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सुप्त हिंदुत्व को नई धार दी स्व. अशोक सिंघल ने

(जन्म 27 सितंबर 1926 – निधन 17 नवंबर 2015)

राष्ट्रवादी विचारधारा के जनक व बहुसंख्यक हिंदू समाज में राममंदिर आंदोलन के माध्यम से जागरूकता उत्पन्न करने वाले विष्व हिंदू परिषद के संस्थापक अशोक सिंहल ने बहुसंख्यक हिंदू समाज के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। यह अशोक जी के व्यक्तित्व व उनके ओजस्वीपूर्ण भाषणों का ही परिणाम था कि आज हिंदू समाज में सामाजिक समरसता का भाव दिखलायी पड़ रहा है। संत समाज व विभिन्न अखाड़ा परिषदों को एक मंच पर लाने का काम भी अशोक जी के कर कमलों के माध्यम से संभव हो सका। अशोक सिंहल का जन्म 27 सितम्बर 1926 को हुआ यह अपने भाइयों में सबसे छोटे थे।

अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए सतत प्रयासरत रहने वाले अशोक सिंहल जी ने हिंदुओं की खोती जा रही स्मृतियों को एक बार फिर से संजोने का काम भी कर दिखाया है। यह उन्हीं के प्रयासों का परिणाम हैं कि आज देश का बहुसंख्यक समाज अपने आप को गर्व से हिंदू कहना चाहता है। हिंदुत्व के हित का संरक्षण करने व उसके दायित्व का वहन करने के लिए विष्व हिंदू परिषद की स्थापना भी उन्हीं के प्रयासों से संभव हो सकी। एक प्रकार से अशोक सिंहल ने देश, समाज, हिंदू सभ्यता, संस्कृति और संस्कार के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। उन्होनें अयोध्या में भव्य राममंदिर निर्माण के लिए आंदोलनों की झड़ी लगा दी । वे सभी आयोजन काफी अनुशासित और षालीनता के साथ संपन्न होते थे।

कई जनसभाओं व कार्यक्रमों में अशोक जी के ओजस्वी भाषणों को सुनने के लिए भारी भीड़ जमा होती थी लेकिन जब भीड़ घरों की ओर प्रस्थान करती थी तो उसमें एक नया पन व ताजगी की उमंग होती थी लेकिन किसी प्रकार की उत्तेजना व भीड़ में हिसक वातावरण का प्रदर्षन नहीं होता था। अशोक जी में विरोधाभाषी विचार होते हुए भी सभी को साथ में लेकर चलने की अभूतपूर्व कला थी। हिंदू समाज व संस्कृति के हित में उन्होनें जो काम किये है वह हम सबके लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। अब यह विष्व हिंदू परिषद व साधु- संतों का काम है कि वे अशोक सिंहल के सपनों को किस प्रकार से पूरा करवाते हैं। एक प्रकार से उन्होनें अपना संपूर्ण जीवन अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण और उसके प्रति संपूर्ण हिंदू समाज को जागरूक करने में खपा दिया।

यह अशोक जी के संघषे का ही परिणाम है कि आज अयोध्या में भव्य श्रीरामंदिर का निर्माण हो रहा है। आज उनके अथक परिश्रम के चलते करोडो हिंदुओं का सपना अयोध्या में पूरा हो रहा है। संघकार्य करते हुए अशोक सिंहाल ने देश के एक सच्चे आराधक के रूप में अपने आपको विकसित किया और 1942 में संघ के स्वयंसेवक बने। संघ के सरसंघचालक श्री गुरूजी ने 1964 में जाने- माने संत महात्माओं के साथ मिलकर हिंदू परिषद की स्थापना की। 1966 में विष्व हिंदू परिषद में अशोक जी का पदार्पण हुआ। अदभुत योजक,शक्ति,संगठन कुषलता,निर्भीकता,अडिग व्यक्तित्व और सबको साथ लेकर चलने की अशोक जी की विराटता का ही परिणाम है कि आज पूरे विष्व में सबसे प्रखर हिंदू संगठन के रूप में विश्व हिंदू परिषद का नाम लिया जा रहा है। यह उन्हीं के प्रयासों का परिणाम था कि आज पाकिस्तान, बांग्लादेश और विष्व के अन्य देषों में यदि कोई हिंदू विरोधी व भारत विरोधी घटना घटित होती है तो वह प्रकाश में आती है।

वे जहां भारत में अपनी संस्कृति व सभ्यता की रक्षा करने के लिए संघर्षरत रहते थे वे वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के प्रति किये जा रहे अत्याचारों के खिलाफ भी पूरे जोर षोर से आवाज उठाते थे। जम्मू- कष्मीर के हिंदुओं की समस्या के प्रति वे निरंतर गंभीर रहते तथा उनके दुखों को दूर करने का प्रयास भी करते थे । बहुसंख्यक हिंदू समाज के पथ प्रदर्शक व प्रेरक अशोक सिंहल हजारों वर्षों तक हिंदू समाज के लिए उसी प्रकार से प्रेरक बने रहेंगे जैसे कि स्वामी विवेकानंद व रामकृष्ण परमहंस आज भी प्रेरणा के स्रोत हैं। अशोक जी का जीवन स्वयं का प्रतिबिम्ब है। अशोक जी का भारतीय संस्कृति के विस्तार में योगदान अप्रतिम है।

यह उन्हीं का प्रयास है कि आज अमेरिका, इंग्लैंड, सूरीनाम, कनाडा, नीदरलैंड, दक्षिण अफ्रीका, आस्ट्रेलिया , श्रीलका आदि 80 देशोंमें विहिप का संपर्क है । देशभर में 53532 समितियां कार्यरत हैं। 1984 में श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति आंदोलन का श्रीगणेश किया और यह विभिन्न चरणों को पार करते हुए 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचे का विध्वंस करा गया। यह उन्हीं का प्रयास रहा कि अदालत ने 30 सितम्बर 2010 को हाइकोर्ट के तीन न्यायाधीषों की खंडपीठ ने एक स्वर से उसी स्थान को श्रीरामजन्मभूमि माना है। अब भव्य मंदिर के निर्माण का प्रयास जारी है। यही स्वर्गीय अशोक जी एक सपना था जिस नौ नवंबर 2019 को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अपने अत्यंत ऐतिहासिक फैसले से पूरा कर दिया। पूरा कर दिया।

अशोक सिंहल अपने आंदोलनों के दौरान गंगा नदी की अविरलता के लिए व गौहत्या के खिलाफ भी पुरजोर आवाज उठाई थी।। इतना ही नहीं वे अपनी संस्थाओं के माध्यम से कन्याओं के विवाह आदि संस्कार भी संपन्न करवाते थे और 42 अनाथालय के माध्यम से 2000 से अधिक बच्चों को आश्रय दिया जाता था जो अनवरत जारी है। गौरक्षा हेतु जनजागरण के द्वारा 10 लाख से अधिक गोवंश की सुरक्षा की गयी ।

हिंदू समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने के लिए सामाजिक समरसता के कार्यक्रम भी अशोक जी की प्रेरणा से चलाये गये। एक प्रकार से अशोक जी का हिंदू समाज के लिए अप्रतिम योगदान है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। अशोक जी के प्रयासों से विहिप के काम में धर्म जागरण , सेवा, संस्कृत परावर्तन आदि अनेक नये आयाम जुड़े। अशोक जी के मार्गदर्शन में चलाया गया श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन आज पूर्णता को प्राप्त हो रहा है।

 

 

 

 

 

मृत्युंजय दीक्षित
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