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शैक्षणिक क्षेत्र में अति विशिष्ट योगदान के लिए डॉ.चन्द्रकुमार जैन को प्रतिभास्थली न्यास सम्मान

राजनांदगांव। नर्मदा के पावन तट पर जबलपुर में चालीस एकड़ के विशाल परिसर में स्थापित प्रतिभस्थली ज्ञानोदय विद्यापीठ में दिग्विजय कालेज के हिंदी विभाग के राष्ट्रपति सम्मानित प्रोफ़ेसर डॉ.चन्द्रकुमार जैन को प्रतिभास्थली न्यास सम्मान से अलंकृत किया गया। लगभग डेढ़ हजार अभिभावकों और आवासीय गुरुकुल की लगनशील छात्राओं ने पूरे मनोयोग से डॉ. जैन को सुना। अतिथि व्याख्यान देने पहुंचे डॉ.जैन का ट्रस्ट मंडल और संस्था परिवार द्वारा भावभीना स्वागत किया और उन्हें रजत स्मरणिका, अंग वस्त्र, सम्मान प्रतीक चिन्ह स्मृति और उत्कृष्ट साहित्य भेंट करते हुए संस्कारयुक्त समसामयिक शिक्षा के प्रसार में उनके योगदान की मुक्त ह्रदय से अनुमोदना की।

डॉ.चन्द्रकुमार जैन ने दो सत्रों में अलग-अलग संबोधन कर पहले अभिभावकों को प्रतिभास्थली के उच्च मानदंडों के साथ लयबद्ध होकर अवकाश के दिनों में भी अपनी बेटियों, बालिकाओं को शिक्षा का लक्ष्य जीवन का निर्वाह नहीं, निर्माण है के सूत्र को आत्मसात करने की प्रभावी अभिप्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और परम्परा के अनुरूप जबलपुर ही नहीं, रामटेक और चंद्रगिरि डोंगरगढ़ में भी संचालित प्रतिभास्थली शिक्षण संस्थान शिक्षा के साथ, श्रम और कौशल के संगम के अनोखे उदाहरण बन गए हैं। शिक्षा के साथ चलें संस्कारों की ओर की आवाज़ बुलंद कर यहां परंपरा और आधुनिकता की दुर्लभ जुगलबंदी महसूस की सकती है।

प्रतिभास्थली द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार डॉ.चन्द्रकुमार जैन ने दूसरे सत्र में छात्राओं को बताया कि ज़िन्दगी का काम सूरज उगाना और अपनी प्रतिभा, क्षमता और संभावना को उपयोगी बनाना है। ज्ञान, विज्ञान के साथ-साथ कला, संस्कृति, व्यापार आदि क्षेत्रों में सदैव अग्रणी रहे भारत के अतीत और वर्तमान के साथ नया संवाद जरूरी है। भारत को प्रतिभारत बनाने के लिए तन, मन, वचन, धन, वन, वतन और चेतन को निखारने का संकल्प अद्भुत है। शिक्षण के साथ प्रशिक्षण, सूचना के साथ कौशल और बुद्धि के साथ परिश्रम की प्रतिष्ठा से यह संकल्प साकार किया जा सकता है। डॉ. जैन के प्रेरक वक्तव्य, मर्मस्पर्शी काव्य पंक्तियों और प्रभावशाली मार्गदर्शन से भावविभोर हो कर सुसंस्कृत और अनुशासित छात्राओं ने अपना सर्वश्रेष्ठ देकर व्यक्तित्व और आगामी जीवन को समाजोपयोगी बनाकर जीवन को सार्थक करने की प्रतिज्ञा दोहरायी।

प्रारम्भ में ज्ञानोदय न्यास के स्तम्भ श्री चक्रेश जैन और संस्था की संचालिका दीदियों ने डॉ.चंद्रकुमार जैन का परिचय देते हुए उन की बहुआयामी उपलब्धियों से अभिभावकों तथा छात्राओं को अवगत करवाया। पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रतिभस्थली का विशाल सभागृह हर्ष और करतल ध्वनि से गूंजता रहा।

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