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यदि आपको भारत में रहने से डर लगता है तो आप बुद्धिजीवी हैं लेकिन यदि आपको *महाराष्ट्र में रहने से डर लगता है तो आप राष्ट्रद्रोही हैं।

यदि आप मोदीजीको दिन रात नेशनल चैनलों पर गाली देते हैं तो यह आपकी *अभिव्यक्ति की आज़ादी* है लेकिन यदि आपने आदित्य ठाकरे के बारे में कुछ बोल दिया तो आप *हरामख़ोर* हैं

यदि आप मनाली या पटना से मुंबई जायेंगे तो आपको क्वॉरंटीन होना पड़ेगा लेकिन यदि आप *टर्की* से उनकी प्रथम महिला से मिलकर आते हैं तो आप खुले घूम सकते हैं

यदि आप किचन बोलकर उस स्थान पर टॉयलेट बना देंगे तो बीएमसी उसे गिरा देगी, लेकिन यदि आप बीच सड़क पर क़ब्ज़ा करके* घर बनाएँ और उसका नाम मातोश्री रख दें तो वह *क़ानून संगत हो जाता है*

भीड़ यदि राजस्थान में पहलू खान की नृशंस हत्या कर दे तो सीधे प्रधान मंत्री और देश की संस्कृति ज़िम्मेदार और वहीं दूसरी भीड़ पालघर में तीन संतों की पीट पीटकर हत्या कर दे तो वह एक सामान्य लॉ एंड ऑर्डर का केस है

महाराष्ट्र का गृहमंत्री खुलेआम देश की एक महिला नागरिक को बोल सकता है की उसे महाराष्ट्र में रहने का कोई हक़ नहीं तो वह सही है लेकिन यदि देश का गृहमंत्री विदेशियों के लिये *CAA* की बात कर दे तो वह खलनायक है।

सुशांत के पिता के लाख कहने पर भी मुंबई पुलिस रिपोर्ट नहीं लिखती क्योंकि वो न्याय संगत नहीं था लेकिन रिया के कहने मात्र से सुशांत की बहन और दिल्ली के एक डॉक्टर के ख़िलाफ़ रिपोर्ट लिख दी जाती है क्योंकि यह उनके हिसाब से न्याय संगत है ।

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