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पुरूष को महापुरूष बनाने में गुरू का ही योगदान: दिनेश मुनि

  शिर्डी।  श्रमण संघीय सलाहकार दिनेष मुनि ने कहा कि गुरुपूर्णिमा का दिवस गुरुओं को वंदन करने और उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का दिन है। आज के दौर में पुराने गुरुओं की जरुरत महसूस हो रही है, पैसा लेकर मार्ग दिखाने वाला गुरु नहीं हो सकता, गुरु वह है जो सत्य, अहिंसा का मार्ग दिखाता है, आत्मा को परमात्मा से एकाकार करवाता है। वे आज धर्म नगरी ‘शिर्डी’ के जैन स्थानक में स्थानीय गुरु पुष्कर देवेन्द्र दरबार में चातुर्मासिक प्रवचन माला के अन्तर्गत ‘गुरू पूर्णिमा’ के अवसर पर धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। 

उन्होने आगे कहा कि सामान्य पुरूष को महापुरुष बनाने में गुरुओं का ही बड़ा योगदान होता हैं। अतः गुरुओं का दायित्व हो जाता है कि अनुयायियों के दिशा भ्रष्ट होने पर उन्हें सत्य दिशा का दिग्दर्शन कराएं। उन्होनें आगे कहा कि मेरे आध्यात्मिक जीवन में गुरु पुष्कर – गुरु देवेन्द्र का अनंत उपकार है कि उन्होंने चतरलाल को दिनेश मुनि बना दिया। उन्होंने मुझे मोक्ष का मार्ग दिखा दिया। उन्होनें कहा कि कोई कहे या न कहे यह स्वीकार करना होगा कहीं न कहीं गुरुजन तक भी देश के चरित्रपतन की धारा छूती ही है। अपने अनुयायियों पर ना तो हमारी पकड़ कम हुई हैं या हम ही स्वार्थवश अनुयायियों के अधर्म को रोकने में असफल हो रहे हैं। 

उनका कहना था कि अब भी समय है कि पूरे  देश के सभी संप्रदायों के धर्म गुरु अपने – अपने स्तर पर ही सही जनता की बुराईयों की प्रवृर्तियों को रोकने का प्रयास करे तो भारत में फैले भ्रष्टाचार का भूत कुछ कम हो जाएगा। संत भी अनंत शक्ति के भण्डार होते है उनके रहते हुए देश का चरित्र पतन की और जाए तो यह दुर्भाग्य पूर्ण ही होगा। 

    
डाॅ. द्धीपेन्द्र मुनि ने कहा कि पाश्चात्य शिक्षा के पीछे भागने के कारण न तो शिक्षको में गुरुतर भाव विकसित हुआ है और न ही छात्रों में गुरुओं के प्रति सम्मान। आवश्यकता है छात्रजन गुरुओं का सम्मान करें। डाॅ. पुष्पेन्द्र मुनि ने कहा कि जीवन में एक गुरु अवश्य बनाना चाहिए। मंदिर की मूर्ति मौन होती है, वह कुछ नहीं बोलती, लेकिन गुरु तो मुखर होते हैं। इसलिए गुरु के पास मनमानी नहीं चलती। समारोह में सांई अरिहंत पंथ संस्था के पदाधिकारीगणों व नगरसेवक की उपस्थिति में बालिका श्रद्धा षिंदे को साईकिल भेंट की गई। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सलाहकार दिनेष मुनि ने उपस्थित श्रद्धालुजनों को आर्षीवाद देते हुए मंगलपाठ सुनाया। 

संपर्क
भवदीय,
सीएस. प्रवीण कुमार जैन, 
कम्पनी सचिव, वाशी, नवी मुम्बई – ४००७०३.
 
Regards,
CS Praveen Kumar Jain, 
Company Secretary, Vashi, Navi Mumbai – 400703.

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