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घटिया लिखावट पर उच्च न्यायालय ने डॉक्टरों पर जुर्माना लगााया

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने लिखावट समझ न आने के कारण तीन डॉक्टरों पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है. टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक पिछले सप्ताह आए तीन अलग-अलग आपराधिक मामलों में मेडिको-लीगल रिपोर्ट ठीक से न समझ पाने के कारण जस्टिस अजय लांबा एवं जस्टिस संजय हरकौली की बेंच ने यह आदेश जारी किया है.

खबर के मुताबिक 25 सितंबर को कोर्ट के सामने तीन आपराधिक मामलों में पीड़ितों की ‘इंजरी रिपोर्ट (शारीरिक चोटों की जानकारी देने वाली रिपोर्ट)’ पेश की गई थीं. ये मामले गौंडा, सीतापुर और उन्नाव जिले के थे. लेकिन मामले की सुनवाई करने बैठे जज खराब लिखावट के कारण रिपोर्ट नहीं पढ़ पा रहे थे. इसके बाद कोर्ट ने इसे अदालती कार्रवाई में बाधा उत्पन्न करने वाली गतिविधि मानते हुए इंजरी रिपोर्ट तैयार करने वाले तीनों डॉक्टरों को समन जारी कर दिया.

अदालत में पेश हुए डॉक्टरों से जब जज ने खराब लिखावट का कारण पूछा तो डॉक्टरों ने दलील दी कि उनके ऊपर काम का बहुत बोझ है और इस वजह से ऐसा हो गया. कोर्ट ने इस दलील को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि डॉक्टर खराब लिखावट के लिए अधिक काम का बहाना नहीं बना सकते. इसके बाद कोर्ट ने उन्नाव के डॉक्टर टीपी जैसवाल, सीतापुर के डॉ पीके गोयल और गोंडा के डॉ आशीष सक्सेना पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया. ये तीनों डॉक्टर यहां के जिला अस्पतालों में तैनात हैं.

इसके साथ ही कोर्ट ने गृह सचिव, मुख्य सचिव (चिकित्सा व स्वास्थ्य) और महानिदेशक (चिकित्सा व स्वास्थ्य) को आदेश दिया कि वे ध्यान रखें कि आगे से ऐसा न हो. इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने यह भी कहा कि एक मेडिको-लीगल रिपोर्ट या तो किसी मामले को सही दिशा दे सकती है या फिर उस मामले को एकदम खत्म कर सकती है और इसलिए यह जरूरी है कि उसे समझ में आने वाली लिखावट में लिखा जाए.



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