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पश्चिम रेलवे के गोधरा गुड्स शेड को मिला बेहतर बुनियादी ढाँचा

मुंबई भारतीय रेलवे माल यातायात की मात्रा और राजस्व बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत है। इसी दिशा में काम करते हुए, पश्चिम रेलवे भी अपने माल व्यवसाय की बढ़ोतरी के लिए हरसम्भव बेहतर प्रयास कर रही है। पश्चिम रेलवे के अंतर्गत माल परिवहन व्यवसाय को बढ़ाने के लिए ज़ोनल और मंडल स्तर पर विभिन्न व्यावसायिक विकास इकाइयाँ (BDU) स्थापित की गई हैं और भावी ग्राहकों के साथ बातचीत करके व्यापार में आसानी को बेहतर बनाने और विद्यमान प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए विभिन्न नई प्रोत्साहन योजनाओं की घोषणा भी की गई है। इस दिशा में सभी मंडलों में विभिन्न गुड्स शेडों के सुधार कार्य प्रगति पर हैं। सुधार के दायरे में एप्रोच रोड, प्लेटफ़ॉर्म सरफेस, लाइटिंग, लेबर फैसिलिटीज़, ट्रेडर्स रूम, कवरशेड रिपेयर, सर्कुलेटिंग एरिया का सुधार और ट्रैक लिफ्टिंग शामिल हैं। इसी क्रम में देवास, गांधीधाम और अन्य गुड्स शेडों में उल्लेखनीय सुधार के बाद, पश्चिम रेलवे ने अब वडोदरा डिवीजन के गोधरा गुड्स शेड में ढाॅंचागत सुधार सुनिश्चित किया है। माल शेड में कवर शेड और बेंच उपलब्ध कराए गये हैं, जो मजदूरों के लिए बहुत बड़ी सुविधा है।

अब सभी मजदूर ट्रकों के आवागमन से परेशान हुए बिना बेफिक्र होकर काम के बाद आराम भी कर सकते हैं। उल्लेखनीय है कि Covid19 महामारी और लॉकडाउन के कारण सबसे कठिन चुनौतियों के बावजूद, इस वित्तीय वर्ष के दौरान पश्चिम रेलवे पार्सल परिवहन के मामले में पूरी भारतीय रेल पर कुल 27% राजस्व और 32% लदान के उल्लेखनीय योगदान के साथ अव्वल है। रेलवे बोर्ड के निर्देशों के अनुसार, पश्चिम रेलवे ने माल ढुलाई करने वालों को आकर्षित करने के लिए पाॅंच नई प्रोत्साहन योजनाऍं भी शुरू की हैं। इन नये प्रोत्साहनों की मदद से, भारतीय रेलवे प्रतिस्पर्धी इकाई दरों पर माल ग्राहकों को ट्रैफ़िक की पेशकश करेगी, जो सड़क परिवहन की तुलना में काफी कम हैं और माल को त्वरित गति के साथ सीधे गंतव्य तक पहुॅंचाया जायेगा। अतिरिक्त ट्रैफ़िक को आकर्षित करने के लिए ग्राहकों का विश्वास बढ़ाना एक प्राथमिक आवश्यकता है। माल ग्राहकों की नजर में एक सकारात्मक छवि बनाये रखने से माल ढुलाई राजस्व पर एक विशेष प्रभाव पड़ेगा। इस प्रकार रेलवे के सम्भावित माल ढुलाई ग्राहकों तक पहुॅंचने की दिशा में सभी कदम उठाये जा रहे हैं, ताकि वे यह समझ सकें कि रेलवे उनकी ज़रूरतों को कैसे पूरा कर सकती है।

पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी श्री सुमित ठाकुर द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, गोधरा माल शेड में गोधरा यार्ड के लाइन नम्बर -14 पर एक गुड्स प्लेटफॉर्म है, जो मूल रूप से खाद्यान्न, सीमेंट आदि की लोडिंग और अनलोडिंग के लिए उपयोग में लाया जाता है। एक माल कार्यालय और व्यापारियों के कमरे का निर्माण पहले किया गया था, लेकिन कोई कवर शेड नहीं था, न ही कोई बेंच दी गई थी। कवर शेड और बेंच उपलब्ध नहीं होने के कारण लोडिंग / अनलोडिंग गतिविधियों से निपटने वाले मजदूरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। वे मानसून के दौरान बारिश और गर्मी के दौरान कठोर धूप के सम्पर्क में रहते थे। इसलिए, हाल ही में मुख्यालय कार्यालय, चर्चगेट द्वारा शुरू किए गए एक सुधार अभियान के अंतर्गत इस गुड्स कार्यालय और व्यापारियों के कमरे के सामने मौसम की परेशानी से बचाव हेतु शेड उपलब्ध कराये गये हैं।144 वर्ग मीटर के क्षेत्र के साथ गुड्स कार्यालय और ट्रेडर्स रूम के पीछे की ओर एक कवर शेड भी प्रदान किया गया है। कोटा स्टोन पत्थर के बिछाकर कवर शेड के नीचे के फर्श में उल्लेखनीय सुधार किया गया है। 25 से 30 व्यक्तियों के बैठने की क्षमता वाले 5 ग्रेनाइट बेंच भी प्रदान किये गये हैं।

श्री ठाकुर ने बताया कि 22 मार्च, 2020 से लागू पूर्ण लॉकडाउन और वर्तमान आंशिक लॉकडाउन के दौरान कठिनतम परिस्थितियों और विकट चुनौतियों के बावजूद, पश्चिम रेलवे ने 2 सितम्बर, 2020 तक मालगाड़ियों के 13,693 रेक लोड करके काफी सराहनीय कार्य किया है, जिसके फलस्वरूप 3600 करोड़ रु. से अधिक का उल्लेखनीय राजस्व हासिल हुआ है। विभिन्न स्टेशनों पर श्रमशक्ति की कमी के बावजूद पश्चिम रेलवे द्वारा अपनी मालवाहक ट्रेनों के ज़रिये देश भर में अत्यावश्यक सामग्री का परिवहन बखूबी सुनिश्चित किया जा रहा है। इनमें पीओएल के 1452, उर्वरकों के 2352, नमक के 716, खाद्यान्नों के 130, सीमेंट के 1138, कोयले के 495, कंटेनरों के 6324 और सामान्य माल के 61 रेकों सहित कुल 28.54 मिलियन टन भार वाली विभिन्न मालगाड़ियों को उत्तर पूर्वी क्षेत्रों सहित देश के विभिन्न राज्यों में भेजा गया। इनके अलावा मिलेनियम पार्सल वैन और मिल्क टैंक वैगनों के विभिन्न रेक दवाइयों, चिकित्सा किट, जमे हुए भोजन, दूध पाउडर और तरल दूध जैसी विभिन्न आवश्यक वस्तुओं की मांग के अनुसार आपूर्ति करने के लिए उत्तरी और उत्तर पूर्वी क्षेत्रों में भेजे गये। कुल 26,690 मालगाड़ियों को अन्य ज़ोनल रेलों के साथ इंटरचेंज किया गया, जिनमें 13,486 ट्रेनें सौंपी गईं और 13,504 ट्रेनों को पश्चिम रेलवे के विभिन्न इंटरचेंज पॉइंटों पर ले जाया गया। इस अवधि के दौरान जम्बो के 1780 रेक, BOXN के 853 रेक और BTPN के 740 रेकों सहित महत्वपूर्ण आवक रेकों की अनलोडिंग पश्चिम रेलवे के विभिन्न स्टेशनों पर मजदूरों की कमी के बावजूद सुनिश्चित की गई।

श्री ठाकुर ने बताया कि 23 मार्च से 2 सितम्बर, 2020 तक 1.15 लाख टन से अधिक विभिन्न अत्यावश्यक सामग्री का परिवहन पश्चिम रेलवे द्वारा अपनी 514 पार्सल विशेष गाड़ियों के माध्यम से किया गया है, जिनमें कृषि उत्पाद, दवाइयाॅं, मछली, दूध आदि मुख्य रूप से शामिल हैं। इस परिवहन के माध्यम से मिलने वाला राजस्व 37.68 करोड़ रुपये से अधिक रहा है। इस अवधि के दौरान 83 मिल्क स्पेशल गाड़ियों को पश्चिम रेलवे द्वारा चलाया गया, जिनमें 59 हजार टन से अधिक का भार था और वैगनों का 100 % उपयोग हुआ। इसी प्रकार, 35,700 टन से अधिक भार वाली 385 कोविड -19 विशेष पार्सल ट्रेनें भी विभिन्न आवश्यक वस्तुओं के परिवहन के लिए चलाई गईं। इनके अलावा, 11,600 टन भार वाले 27 इंडेंटेड रेक भी लगभग 100% उपयोग के साथ चलाए गये। उल्लेखनीय है कि पश्चिम रेलवे ने देश के विभिन्न हिस्सों में समयबद्ध पार्सल विशेष रेलगाड़ियों को चलाने का सिलसिला लगातार जारी रखा है।

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