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मतदाता जागरूकता का प्रदर्शन वाली मशीनों से एक्जिट पोल संभव ही नहीं

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री सुब्रत साहू ने स्पष्ट किया है कि मतदाता जागरूकता के लिए उपयोग में लायी जाने वाली प्रादर्श ईव्हीएम और व्हीव्हीपेट मशीनों से किसी भी परिस्थिति में एक्जिट पोल जैसी स्थिति संभव ही नहीं है। मतदाता जागरूकता के लिए उपयोग में लायी जाने वाली सभी मशीनें केवल मतदाता जागरूकता के लिए है। इनमें डमी प्रत्याशी के नाम का उपयोग किया जाता है, न कि वास्तविक प्रत्याशी अथवा राजनीतिक दल का नाम। अतः यह भ्रम है कि ऐसी मशीनों से एक्जिट पोल किया जा सकता है।

श्री साहू ने आज यहां बताया कि प्रशिक्षण और मतदान के लिए उपयोग में लायी जाने वाली मशीनों की सीरिज भी अलग है और इस कार्य में उपयोग में लायी जाने वाली मशीन राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों की मौजूदगी में ही एफएलसी (फर्स्ट लेवल चेकिंग) के पश्चात ही उपयोग में लायी जा सकती है। उन्होंने आज राजधानी रायपुर स्थित अपने कार्यालय में सरगुजा और कोरिया जिलों से प्राप्त शिकायत को तत्काल संज्ञान में लेकर दोनों जिलों के कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारियों से रिपोर्ट ली। श्री साहू ने बताया कि किसी भी प्रशिक्षक द्वारा ईव्हीएम-व्हीव्हीपेट मशीन को अपने घर में नहीं रखा जा रहा है। प्रदर्शन के बाद मशीन तहसील कार्यालय के भण्डार कक्ष अथवा कोषालय में रखा जा रहा है। मशीन के प्रदर्शन के पहले और उसके बाद ऐसी मशीनों के परिवहन का लागबुक भी संधारित किया जा रहा है। जिले में किसी भी प्रकार के ईव्हीएम-व्हीव्हीपेट मशीनों की जब्ती पुलिस द्वारा नहीं की गई है। प्राप्त शिकायत में जिस घटना का उल्लेख किया गया था, वह लगभग एक सप्ताह पुरानी थी। शिकायत आज मिली और जांच के बाद पूरी स्थिति स्पष्ट हो गई।

उन्होंने बताया कि पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ छत्तीसगढ़ राज्य के प्रत्येक जिले में मतदाता जागरूकता का कार्यक्रम सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है। इन मशीनों को एफएलसी अर्थात फर्स्ट लेवल चेकिंग के पश्चात पृथक किया जाता है, ताकि इनका मतदान के लिए उपयोग में आने वाली मशीनों के साथ मिश्रण नहीं हो सके। अगर किसी परिस्थितिवश उनका उपयोग मतदान प्रक्रिया में लिया भी जाना है तो उनका पुनः एफएलसी और कंडिडेट सेटिंग राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के समक्ष पूर्ण प्रक्रिया अपनाते हुए सम्पादित की जाती है। इस प्रक्रिया में भी पूरी पारदर्शिता अपनाई जाती है।

इसी के अंतर्गत जितनी मशीनों का प्रदर्शन हेतु उपयोग किया जा रहा है। उनकी संख्या एक हजार 348 है। वर्तमान में राज्य में 23 हजार 632 मतदान केन्द्रों में से अब तक 12 हजार 300 मतदान केन्द्रों में मशीनों का प्रदर्शन किया जा चुका है। लगभग 15 लाख लोग गांव और शहर में इसे देख चुके हैं।

उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि इन मशीनों का उपयोग प्रदर्शन के पश्चात निर्धारित स्थानों पर सम्पूर्ण सुरक्षा के साथ रखे जाने के निर्देश हैं। भारत निर्वाचन आयोग के इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जा रहा है। इन निर्देशों के परिपालन में यदि काई कोताही बरती जाती है तो किसी भी अधिकारी-कर्मचारी के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने सभी कलेक्टर और जिला निर्वाचन अधिकारियों से यह अपेक्षा की है कि भारत निर्वाचन आयोग की मंशा के अनुरूप विधानसभा निर्वाचन के अंतर्गत मतदाता जागरूकता के लिए उपयोग में लायी जाने वाली ईव्हीएम और व्हीव्हीपेट मशीनें निर्धारित स्थानों पर सुरक्षित रखी जाए। मतदाता जागरूकता कार्यक्रम के लिए निर्धारित कार्यक्रम स्थल में प्रदर्शन पश्चात पूरी सुरक्षा में कोषालय अथवा उप कोषालय अथवा नियत स्थान पर सुरक्षित रखी जाए। उन्होंने सरगुजा (अम्बिकापुर) जिले से इस संबंध में मिली भ्रामक सूचना को संज्ञान में लेते हुए यह निर्देश सभी कलेक्टरों और जिला निर्वाचन अधिकारियों को दिए हैं।

उन्होंने उन स्थितियों को भी पूरी पारदर्शिता के साथ स्पष्ट किया है कि जिन मशीनों का उपयोग वर्तमान में प्रदर्शन के लिए किया जा रहा है, ऐसी सभी मशीनों के लिए प्रत्येक जिलों में कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी के मार्गदर्शन में विशेष कर्त्तस्थ अधिकारियों की तैनाती सुनिश्चित कराई गई है। यही नहीं जिन स्थानों पर प्रदर्शन कराया जाना है या प्रदर्शन हो रहे है, उसके लिए पूर्व से कार्यक्रम निर्धारित किए गए हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुरूप ही यह प्रदर्शन प्रशिक्षित अधिकारियों और कर्मचारियों के माध्यम से कराए जाते हैं। इसलिए यह प्रश्न ही उपस्थित नहीं होता कि ऐसी मशीनों से कोई छेड़छाड़ की जा सके।

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