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दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हिंदी की दुर्दशा

इस महत्वपूर्ण विषय पर आप सभी प्रतिक्रिया और सहयोग अपेक्षित है, दोनों पीडीएफ फाइल खोलकर पढ़ें. हो सके तो इस विषय को समाचार माध्यमों में प्रकाशित करें.

दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के मुख्य गुणवत्ता अधिकारी श्री दिनेश भ्रुशुन्दी जी की ओर से उनकी शिकायत पर 6 जुलाई 2018 को उत्तर मिला है, जिस पर कल ही पुनः प्रधानमंत्री कार्यालय को निम्न शिकायत भेजी गई है:

माननीय प्रधानमन्त्री जी,

दिल्ली हवाई अड्डा प्रबंधन ने मेरी शिकायत PMOPG/E/2018/0245081 का कोई भी समाधान नहीं किया गया है और उसे बंद कर दिया गया है. मुझे लगता है कि दिल्ली हवाईअड्ड प्रबंधन का एक ही उद्देश्य भारत के कानूनों का उल्लंघन करते रहो और यदि आम जनता उसकी शिकायत करे तो नए-नए झूठे मनगढ़ंत कुतर्क देकर शिकायत बंद कर दो. दिल्ली हवाईअड्डे के अधिकारी ने मेरी शिकायत के पिछले उत्तर में जिन अंतर्राष्ट्रीय मानकों का हवाला दिया था, उनके बारे में इस बार कोई तर्क नहीं दिया और न ही उन तथाकथित अंतर्राष्ट्रीय मानकों की कोई प्रति अधिकारी ने उपलब्ध करवाई है, इससे मेरी ये बात एकदम सिद्ध हो गई है कि 21 अगस्त 2017 की शिकायत का 14 सितम्बर 2017 का उत्तर पूरी तरह से कोरे झूठ पर आधारित था, अतः मैं प्रधानमंत्री कार्यालय से विनम्र प्रार्थना करती हूँ कि दिल्ली हवाईअड्डे के संबंधित अधिकारी पर लोक शिकायत को बंद करने के लिए झूठे तर्क लिखने और प्रधानमंत्री कार्यालय एवं शिकायतकर्ता को गुमराह करने के लिए क़ानूनी कार्रवाई करें.

इस बार के उत्तर में हवाईअड्डे के शिकायत अधिकारी ने नया झूठ गढ़ा गया है और मूल मुद्दे को भटकाते हुए लिखा है चीन, फ्रांस, जापान, हांगकांग में केवल एक ही भाषा बोली जाती है इसलिए वे लोग अपनी भाषा का प्रयोग अंग्रेजी से पहले और अंग्रेजी से ऊपर करते हैं, जबकि भारत की अपनी कोई एक भाषा नहीं और यहाँ बहुत सारी स्थानीय भाषाएँ इसलिए यहाँ अंग्रेजी का प्रयोग हिंदी से पहले/ऊपर/बड़े अक्षरों में करना जरूरी है. जब कि इस बात का यहाँ कोई मतलब ही नहीं है, बस जवाब देना था इसलिए लिख दिया.

उस अधिकारी को बताया जाए कि दिल्ली प्रदेश की प्रथम राजभाषा हिंदी है और भारत के संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार भारत सरकार की एकमात्र राजभाषा भी हिंदी है और इंदिरा गांधी हवाई अड्डा भी दिल्ली प्रदेश की सीमा में स्थित है.

दूसरी बात, विकिपीडिया और इन देशों की आधिकारिक वेबसाइटों के अनुसार चीन, फ्रांस, जापान और हांगकांग में भारत की तरह ही अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं पर जैसे भारत सरकार की एकमात्र राजभाषा हिंदी है, उसी तरह इन देशों की अपनी अपनी राजभाषा है. भारत में अलग राज्यों में अलग-अलग राजभाषाएँ हैं और सैकड़ों बोलियाँ. अधिकारी ने लिखा है कि भारत के लोग अंग्रेजी समझते हैं पर हाल में जारी जनगणना 2011 के आंकडे कहते हैं कि अंग्रेजी को प्रथम भाषा बताने वाले सिर्फ ढाई लाख लोग भारत में रहते हैं जबकि हिंदी भाषा 53 करोड़ भारतीयों की मातृभाषा है.

यहाँ स्पष्ट करती हूँ भारत में अलग-२ भाषाएँ बोले जाने से अंग्रेजी को भारत की राजभाषा से पहले इस्तेमाल करने का कोई सम्बन्ध (कनेक्शन) नहीं है, पर अधिकारी को तो किसी भी तरह शिकायत को बंद करना था और अपनी गलती को छुपाना था इसलिए उन्होंने एक बार फिर झूठ का सहारा ले लिया.

मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने डाकिए की तरह वही झूठा उत्तर इस वेबसाइट पर अपलोड कर दिया, बिना इस बात पर गौर किए कि हवाईअड्डे के अधिकारी ने शिकायत का कोई समाधान नहीं किया है और भारत सरकार के पहले से लागू निर्देशों का उल्लंघन जारी रखा हुआ है.

मैं पुनः हाथ जोड़कर निवेदन करती हूँ कि प्रधानमंत्री कार्यालय सीधे कार्रवाई करते हुए पत्र लिखकर दिल्ली हवाईअड्डे के प्रबंधन को कहे कि राजभाषा विभाग के कार्यालय आदेश क्र. 14013/10/2010-रा.भा. (नीति-I) दिनांक 4 मई 2017 (प्रति मूल शिकायत में संलग्न है) का पालन करे और मेरी शिकायत में उठाये गए प्रत्येक बिन्दु पर भारत के कानून को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट और सही-सही उत्तर प्रदान करे और पिछले उत्तर में अंग्रेजी के पक्ष में जिन अंतर्राष्ट्रीय मानकों का हवाला दिया था, उसका स्पष्टीकरण दे.

एक बार फिर से मेरी 26 मई 2018 की शिकायत संलग्न है, आशा है आप इस बार ठोस कार्यवाही करेंगे और निवारण करवाएँगे.



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