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हिंदी के छौंक से बढ़ा डिजिटल मनोरंजन का जायका

भारत में ऑनलाइन वीडियो देखने का नया चलन शुरू हो गया है और इसे भुनाने के लिए कई कंपनियां वीडियो वाले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ले आए हैं। सफर करने से लेकर खाना खाने तक जब भी खाली वक्त मिलता है, युवा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर वीडियो देखना पसंद करते हैं। सलाहकार फर्म केपीएमजी की इसी महीने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक बड़े शहरों में लोग एक सप्ताह में औसतन 9.8 घंटे और छोटे शहरों तथा कस्बों में सप्ताह में 7.6 घंटे से अधिक समय ऑनलाइन वीडियो देखने में बिताते हैं। मगर रिपोर्ट में सबसे दिलचस्प बात यह है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाएं ओवर-दी-टॉप (ओटीटी) प्लेटफॉर्म को ज्यादा बड़ी संख्या में डाउनलोड कर रही हैं। यह बात अलग है कि वे हफ्ते में इन प्लेटफॉर्म को औसतन 7.3 घंटे ही दे पा रही हैं, जबकि पुरुष इनकी सामग्री को औसतन 8.7 घंटे देखते हैं।

भारत में ओटीटी का बाजार बहुत बड़ा है। इसका आकार करीब 4,500 करोड़ रुपये है और सलाहकार फर्म प्राइस वाटर हाउस कूपर्स (पीडब्ल्यूसी) के मुताबिक अगले 5 साल में यह 12,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। ऐसे में अधिक से अधिक दर्शकों तक पहुंचने के लिए और इस होड़ में आगे निकलने के लिए एमेजॉन प्राइम, नेटफ्लिक्स, हॉटस्टार, जी-5 और वूट जैसे प्रमुख ओटीटी प्लेटफॉर्म स्थानीय भाषाओं, खासकर हिंदी में अच्छी खासी सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं। एमेजॉन प्राइम पर कंपनी ने क्षेत्रीय फिल्मों और टीवी लाइब्रेरी से शुरुआत की थी। एमेजॉन ने कई हास्य कलाकारों को एक मंच पर लाकर हिंदी भाषा में ‘कॉमिकस्तान’ शो भी शुरू किया है। आज प्राइम ओरिजिनल्स के जरिये कंपनी दर्शकों का एक खास और समर्पित तबका तैयार कर रही है।

सभी ओरिजिनल वीडियो और दूसरे कार्यक्रम हिंदी भाषा में भी तैयार किए जा रहे हैं ताकि हाल-फिलहाल इंटरनेट का आदी बना छोटे शहरों और कस्बों का हिंदीभाषी युवा कंपनी के दर्शकों में शामिल हो जाए। केपीएमजी के सर्वेक्षण में 64 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर वे हिंदी भाषा के वीडियो देखना पसंद करते हैं। हिंदी के अधिक प्रभावी होने का एक कारण विभिन्न ऑनलाइन वीडियो मंच पर हिंदी में गुणवत्तापूर्ण और दर्शकों को बांधे रखने वाली सामग्री, विशेषकर ओरिजिनल्स शो की उपलब्धता है। भले ही वैश्विक प्लेटफॉर्म एमेजॉन प्राइम और नेटफ्लिक्स पर हिंदी के मुकाबले अंग्रेजी भाषा में अधिक सामग्री उपलब्ध हो लेकिन इरोज नाउ, जी-5, ऑल्ट बालाजी जैसे प्लेटफॉर्म हिंदी समेत स्थानीय भाषाओं पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

केपीएमजी इंडिया में पार्टनर और मीडिया एवं मनोरंजन के प्रमुख गिरीश मेनन कहते हैं, ‘हमने विभिन्न आय वर्ग, पेशेवरों और आयु वर्ग के दर्शकों के बीच एक खास तरह का पैर्टन देखा है। हिंदी और स्थानीय भाषा में वीडियो सामग्री की पहुंच तेजी से बढ़ रही है।’ हिंदी भाषी दर्शकों को बांधे रखने के लिए ओटीटी प्लेटफॉर्म नए उपाय भी कर रहे हैं। हाल ही में जी-5 और ऑल्ट बालाजी ने आपस में साझेदारी की है जिसके तहत दोनों मिलकर हिंदी भाषा में ओरिजिनल सामग्री तैयार करेंगे जो दोनों मंच पर उपलब्ध होगी। जी-5 अभी तक हिंदी और दूसरी भारतीय भाषाओं में 40 से अधिक ओरिजिनल्स शो लेकर आया है। जी-5 की प्रोग्रामिंग प्रमुख अपर्णा आचरेकर के अनुसार, ‘हम शुरुआत से ही स्थानीय सामग्री पर जोर दे रहे हैं। हमारे लिए स्थानीय बाजार को ध्यान में रखकर सेवाएं देना और वीडियो सामग्री उपलब्ध कराना काफी महत्त्वपूर्ण है। इसलिए हम जी-5 पेश करने के समय से ही हिंदी भाषा में ओरिजिनल वीडियो उपलब्ध करा रहे हैं।’

वायाकॉम 18 के ओटीटी प्लेटफॉर्म वूट भी हिंदी भाषा में ओरिजिनल शो पर काम कर रहा है। उसके एक प्रवक्ता ने बताया कि कंपनी ने डिजिटल लाइब्रेरी तैयार की है जहां समूची सामग्री एक ही जगह सहेजी जा रही है। पिछले एक साल में वूट की हिंदी भाषी सामग्री की 3 गुना तेजी से बढ़ी है और अभी उसकी लाइब्रेरी में क्षेत्रीय भाषाओं से जुड़ी 22,000 से अधिक क्लिप मौजूद हैं। यूजर्स के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए वूट ने एक और जुगत भिड़ाई है। अब कंपनी प्लेटफॉर्म पर वीडियो के साथ खबरें और दूसरी सामग्री भी उपलब्ध करा रही है।

नेटफ्लिक्स इंडिया ने भी हाल ही में भारतीय दर्शकों को ध्यान में रखते हुए कम कीमत वाले सबस्क्रिप्शन प्लान पेश किए, जो केवल मोबाइल फोन के लिए लाए गए हैं। ऐसा पहली बार हुआ है कि कंपनी ने अपनी कीमतों में इतनी अधिक कटौती की है। नेटफ्लिक्स इस बात से अच्छी तरह वाकिफ है कि कीमतें कम करके दर्शक जोड़े तो जा सकते हैं, लेकिन उन्हें अपने साथ बनाए रखने के लिए स्थानीय भाषा में सामग्री होना बहुत जरूरी है। इसलिए भारत में साढ़े तीन साल के अपने सफर में कंपनी ने हिंदी और दूसरी स्थानीय भाषाओं में कई फिल्म और वेब शृंखलाएं पेश की हैं।

हाल ही में ऐपल ने भी ऐपल टीवी प्लस नाम से ओटीटी सेवा शुरू करने का ऐलान किया है, जो नवंबर से ऐपल की सभी डिवाइसों पर उपलब्ध होगी। कंपनी भारतीय बाजार में पैठ बनाने के लिए बहुआयामी रणनीति पर काम कर रही है लेकिन उसके सामने भी एक बात साफ है कि भाषाई स्तर पर मजबूती के बिना दर्शकों की संख्या को एक सीमा से आगे नहीं ले जाया जा सकता।

साभार- https://hindi.business-standard.com/ से

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