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भारतीय मूल्यों पर आधारित नई शिक्षा नीति के लिए उज्जैन में गुरूकुल सम्मेलन

उज्जैन। मध्यप्रदेश की धर्मधानी उज्जैन में आधुनिक शिक्षा की नई नीति बनेगी। ऐसी नीति जिसमें गौरवशाली गुरुकुल शिक्षा पद्धति के महत्वपूर्ण तत्व शामिल होंगे। नीति लागू कराने के लिए अंतरराष्ट्रीय गुस्र्कुल सम्मेलन की अनुशंसा केंद्र सरकार को जाएगी। दरअसल प्राचीन विद्या अर्जन के केंद्र गुस्र्कुल के गौरवशाली इतिहास के दर्शन और उसकी शिक्षा को मुख्य धारा में लाने को भारतीय शिक्षण मंडल और मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग संयुक्त रूप से 28 से 30 अप्रैल तक उज्जैन में अंतरराष्ट्रीय गुस्र्कुल सम्मेलन करने जा रहा है।

सम्मेलन महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेदविद्या प्रतिष्ठान में होगा, जिसमें भारत सहित नेपाल, म्यांमार, इंडोनेशिया, मॉरीशस, त्रिनिदाद आदि देशों के 3 हजार प्रतिनिधि शामिल होंगे। उद्घाटन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत करेंगे। केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. प्रकाश जावड़ेकर, राज्यमंत्री डॉ. सत्यपालसिंह, मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, स्वामी संवित सोमगिरी, आचार्य गोविंददेवी गिरी, स्वामी राजकुमार दास विशेष रूप से शामिल होंगे। समापन समारोह में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सुरेश सोनी आएंगे। सम्मेलन में इस विषय पर अध्ययन एवं अनुसंधान किया जाएगा कि आधुनिक शिक्षा पद्धति में गुरुकुल शिक्षा पद्धति के कौन-कौन से तत्व शामिल किये जा सकते हैं।

घोषणा पत्र तैयार करेंगे

समापन पर सबकी सहमति से ‘गुरुकुल का घोषणा पत्र तैयार किया जाएगा। सम्मेलन में प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। संस्कृत नृत्य नाटिका का मंचन और मलखंभ, योग, अश्वारोहण, कल्लारीपट्टू का प्रदर्शन भी होगा। सम्मेलन में तीन समानान्तर आहुति सत्र, तीन एकत्रित ज्ञान यज्ञ सत्र होंगे। ज्ञान यज्ञ में विद्वान वक्ता एकत्रित सत्रों का मार्गदर्शन करेंगे। प्रथम ज्ञान यज्ञ में गुरुकुल का गौरवशाली इतिहास और उसका वर्तमान स्वस्र्प, द्वितीय ज्ञान यज्ञ में गुरुकुल की शिक्षा पद्धति एवं उसमें पढ़ाये जाने वाले विषयों पर चर्चा होगी। तृतीय ज्ञान यज्ञ में गुरुकुल की शिक्षा को मुख्य धारा की शिक्षा बनाने पर चर्चा होगी। इसके साथ ही समानान्तर सत्र में विभिन्न् मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

साभार- देनिक नईदुनिया से



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