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धर्म के लिए दान दे दो लेकिन किसी को उधार मत दो : सुधा सागर जी

चद्रोदय तीर्थ क्षेत्र चांदखेडी जैन मंदिर खानपुर में चातुर्मास के दौरान चल रहे मंगलकारी प्रवचन में मुनि पुंगव सुधासागर जी महाराज ने शुक्रवार को कारण, ज्ञान, साधन और व्यसन को अंतिम रूप देने पर बल दिया। उन्होंने जहां एक और जैन दर्शन का महत्व बताया वहीं कसाय, पाप, बुराई को अंतिम रूप देने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि हमारा कार्य पूज्य होना चाहिए। व्यक्ति कारण में संतुष्ट नहीं होता, साधन मे उपलब्धि नहीं होती। उन्होंने कहा कि धर्म में भले ही दान दे दो, लेकिन किसी को उधार मत देना, उधार दिया पैसा वापस नहीं आता। लोगों की परेशानियां इतनी अधिक है कि उधार लौटाते नहीं। उन्होंने जैन दर्शन की व्याख्या करते हुए कहिा कि वह व्यक्ति भाग्यशाली है जो अभिषेक करते हैं, आठ वर्ष की उम्र में मुनि को आहार कराते हैं, हजारो लोग ऐसे है जो अभिषक नहीं कर पाते। उन्होंने कहा गुरू का ज्ञान तुम्हारा है, संस्थान, मंदिर खेत है, जिनेन्द्र रूपी वसीयत मिली वह खेत है।

उन्होंने उपलब्धि और कारण पर के बारे में बताया कि हम कार्य कर करे हैं, लेकिन उसे अंतिम रूप नहीं दे रहे हैं। जिंदगी कारण में निकल जाएगी, इसलिए हर कार्य को अंतिम रूप दो। बचपन से बुढापा आ जाता है, लेकिन हम जिंदगी जी नहीं पाते। उन्होंने कहा कि रोटी खाना, पढाई करना, सब अज्ञान का प्रतिकार है। ज्ञान में उपलब्धि का अनुभव आ रहा है, हम उपलब्धि तक नहीं पहुंच पा रहे।

महासागर जी महाराज ने कहा कि जो जैसा करेगा वैसा ही भरेगा, हमे निस्वार्थ व निश्चल होकर कार्य करना चाहिए। समभाव, करूणा भाव से ज्ञान उद्घाटित होता है। अपने लिए जिया गया जीवन पशु तुल्य होता है। जीवन को सुधारने के लिए नियमों में परिवर्तन करना चाहिए। इस दौरान बालिका साक्षी ने भी गीत व प्रवचन के माध्यम से धर्म का प्रचार किया। चांदखेडी के अध्यक्ष हुकम जैन काका ने बताया कि मुनि संघ के सानिध्य में चल रहे प्रवचन में श्रावक को जहां एक और धर्म लाभ प्राप्त हो रहा है वहीं परिवार में सम्बंधों को दृढ करने, जीवन को सफल बनाने के लिए वर्तमान परिपेक्ष में किए जाने वाले कार्यों का भी महत्व बताया जा रहा है।

कमेटी के महामंत्री नरेश जैन वैद, कोषाध्यक्ष गोपाल जैन, अजय बाकलीवाल, महावीर जैन, प्रशांत जैन, कैलाश जैन भाल सहित कमेटी के सदस्यों द्वारा नियमित रूप से प्रवचन की व्यवस्थाओं को संभाला जा रहा है। सभी का सहयोग अनुकरणीय हो रहा है। मुनि श्री के संघ में मुनि महासागर महाराज, मुनि निष्कंप सागर महाराज, क्षुल्लक गंभीर सागर और धैर्य सागर महाराज की उपस्थिति में श्रावकों को धर्म लाभ प्राप्त हो रहा है।

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