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प्रभा शर्मा की कविताओं से गुलज़ार हुआ विश्व मैत्री मंच

विश्व मैत्री मंच पर इस बार प्रभा शर्मा की कविताओं पर चर्चा का यादगार दौर चला।। प्रभा जी की कविताओं में भाषा में ताज़गी और उम्दा फ्लो है.। और कहन का रेशमज़बान लहज़ा भी। बुनावट की दृष्टि से यह अच्छी तरह कसी हुई है। जिसके बिम्ब बेशक़ एकदम अनूठे नहीं हैं लेकिन सटीक इस्तेमाल के कारण अपनी चमक को क़ायम रखने में सफल हैं।
प्रस्तुत हैं प्रभाजी की चुनिंदा कविताएँ..
कविताएँ
“समय”
मत बंद करो,
दरवाजे खिड़कियों को,
निकल जाने दो अंदर की गर्म हवा को,
बाहर की रोशनी आने दो,
मत बांधो विचारों को,
किसी दायरे में इन्हें आदत डालो समय के साथ बदलने की,
कोशिश करो समय के साथ साथ चलने की,
कहीं से मिले,
जो भी मिले,
उसे अपना लो
क्यों कि ?
इंतज़ार नहीं करता कभी
समय !
किसी का
– प्रभा शर्मा “सागर”

“ज़िंदगी”
ज़िंदगी एक किराये का घर है,
इक न इक दिन बदलना पड़ेगा।
मौत जब तुम को आवाज़ देगी,
घर से बाहर निकालना पडे़गा ।
ढ़ेर मिट्टी का हर आदमी है,
बाद मरने के होना यही है।
रात के बाद होगा सवेरा ,
देखना है मौका सुनहरा मगर ,
पांव फूलों पे रखने से पहले,
हमको भी कांटों से गुजरना पड़ेगा ।।
– प्रभा शर्मा “सागर”

“शहादत”
भुलाये उनको हम सब जा रहे हैं,
वतन पे मिटने को उत्सुक रहे हैं।
बदौलत जिनकी हैं आजाद हम सब,
उन्हें हम याद कर ना पा रहे हैं।
मेहरबानी है उनकी कौम पर जो,
तिरंगा आज हम फहरा रहे हैं ।
गुलामी की कटे जंज़ीर कैसे,
भरे सीने में वो लावा रहे हैं।
वतन “सागर” उनको जां से प्यारा,
फना के बाद भी जिंदा रहे हैं।
– प्रभा शर्मा “सागर”

“खूबसूरत”
ज़िंदगी खूबसूरत हुई है,
जब से उनसे मुहब्बत हुई है।
साथ उनका मिला जब मुझे तो,
मुझ में जीने की चाहत हुई है।
मेरी खुशियों का आलम न पूछो,
मेहरबां जैसे किस्मत हुई है।
हर नजारा लगे कितना प्यारा,
कितनी दिलकश ये कुदरत हुई है।
कह रही “सागर”
दिल की धड़कन,
सुर्ख दिल की रंगत हुई है।
– प्रभा शर्मा ” सागर”

“दस्तूर”
किसी को भी अपना बनाने से पहले ,
हुनर सीख लो तुम ज़माने से पहले।
ये दुनिया का दस्तूर है सोच लेना,
की रोना पड़ेगा हँसाने से पहले।
तुझे जख़्म देकर करेगा वो जख़्मी ,
संभालना जरा चोट खाने से पहले।
इरादों केा अपने बुलंदी ने रखना,
नहीं ख़्वाब टूटे सजाने से पहले।
न झूठी तसल्ली कसम कोई खाना,
करो ग़ौर वादा निभाने से पहले।
नहीं दुनिया पहले सी अब जो ,
कटा देगी सर को झुकाने से पहले।
– प्रभा शर्मा “सागर”

काव्यकोश में पंजाबी कवि मिन्दर चित्र सज्जा कस्तूरी मणिकांत:

unnamed (1)

आज की संचालक है मंच की साथी कवयित्री, कथाकार सरस दरबारी और पूर्ति खरे फिलवक्त सरस दरबारी
आइए सरस जी स्वागत है

विश्व मैत्री मंच के प्रबुद्ध मंच से आप सभी को नमस्कार, खुशामदीद, गुड मॉर्निंग ….
….आज की सुबह वाकई खूबसूरत है, ठंड अपने पूरे शबाब पर है, फिजा धुन्ध के आगोश में अलसाई हुई है , और गरमागरम अदरख की चाय का प्याला हाथों में लिए, आप सभी से मुखातिब हूँ…..
हमेशा की तरह कस्तूरी जी की कृति प्रदत चित्र के भावों को पूर्णत: उकेरती हुई । बहुत खूब कस्तूरी जी …
– सरस दरबारी

कवि मिन्दर जी की चौंका देने वाली रचना ….. गहन चिंतन का विषय।
आज पटल, हमारी कवयित्रि मित्र प्रभा शर्मा की रचनाओं से सुशोभित है ..तो आइए प्रभा शर्मा जी की नज़र से समय, ज़िंदगी, शहादत, दस्तूर और खूबसूरती को देखें ……….स्वागत है मित्रों ….- सरस दरबारी

प्रभा शर्मा अपने भीतर काव्य बीज छुपाये हमारे सामने है।उनकी सारी कवितायें मनुष्यता के पक्ष में कागज पर अनायास उतरी हैं।भले उनकी कविताओं में थोड़ी अनगढ़ता है पर कथ्य के भावपक्ष में कहीं चूकी नही है।
बाहर की रोशनी को आने दो
मत बाँधो विचारों को
यही भाव उनकी कविताओं कि मूल कन्टेंन्ट है। उनकी कविताओं में कविता के साथ साथ गीत और ग़ज़ल की उपस्थिति भी है।सब विधाओं को एक साथ साध पाना कठिन होता है बेहतर हो वो किसी एक विधा पर ध्यान केंन्द्रित करें तो ज्यादा अच्छा दें पायेंगी।विचारों की सघनता उनकी कविताओं को उच्चता प्रदान करती हैं।लिखने से ज्यादा पढ़ेंगी तो शिल्प में भी अच्छा मुकाम हासिल करेंगी।
उनमें संभावनाएँ बहुत है। मैं उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ।
– विजय राठौर

शुक्रिया विजय राठौर जी। बहुत ही सही और सहज तरीके से आपने प्रभा जी की रचनाओं को पढ़ा, समझा और विश्लेषित किया। उनका भाव पक्ष मज़बूत है। लेखन में उन्होंने कई विधाओं को अपनाया है, जिसपर थोड़ी और मेहनत की आवश्यकता है, जो पढ़ने से हासिल होगी। शुक्रिया विजय जी।
– सरस दरबारी

नमस्कार मंच आज विश्व मैत्री मंच के पटल पर मुझे स्थान मिला है।मंच की शुक्रगुजार हूँ मैं साथ ही आज की संचालिका कवियत्री, प्रसिद्ध कथाकार सरस दरबारी जी एवं नवोदित स्नेही पूर्ति खरे का स्नेहाअभिनंदन
– प्रभा शर्मा

ये, पंजाबी कवि, मिंदर को रह गया, याद करना। उनकी याद के बिना आज के पोस्टर की बात कैसे???
प्रभा की रचनाएं अच्छी हैं
– सुरभि पांडे

सुभोर सुरभि दी वाकई चौंका देनेवाला है आज का शब्दचित्र। भला मिन्दर जी को कैसे भूल सकते हैं दी, उनका ज़िक्र तो शुरू शुरू में हुआ है..
– सरस दरबारी

समय
मत बन्द करो खिड़कियों को
निकल जाने दो अंदर की गर्म हवा को
बाहर की रोशनी आने से
मत बांधो विचारों को किसी दायरे में इन्हें आदत डालो
समय के साथ बदलने की
अद्भुत लाइन बहुत ही सुंदर लिखा है आपने
प्रभा शर्मा जी बधाई, आप मुम्बई से है
जानकर अच्छा लगा
मिन्दर की कविता को जीवंत कर दिया है
कस्तूरी मणिकांत ने, वाह! – अमर त्रिपाठी

परिवर्तन प्रकृति का नियम है उसके अनुसार चलने मे ही समझदारी है।समय मे यह विचार प्रभावित करते है।
जिदंगी की सच्चाई है जिदंगी कविता मे।
शहादत, खूबसूरत, दस्तूर भावप्रवणता से लवरेज़ कविता।
प्रभा जीआपकी कविता की सहज सरल भाव व भाषा मर्मस्पर्शी है। बधाई

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– मीता अगरवाल

नमस्कार दोस्तों, आज पटल हमारी सखी प्रभा जी कविताओं का आंनद ले रहे है।
आपकी पहली कविता समय बहुत ही सुंदर और सार्थक बात आपकी कविता में हम रुक सकते हैं पर. समय नहीं इस लिऐ समय की कद्र करनी चाहिए।

आपकी दुसरी कविता जिन्दगीं, प्रभा जी आपने अपनी कविता के माध्यम से इतनी गहरी बात पटल पर रखी… सही कहां आपने वाकई जिन्दगी एक किराया का घर है तो है जब तक सासं चल रहा है तब तक मालिक है हम जिस दिन सासं रूकी.. उस दिन बस मिट्टी का ढेर आदमी जो उसी में विलीन हो जाता है।
बहुत ही सुंदर कविता आपकी बधाई आपको
आपकी तीसरी कविता शहादत.. हमें अपने शहीदों की कुर्बानी की याद दिलाती है.. सही कहां आपने आज हम जो चैन और शकुन की जिन्दगी जी रहे है ऐ उन्ही की देन है जो वतन पर शहीद हुऐ है.. एक सार्थक और सुन्दर कविता आपकी बधाई आपको आपकी चौथी कविता… खुबसूरत… बहुत ही सुंदर और प्रेम से ओतप्रोत.. सच ही तो है वाकई जिन्दगी खुबसूरत है.. बस जीने का अंदाज खुबसूरत होना चाहिए
बहुत ही सुंदर रचना पटल पर बधाई आपको
आपकी पांचवी कविता दस्तूर.. कितनी सुंदर भाव आपकी कविता के सच है वाकई किसी को अपना बनाने से पहले… जमाने के दस्तूर को समझना जरूरी है और ऐ हुनर है तो सारा जहां आपका… क्योंकि ऐ दुनिया बहुत ही रंगीन है इसके हर रंग है हंसना और रोना. दोनो पहलू को सीखना जरूरी है सभी कविता के लिऐ आपको बधाई
काव्यकोश में पंजाबी कवि मिन्दर की रचना मर्म से ओतप्रोत…… अति मार्मिक…….. उस पर कस्तूरी मणिकान्त का चित्रांकन बहुत ही सुंदर
– सरोज सिंह ठाकुर
नमस्कार सरोज जी वाकई, समय ही वह शै है जो लौट कर दोबारा नहीं आता ।
पंचतत्व की बनी यह कोठरिया , यही शरीर है , जहां रहते देकर साँस किराया , जब लूट जाएगी साँस की पूंजी , पछताओगे ओ अनाड़ी , इसी भाव को बखूबी कहा है प्रभा जी ने ….आपकी बात से सहमत सरोज जी ।आपने बहुत ही विस्तार से उनकी हर रचना के मर्म को पटल पर रखा …आपका बहुत बहुत आभार सरोज जी …
– सरस दरबारी

प्रभा जी ने सरल भाषा में गहन बात कही। सच किसी को अपना बनाने से पहले दुनियादारी सीखने की हिदायत खूब है – नीलम दुग्गल
वाकई नीलम जी …..सोचने पर मजबूर कर दिया …
– सरस दरबारी

अद्भुत अद्भुत रचनाएँ यहाँ प्रकाशित की जाती हैं. देख पढ़कर और उनपर चर्चाएँ देखकर “विश्व मैत्री मंच” का नाम सार्थक प्रतीत हो रहा है. बधाई
-रविंद्र के दास

शुक्रिया रवीद्र दास जी। संतोष दी की यही कोशिश रहती है कि बढ़िया से बढ़िया रचनाएँ हम तक पहुँचें।, यह मंच सभी के लिए है, जो सही मार्गदर्शन देता है , सही सलाह देता है ताकि हम अपने लेखन में और निखार ल सकें । शुक्रिया इस प्रोत्साहन के लिए …. सरस दरबारी

जी हाँ राजेंद्र दास जी, यहाँ पर साहित्यिक चर्चा भी होती है । अलग अलग गतिविधियों के लिए मुखतलिफ़ दिन तै है । उसीके अनुसार कविताएँ या आलेख पटल पर डाले जाते हैं , और उनपर सब अपनी प्रतिक्रियाएँ देते हैं ।
– सरस दरबारी

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प्रभा जी की सरल,सुंदर,सार्थक कविताओं का दिन वाह आज का दिन तो आनन्द और उत्साह से भरा होना चाहिए
– पूर्ति खरे

ओहो पूर्ती जी और सरस जी की मोजुदगी में प्रभा जी की कवितायेँ
प्रभा जी ने दो तीन विधाओं में लिखा है
भाव और शब्द बहुत ही अच्छे हैं दस्तूर रचना ग़ज़ल विधा लग रही है यदि ग़ज़ल है तो तनिक और निखारना होगा।बाकी रचनाएँ भी सहज सरल हैं, शुभकामनाओं के साथ
– प्रतिमा अखिलेश
शुक्रिया …
आपकी बात से पूरी तरह सहमत हैं प्रतिमा जी। हर विधा के अपने नियम होते हैं। खासतौर पर ग़ज़ल के नियम तो बहुत ही कड़े होते हैं। ऐसे में विधा के नियमों का पालन ज़रूरी है। यह बात हम सभी के लिए ग़ौरतलब है।
– सरस दरबारी

प्रभा की सरस सुंदर कविताएँ मन को मोह गईं।स्थूल विषयों के सूक्ष्म चित्रण प्रभावशाली बन पड़े हैं।जीवन की सुंदरता और क्षणभंगुरता का संवेदनशील वणॆन है।दस्तूर के रूप में कही गई ग़ज़ल सबसे अच्छी है।सभी रचनाएँ अमिधात्मक सौंदर्य लिए हुए हैं, जबकि कविताओं में लाक्षणिक सौंदर्य भी अपेक्षित होता है।कुछ दिखती कुछ छिपती और कुछ अलग अंदाज़े बयां करती कविताएँ हों तो वे अधिक समय तक याद रखी जाती हैं।यह मंच सीखने के लिए है।दूसरों को पढ़ कर सीखने व मंजने का अवसर हमें यहां मिलता है।

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– आशा रावत

वाह आशा जी, कितनी सुंदरता से आपने रचनाओं की खूबियों को शब्द दिए हैं। हम सभी इस मँच पर एक दूसरे से कुछ न कुछ रोज़ सीख रहे हैं। यही तो VMM सार्थकता है।… – सरस दरबारी
*मत बांधो विचारों को*
*किसी दायरे में इन्हें आदत डालो*
*समय के साथ बदलने की,*
बहुत खूब आदरणीया प्रभा जी, अच्छी कविताएँ… शुभकामनायें

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– करुणा सक्सेना

शुक्रिया करुणा प्रभा जी की रचना पर प्रतिक्रिया देने के लिए…
– सरस दरबारी
प्रभा जी की कविताएं सरल सुंदर संवेदन शील प्रवाहमय भाव भाषा के साथ रची गई हैं ।समय की कद्र करना ।जिन्दगी को किराये का घर समझना न जाने कब सांस थम जाये बहुतखूब।शहीदोंकी शहादत के लिएउनकानमन करना सम्मान करना मानवीय लक्षण हैं फिर हँसना- रोना संभलकर चलना तो जीवन का दस्तूर है ही। काव्यात्मक रूप मे जीवन का सही
आंकलन किया है। बधाई ।

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– गीता भट्टाचार्य

शुक्रिया गीताजी, प्रभाजी की रचनाएँ वास्तव में जीवन की ठोस सच्चाइयों का आँकलन है जिसे आपने बहुत खूबसूरत अंदाज़ में व्यक्त किया।
– सरस दरबारी

छोटे छोटे विषय बिंदुओं पर भावनाओं की स्याही में डुबोकर कल्पना की कलम से लिखी गई रचनाये बहुत ही सरस व सुंदर लगीं। लगता है कवयित्री स्वयं इन रचनाओं में एकाकार होकर कविताओं के रूप में साकार हो गई हैं। जब कवि अपना अस्तित्व पूरी तरह कविता में घोल दे तो कोई संदेह नहीं कि हर पाठक उसे आत्मसात कर लेता है। बधाई इतनी सुघड़ रचनाओं के लिए प्रभा जी।
– स्नेहलता पाठक

आप ने सही फ़रमाया स्नेहलता जी, जब एहसास पूरी शिद्दत से महसूस किये जाते हैं तभी वह पाठक के दिल तक पहुँचते हैं। प्रभा जी रचनाओं में भी वही सच्चाई है। धन्यवाद स्नेहलता जी।
– सरस दरबारी

सरस जी ने बहुत ही कुशलता से खूबसूरत शब्दों में आपकी प्रतिक्रियाओं पर अपनी प्रतिक्रिया देकर संचालन किया। अब पूर्ति खरे आएं और आगे की बागडोर संभालें।
यह पूर्ति जी स्वागत है
– संतोष श्रीवास्तव

सन्तोष जी का कोटिशः धन्यवाद की आज उन्होंने मुझे आवाज दी, जबकि मेरी प्रिय प्रभा जी की कविताएं पटल पर धूम मचाने आई, प्रभा जी से मैं पहली नजर में प्रभावित हो गई थी, मौजमस्ती भरा स्वाभाव,अद्भुत लेखन और आज की कविताएँ क्या कहने प्रभा जी आपके, ये शुभ संयोग है कि आज आपकी कविताओं पर मेरा संचालन है, शायद मेरा तुझसे है पहले का नाता कोई..योहीं नही ….
– पूर्ति खरे

अफसोस कि आज अपने प्रिय शायर जफर को पढ़ना अब नसीब हुआ नेट की मेहरबानी अभी हुई
उनकी दिल छू लेने वाली पंक्तिया हैं
“कितना है बदनसीब जफर कफ़न के लिए
दो गज जमीन भी प मिली कूए यार मे”
जफर पर बने सीरियल मे अशोक कुमार ने उनका किरदार निभाया था गजब !! मुझे ये भी बहुत पसंद है
“न किसी की आँख का नूर हूँ ”
इतने भावुक संवेदनशील शायर जफर हमारे दिलो मे हमेशा – हमेशा रहेगे
– मोहिनी ठाकुर
मोहिनी जी आभार आप मंच पर आई, विन्रम आग्रह कृपया प्रभा जी की कविताओं पर चर्चा करें- पूर्ति खरे

वाह…क्या बात है आज हमारी सखी प्रभा की कवितायें पटल पर झिलमिला रही हैं,
समय पर कविता लाजवाब
समय किसी का इंतजार नहीं करता और हमें खिड़की दरवाजे खुले रखने हैं….बाहर की रोशनी आने देनी है….समय के साथ परिवर्तित होते रहना है, सीख देती हुई कविता..
ज़िंदगी की हकीकत से रूबरू कराती दूसरी कविता
शहादत देश के रक्षक सेनानियों के नाम
प्यार में खूबसूरत हो जाना अच्छा ख्याल है
दस्तूर दुनिया का समझाती अंतिम रचना
बहुत बधाई प्रभा –
सरस दरबारी जी और पूर्ति बेहतरीन संचालन के लिये बधाई – ज्योति गजभिए
ज्योति जी आपने मंच को जगमगा दिया
प्रभा जी की कविताओं पर आपके विचार बहुमूल्य है, हर कविता पर पैनी नजर डाली आभार आदरणीय आपका
– पूर्ति खरे
कविता जिसमे है वो ज़िंदगी
खूबसूरत है।
शहीदोंकी कुर्बानी कर लो याद
जीनेके दस्तूर समझ पाओगे।
सचमुच प्रभा सभी कविता बेहतरीन ।

प्रभा की कविताएँ …अपने समय को लिखती हैं ।अंदर की छटपटाहट बाहर आने को आतुर हैं ।खुद को समझाती, सिखाती , बहलाती सी कविताएँ हैं।
कही कहीं जीवन का सच भी कविताओं में आ गया है ।आध्यात्म की ओर भी जाती हुई प्रभा की कविता उनकी परिपक्वता को उजागर करती हैं।
देश प्रेम को और सैनिको को सलाम करती है भावनाएं उनकी सजगता को दर्शाती है ।
प्रभा की कविताएँ भाव को खूब सम्हाल कर रखती है पर कहीं कहीं उनका काव्य का उथलापन खटकता है ।प्रतीक और विम्ब का प्रयोग कम हैं ।भाषा सरल है ।सपाटबयानी की कविताएँ थोड़ा और काम मांगती है।
बधाई और शुभकामनायें।
आभार सन्तोष।
पूर्ति का कुशल सञ्चालन।
– मधु सक्सेना

मधु जी आपकी पैनी दृष्टि हम सभी के लिये बेहद महत्वपूर्ण है, प्रभा जी की कविताओं ने आपके ह्रदय को स्पर्श किया, ये प्रभा जी कविताओं का कमाल है- पूर्ति खरे
मत बांधो विचारों को किसी दायरे में इन्हें आदत डालो समय के साथ बदलने में
ज़िंदगी किराये का घर है,इक न इक दिन बदलना पड़ेगा
मेहरबानी उनकी कौम पर जो, तिरंगा आज हम फहरा रहे है खूबसूरत
प्रभा शर्मा सागर जी की सभी कविताये बेहतरीन जीवन दर्शन को कहती सरल और सहज ढंग से भावो को अभिव्यक्त करती,दिल को स्पर्श करती एक से बढ़कर एक सागर जी को बधाई – वृंदा पंचभाई

वृंदा जी आपको कविताएँ की पंक्तियाँ पसन्द आई बहुत बहुत आभार आपका
बुंदेली कवि ईश्वरी जी की फाग याद आ गई,
ज़िंदगी ऊपर वाले की ,
दई प्रान प्यारे की,
जब चाहे लेले ईश्वरी,
हमें कौन बारे की,
ई बखरी के दस दरवाजे,
बिन कूची, बिन तारे की।
प्रभा जी बुंदेली कवि भी हैं इसलिए उनकी कविता के लिए काशतौर पर
वृंदा जी मंच पर बनी रही आनन्द आया आप आई
– पूर्ति खरे

प्रभा शर्मा की कविताएँ पढ़ीं आज। लगा कि मिट्टी की कठोर परत फोड़ अंकुरण हो रहा है। शिल्पगत शिथिलताओं के बावजूद कविताएँ अपना प्रभाव छोड़ती हैं। कविता – मत बंद करो खिड़कियों को उनकी उदात्त भावना का प्रतिरूप लगी। ‘ज़िंदगी एक किराए का घर है में विचारों की ताज़गी का अभाव खलता है। कोई भी कवि कोई नहीं बात नहीं करता वह नए ढंग से बात कहता है और नए ढंग से कही गई बात ही हम पर अपना प्रभाव छोड़ती है इसलिए प्रभा जी को अपनी एक कथन शैली विकसित करनी ही होगी वरना कविताएँ बासीपन की शिकार हो सकती हैं। शहादत भी शिल्प में थोड़ा और पैनापन और कथानभंगिमा में बदलाव की माँग करती है।बाद की दो कविताएँ ग़ज़लों के फ्रेम में हैं। समय के साथ प्रभा जी की कविताएँ और निखरेंगी यह तय है। मेरी शुभकामनाएं उन्हें।
– दिनेश गौतम

प्रभा जी की कविताओं पर आप सब ने अपने अपने नजरिए से प्रतिक्रियाएं दी। अच्छा लगा कि आपने कमियां भी बताई और गुण भी बताए। समीक्षा ऐसी ही होनी चाहिए ।अब मैं प्रभा को अपनी बात रखने के लिए आमंत्रित करती हूं। प्रभा शर्मा आए स्वागत है
– संतोष श्रीवास्तव

प्रभा शर्मा जी द्वारा आभार:
धन्यवाद
नमस्कार मंच आज विश्व मैत्री मंच के पटल पर मुझे स्थान मिला है। मंच की शुक्रगुजार हूँ मैं साथ ही आज की संचालिका कवियत्री, प्रसिद्ध कथाकार सरस दरबारी जी एवं नवोदित स्नेही पूर्ति खरे का जी का आभार संतोष जी को बहुत बहुत धन्यवाद।

विजय राठौर जी आपने अपना अमूल्य समय दिया,बहुत कुछ सीखना है सर जी आप से।सादरनमन
डॉ. मंजुला जी बहुत बहुत धन्यवाद आप का सुरभि जी आपको रचनाएँ भावप्रवण, प्रवाहमय लगी, शुक्रिया जी अमर त्रिपाठी जी आपको रचनाएँ पसंद आई प्रोत्साहन के लिये धन्यवाद।

मीता अग्रवाल जी, सरोज सिंह ठाकुर जी अपने विस्तृत रूप से कविताओं की व्याख्या की बहुत ही अच्छा लगा सार्थकता,से समझा प्रेम भाव से ओतप्रोत रचनाओं को महत्वपूर्ण बताया सराहा शुक्रिया सखी।

नीलम दुग्गल जी, रवीन्द्र दास सर जी आप सभी ने उन्मुख कंठ से मेरी रचनाओं को सराहा आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद।

प्रतिमा अखिलेश जी, अंतरा जी, एवं आ.आशा रावत जी आप को रचनाओं के भाव,अभिव्यक्ति सूक्ष्म चित्रण संवेदनशीलता का प्रयोग भाया आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद।

स्नेहलता जी सूक्ष्म रूप से टीप देने के लिये प्रोत्साहित करने के लिये आभार

करुणा जी, माननीय दुष्यंत दीक्षित जी अमूल्य समय देकर रचनाओं को पता आप ने, आभार
आ.गीता भट्टाचार्य जी एवं आ.आनंदबालाजी प्रोत्साहन के लिये बहुत बहुत धन्यवाद।

स्नेही,प्यारी सखी ज्योति के स्नेह ने मन आत्मा को तृप्त कर दिया।
धन्यवाद सखी
रत्ना जी, कवि बैजनाथ जी का बहुत बहुत शुक्रिया।

शारदा गायकवाड आपको रचनाएँ पसंद आईं, धन्यवाद।

मधुजी आपने बड़े सुंदर तरीके से समझाते हुए टीप दी। आगे प्रयास जारी रखूँगी। बहुत बहुत आभार व्यक्त करती हूँ।

वृंदा जी, दिनेश गौतम जी मोहनी जी आपके प्रोत्साहन ने मेरे भीतर नई ऊर्जा भर दी।आप सभी का बहुत बहुत आभार।

एक बार पुनः आप सभी को नमन करते हुए। आभार प्रकट करती हूँ।इसी तरह मार्गदर्शन मिलता रहे,और साहित्य की सेवा में रत रहूं। भूल वश कोई नाम नहीं ले पाई या छूट गया हो तो करबद्ध निवेदन हैं क्षमा करें।

आप सभी ने प्रभा जी के लेखन को समय दिया, अपने अनुभव दिये परखी नजरों से निखारा, आप सभी का आभार।
– पूर्ति खरे
आज की संचालक सरस दरबारी जी और पूर्ति खरे जी दोनों का बहुत बहुत शुक्रिया। कि उन्होंने आज सारा दिन आप सब की प्रतिक्रियाओं को दिया और श्रेष्ठ संचालन किया। दोस्तों कल काव्य गोष्ठी का विषय है घर और अध्यक्षता करेंगे दिनेश गौतम जी। तो आप घर पर आधारित कविताएं लिख कर तैयार रखें ।
संतोष श्रीवास्तव

विश्व मैत्री मंच

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