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हिन्दी अभिव्यक्ति की अनोखी शक्ति से झूम उठीं छात्राएँ

राजनांदगाँव । महारानी लक्ष्मीबाई स्कूल की छात्राओं को लिखने, बोलने, संवाद करने के साथ-साथ हिंदी भाषा के माध्यम से भविष्य निर्माण के ऐसे प्रभावी टिप्स दिए गए कि पूरा माहौल डेढ़ घंटे तक हर्ष ध्वनि और करतल ध्वनि से गूंजता रहा । दिग्विजय महाविद्यालय के हिंदी विभाग की टीम महारानी लक्ष्मीबाई स्कूल में शिक्षा विस्तार कार्यक्रम लेकर पहुँची और पूरी सादगी के साथ एक स्मरणीय आयोजन की सौगात संस्था के इतिहास में जुड़ गयी ।

हिंदी विभाग ने विभाग प्रमुख डॉ. शंकर मुनि राय, डॉ. चन्द्रकुमार जैन, डॉ. बी.एन. जागृत, डॉ. रामआशीष तिवारी, डॉ. नीलम तिवारी आदि के नेतृत्व में स्नातकोत्तर हिंदी के होनहार विद्यार्थियों के साथ स्कूल के खचाखच भरे सभागृह में कन्या विद्यालय की उच्चतर कक्षाओं की बालिकाओं को अभूतपूर्व प्रेरणा दी ।

प्राध्यापकों ने भविष्य तथा रोजगार की दृष्टि से हिंदी के महत्व सहित हिंदी की शब्द संपदा, देवनागरी की वैज्ञानिकता, काव्य पाठ, वक्तृत्व व रचनात्मक लेखन कला तथा प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण के गुर बड़े ही रोचक अंदाज़ में बताए । विद्यालयीन और महाविद्यालयीन शिक्षा के दो विशाल केंद्रों यानी एमएलबी और डीएमवी का यह समागम मील का पत्थर साबित हुआ । मेज़बान संस्था की प्राचार्य श्रीमती के.अग्रवाल ने प्रेरक सम्बोधन में छात्राओं को हिंदी भाषा के वैभव का विशेष परिचय दिया और स्वागत वक्तव्य में दिग्विजय कालेज की हिंदी विभाग की यशस्वी टीम द्वारा आहूत इस गौरवशाली प्रसंग का पूरी लगन से से लाभ अर्जित करने का आह्वान किया। वास्तव में हुआ भी यही, एमएलबी की छत्राओं की अनुशासित भागीदारी ने आयोजन में चार चाँद लगा दिए।

गूंजे अरपा पैरी के धार के स्वर
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हिंदी अभिव्यक्ति की शक्ति के साथ ही छत्तीसगढ़ की गुरतुर भाषा के स्वर भी तक गूँज उठे जब डॉ. चंद्रकुमार जैन ने प्रदेश के राजगीत अरपा पैरी के धार को तरन्नुम में गाया और उसे बालिकाओं सहित सभागृह में मौजूद सभी लोगों ने साथ-साथ झूमकर गुनगुनाया। छत्तीसगढ़ महतारी की वंदना की। पूरे कार्यक्रम के दौरान प्राचार्य श्रीमती के.अग्रवाल के साथ व्याख्याता श्रीमती सरोज सिन्हा, श्रीमती संध्या सोहते, श्रीमती लता रामटेके ने ख़ास तौर उपस्थित रहकर सराहनीय सहयोग प्रदान किया।



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