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कमलादेवी चट्टोपाध्याय को याद किया गूगल ने

गूगल ने आज स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक कमलादेवी चट्टोपाध्याय को उनके 115वें जन्मदिवस पर डूडल बनाकर श्रद्धांजलि दी है. तीन अप्रैल, 1903 को जन्मीं कमलादेवी चट्टोपाध्याय ने स्वतंत्रता संग्राम में तो योगदान दिया ही, आजादी के बाद भारत में हस्तशिल्प, हथकरघा और थिएटर की हालत सुधारने में भी अहम भूमिका निभाई. आज के गूगल डूडल में उनके इन कामों की भी झलक देखने को मिलती है। 29 अक्टूबर 1988 को 85 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था।

कमलादेवी चट्टोपाध्याय एक महान स्वतंत्रता सेनानी थीं। वह एक समाज सुधारक और अभिनेत्री भी थीं। कमलादेवी दो साइलेंट (मूक) फिल्मों में नजर आई थीं। इसमें से एक कन्नड़ की पहली साइलेंट फिल्म थी। इसका नाथ था ‘मृच्छकटिका (1931)।’ इसके बाद वह ‘तानसेन’ फिल्म में नजर आईं। वे फिल्म ‘तानसेन’ में केएल सहगल के साथ भी दिखीं. उसके बाद कमलादेवी ने ‘शंकर पार्वती’ (1943) और ‘धन्ना भगत’ (1945) जैसी फिल्में भी कीं।

आजादी के आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी को लेकर महात्मा गांधी को उन्होंने मनाया था और इसके बाद आजादी के आंदोलनों में महिलाओं ने भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।चट्टोपाध्याय का जन्म 3 अप्रैल 1903 को कर्नाटक के मैंगलोर में हुआ था। आज उनका 115वां जन्मदिन है। कमलादेवी चट्टोपाध्याय ने महिलाओं के अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता, पर्यावरण के लिए न्याय, राजनीतिक स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों संबंधित गतिविधियों के लिए प्रस्ताव रखा था।

कमलादेवी चट्टोपाध्याय को भारत के उच्च सम्मान पद्म भूषण (1955), पद्म विभूषण (1987) से भी सम्मानित किया गया था। वर्ष 1966 में उन्हें एशियाई हस्तियों एवं संस्थाओं को उनके अपने क्षेत्र में विशेष रूप से उल्लेखनीय काम करने के लिए दिया जाने वाला ‘रेमन मैगसेसे पुरस्कार भी प्रदान किया गया। कमलादेवी ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर कई किताबें लिखीं हैं। उन्होंने ‘द अवेकिंग ऑफ इंडियन वुमन ‘जापान इट्स विकनेस एंड स्ट्रेन्थ, ‘अंकल सैम एम्पायर, ‘इन वार-टॉर्न चाइना और ‘टुवर्ड्स ए नेशनल थिएटर जैसी कई किताबें भी लिखीं।

दिल्ली में मौजूद थिएटर संस्थान राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, संगीत नाटक अकादमी, सेंट्रल कॉटेज इंडस्ट्रीज इंपोरियम और क्राफ्ट्स काउंसिल ऑफ इंडिया जैसे संस्थानों को बनाने में उनकी भूमिका अहम रही।

कमलादेवी चट्टोपाध्याय का जन्म कर्नाटक के मंगलोर में हुआ था. उनके पिता मंगलोर के जिला कलेक्टर थे. वे जब केवल सात साल की थीं तभी उनके पिता का निधन हो गया था. कमलादेवी 14 बरस की हुईं तो उनकी शादी कर दी गई. दो साल बाद उनके पति कृष्ण राव की भी मौत हो गई. वह पढ़ाई के लिए चेन्नई के क्वीन मेरीज़ कॉलेज में जाती थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात सरोजनी नायडू की छोटी बहन से हुई। इसके बाद उनकी मुलाकात सरोजनी नयाडू के भाई हरेंद्र नाथ चट्टोपाध्याय से हुई। कुछ समय बाद कमलादेवी और हरेंद्र नाथ ने शादी कर ली, हालांकि बाद में उनका और हरेंद्र नाथ का तलाक हो गया था। उस जमाने में रूढ़ियां और भी सख्त थीं. विधवा विवाह और जाति से बाहर शादी करने के चलते उनकी खूब आलोचना की गई. लेकिन उन्होंने इसकी परवाह नहीं की. पति हरेंद्रनाथ चट्टोपाध्याय के साथ कमलादेवी लंदन चली गई थीं. बाद में 1923 में उन्हें महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन के बारे में पता चला तो वे भारत लौट आईं और स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय हो गईं. उन्होंने गांधीजी के नमक सत्याग्रह में भी हिस्सा लिया था. इस बीच हरेंद्रनाथ से उनका तलाक हो गया था. आजादी के बाद देश दो हिस्सों में बंट गया. पाकिस्तान से आ रहे शरणार्थियों को बसाने के लिए जगह तलाशी जा रही थी. तब कमलादेवी ने गांधीजी से एक टाउनशिप बसाने की अनुमति ली. इस तरह फरीदाबाद का जन्म हुआ जहां 50,000 शरणार्थियों को रहने की जगह मिली.

कमलादेवी ने सहकारिता आंदोलन के जरिए भारतीय महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक हालत को सुधारने का भी काम किया. राजधानी दिल्ली स्थित थिएटर संस्थान राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, संगीत नाटक अकादमी, सेंट्रल कॉटेज इंडस्ट्रीज इंपोरियम और क्राफ्ट्स काउंसिल ऑफ इंडिया जैसे संस्थानों को बनाने में उनकी भूमिका अहम रही।



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