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‘रामलला हम आएंगे’ कहा था, लेकिन घर बैठने को मजबूर !

रामजन्म भूमि मंदिर के शिलान्यास के आयोजन को ऐतिहासिक बनाने की तैयारियां पूरी हो गई हैं। कोरोना संक्रमण के डर से मंदिर के भूमिपूजन पंडाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित सिर्फ 150 लोगों को ही प्रवेश दिए जाने की तैयारी है। लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी भी अपनी हसरतों के राममंदिर का शिलान्यास घर बैठे टीवी स्क्रीन पर ही देखेंगे। अयोध्या के आसपास 84 कोस में आनेवाली सभी तपस्थलियों व 151 मंदिरों व पवित्र जगहों पर अनुष्ठान शुरू हो रहे हैं। देश भर से लाए गए 3600 पवित्र स्थानों, ऐतिहासिक स्थलों, श्रद्धाकेंद्रों, जलकुंडों व नदियों की पवित्र मिट्टी व जल से भूमिपूजन होगा। पूरा अयोध्या राममय हो गया है। अयोध्या के रेलवे स्टेशन को राम मंदिर की प्रतिकृति जैसा रूप दिया जा रहा है।

अयोध्या पुलकित है। अयोध्यावासी खुश हैं और अयोध्या की आभा आनंदित है। अयोध्या नगरी में वैसे भी कण कण में राम है, लेकिन फिर भी एक बार फिर सब कुछ नए सिरे से राममय होने जा रहा है। श्रीराम जन्मभूमि पर भगवान राम के भव्य मंदिर का निर्माण हो रहा है। भूमिपूजन के लिए देश के 2000 स्थानों के पवित्र कुंडों का जल, 1500 पवित्रतम व ऐतिहासिक स्थानों की मिट्टी एवं 100 पवित्र नदियों का प्रवाहमान जल मंगवाया गया है। भूमि पूजन बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों हो रहा है। आयोजन को ऐतिहासिक बनाने की सारी तैयारियां पूरी हो गई हैं। इस ऐतिहासिक क्षण का हर कोई गवाह बनना चाहता है। लेकिन आमंत्रण केवल 150 अतिथियों को ही हैं। आपको, हमको और देश व दुनिया के करोड़ों लोगों को मंदिर के निर्माण के शुरू होने का नजारा घर बैठे ही देखना होगा। यह नजारा वे हजारों लोग भी घर बैठे ही देखेंगे, जिन्होंने 6 दिसंबर 1992 को ‘रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे’ का नारा गुंजायमान करते हुए अयोध्या पहुंचकर ‘एक धक्का और दो…’ के उद्घोष के साथ आजाद भारत के सबसे बड़े जनआंदोलन को मूर्तरूप दिया था।

माहौल अगर माकूल होता, और हालात सामान्य होते, तो अयोध्या में इन दिनों पांव रखने को जगह नहीं मिलती। लेकिन काल कोरोना के संक्रमण का है और बचाव के लिए सोशल डिस्टेंसिग सबसे पहली अनिवार्यता। इसीलिए अयोध्या में बहुत कम लोग नजर आएंगे। भूमिपूजन के पंडाल में सुरक्षा अधिकारियों सहित कुल मिलाकर सिर्फ 150 लोगों को ही प्रवेश की अनुमति है। आयोजन समिति की ओर से भी 50 पदाधिकारियों को ही अंदर जाने की अनुमति का प्रावदान किया गया है। कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए जरूरी कदम के तहत विश्व हिंदू परिषद ने अपने कार्यकर्ताओं को भी इन 2 दिनों के लिए अयोध्या से दूर रहने के लिए कहा है। यही कारण है कि राम जन्मभूमि आंदोलेन में 6 दिसंबर 1992 को जिन हजारों लोगों ने कहा था कि ‘रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे’ वे भी वहां नहीं जा पा रहे हैं, और मंदिर के बनने की शुरूआत को वहां बिना गए ही देखने को मजबूर है। यहां तक कि राम जन्मभूमि आंदोलन के संवाहक के रूप में अग्रणी रहे पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी को भी अपनी हसरतों के रामंमंदिर का शिलान्यास घर बैठे टीवी स्क्रीन पर ही देखना होगा।

राम मंदिर के भूमिपूजन के लिए विभिन्न अनुष्ठानों की शुरूआत हो गयी है। न्यास श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के 84 कोस इलाके में आनेवाली सभी तपस्थलियों व 151 तीर्थ स्थलों पर दो दिनों तक जप, तप, यज्ञ, हवन व अनुष्ठान के साथ राम चरित मानस, दुर्गा सप्तशती व विष्णु सहस्रनाम के पाठ होंगे। अयोध्या सहित आसपास के चार जिलों में फैले इस तीर्थक्षेत्र के विभिन्न स्थलों बारे में स्कंद पुराण, वाल्मीकि रामायण, हरिबंश पुराण, रुद्रयामल जैसे ग्रंथों में वर्णन है। 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अयोध्या पहुंचने के साथ ही इन सभी 151 स्थलों पर पंडितों, पुरोहितों व स्थानीय लोगों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार गुंजायमान ने होंगें। संत गोस्वामी तुलसी दास की जन्मस्थली राजापुर के साथ ही 84 कोस में स्थित तपस्थलियों व तीर्थक्षेत्र के लोग अनु्ष्ठान की पूर्णहुति में शामिल होंगे।

राज जन्मस्थली में भारत की धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं परंपरा की विरासत को समाहित करने के लिए 3600 स्थानों की पवित्रतम मिट्टी व जल मंगवाया गया है। देश के 1500 पवित्रस्थलों और ऐतिहासिक स्थानों की मिट्टी, 2000 स्थानों के कुंडों का पवित्र जल एवं 100 नदियों का प्रवाहमान जल अयोध्या पहुंचा है। राजस्थान में मेवाड़ के हल्दी घाटी व चितौड़गढ़ सहित वैष्णो देवी मंदिर, स्वर्ण मंदिर व विख्यात जैन तीर्थ सम्मेत शिखरजी की पवित्र माटी सहित पेशवा किला, रायगढ़ किला, सभी ज्योतिर्लिंगों की मिट्टी मंगाई गई है। इसके अलावा गंगा, यमुना, नर्मदा, सतलज, गोदावरी, कृष्णा, रावी, व्यास, झेलम, ब्रह्मपुत्र समेत 100 नदियों के अलावा करीब 2000 पवित्र कुंडों का भी जल मंगवाया गया है। इस जल व मिट्टी का विभिन्न आयोजनों व निर्माण में उपयोग किया जा रहा है।

अयोध्या नगरी में सब कुछ राममय होने की दिशा में जो प्रयास हो रहे हैं। वैसे, तो फिलहाल पूरी अयोध्या नगरी को भव्य तरीके से संवारा व सजाया गया है। लेकिन राममयी महिमा को स्मृतियों से स्थायी रूप से जोड़े रखने के लिए अयोध्या के रेलवे स्टेशन को भी मंदिर की प्रतिकृति के रूप में ही विकसित किए जाने की योजना बन रही है। लगभग 105 करोड़ रुपयों की लागत से बननेवाले अयोध्या रेलवे स्टेशन के नए भवन के बाहरी लुक एवं भीतरी निर्माण को बिल्कुल राम मंदिर के स्वरूप में ढाला जा रहा है। अयोध्या स्टेशन पर यात्री सुविधाओं, सफाई, सुंदरता तथा विभिन्न आवश्यक सुविधाओं को हाई क्वालिटी स्टेंडर्ड पर ले जाने का प्लान फाइनल कर दिया गया है।

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