर एकाग्र इस महत्वपूर्ण कार्यशाला के संयोजक डॉ. चन्द्रकुमार जैन ने विषय प्रवर्तन करते हुए आधार वक्तव्य दिया। बाद में दो भागों में तकनीकी सत्रों का क्रम प्रारम्भ हुआ, जिसमें डॉ. शंकर मुनि राय ने कार्यालयीन पत्राचार और डॉ. बी.एन.जागृत ने भाषिक संरचना पर विस्तृत चर्चा की।

संयोजक डॉ. चन्द्रकुमार जैन ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि कार्यशाला कार्यालयीन हिंदी, स्वरूप एवं विशेषताएँ विषय पर केंद्रित थी। सहभगिता कर रहे महाविद्यालयों के अधिकारियों, प्राध्यापकों और कर्मचारियों को सम्बोधित करती हुईं मुख्य अतिथि डॉ. हेमलता मोहबे ने कहा कि कामकाजी हिंदी के सही ज्ञान और प्रयोग से कार्यालयों में संवाद प्रक्रिया आसान होती है। हिंदी के कदम अब पूरी दुनिया में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी, ज्ञान, संस्कार, व्यवहार और उद्धार की भाषा भी है। अध्यक्षीय आसंदी से प्राचार्य डॉ. सुमन सिंह बघेल ने कहा कि संस्थाओं में प्रत्येक व्यक्ति को हिंदी का ज्ञान समुचित ज्ञान होना चाहिए। इससे शासकीय और संस्थागत कार्यों की गति- प्रगति सुनिश्चित होती है। उन्होंने कार्यलयीन हिंदी में अन्य भाषाओं के उन शब्दों को स्वीकार कर लेने पर जोर दिया जो कामकाज के लिए सहज और सरल हों। लेकिन,उनके प्रयोग के प्रति जागरूक भी रहना चाहिए। प्राचार्य डॉ.आर.एन.सिंह ने अपने प्रेरक प्रास्ताविक सम्बोधन में कार्यशाला को समय की बड़ी जरूरत कहते हुए उसकी महत्ता प्रतिपादित। दूसरी तरफ समापन सत्र में उन्होंने कहा कि हिंदी के सटीक प्रयोग और उसकी शुद्धता पर हमें निरंतर ध्यान देना होगा, तभी कार्यशाला सार्थक होगी। समापन सत्र में मुख्य अतिथि प्राचार्य डॉ. बी. एन.मेश्राम ने कहा कि शिक्षक का पद और शिक्षण क्षेत्र आपसे भाषा, व्यव्हार और व्यक्तित्व में प्रभावी बनाने की मांग करता है। इसलिए, भाषा प्रयोग में दक्षता अवश्य प्राप्त करना चाहिए। यह कार्यशाला इस दिशा में यह कार्यशाला मील के पत्थर के समान है।

उल्लेखनीय है कि कार्यशाला में पत्र-लेखन का व्यावहारिक अभ्यास भी करवाया गया, जिसकी समीक्षा प्राचार्य डॉ.आर.एन.सिंह द्वारा की गई। विविध पक्षों पर चर्चा, प्रस्तुतीकरण और मार्गदर्शन के बाद विभिन्न विषयों के प्रतिभागी प्राध्यापकों ने अपने अनुभव साझा किए। विशेष सहभागिता और सहयोग करने वालों में डॉ. ए. के. गौर, ललित प्रधान, माज़िद अली, संजय सप्तर्षि, युनूस परवेज़, दिव्या देशपांडे, डी. के. वर्मा, गोकुल निषाद सहित हिंदी विभाग के नव पदस्थ सहायक प्राध्यापक राम आशीष तिवारी सहित डॉ. नीलम तिवारी, डॉ. स्वाति दुबे, डॉ. गायत्री साहू, दीक्षा देशपांडे, अमितेश और पूरे महाविद्यालय परिवार के सदस्य शामिल थे। अंत में डॉ. चन्द्रकुमार जैन ने आभार ज्ञापित किया।

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