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हि्न्दी भाषी दूसरी भाषा कौनसी सीखें?

हिंदी प्रचार-प्रसार सम्बन्धी कई राष्ट्रीय संगोष्ठियों में मुझे सम्मिलित होने का सुअवसर मिला है।इन संगोष्ठयों में अक्सर यह सवाल अहिन्दी-भाषी हिंदी विद्वान करते हैं कि हम तो हिंदीसीखते हैं या फिर हमें हिंदी सीखने की सलाह दी जाती है, मगर आप लोग यानी हिंदी भाषी क्षेत्रों के लोग हमारे दक्षिण भारत की एक भी भाषा सीखने के लिए तैयार नहीं हैं। 

यह रटा-रटाया जुमला मैं कई बार सुन चुका हूँ। और आखिर एक सेमिनार में मैं ने कह ही दिया कि दक्षिण की कौनसी भाषा आप लोग हम को सीखने के लिए कह रहे हैं? तमिल/मलयालम/कन्नड़/या तेलुगु?और फिर उससे होगा क्या? आपकेअहम् की संतुष्टि? पंजाबी-भाषी डोगरी सीखे तो बात समझ में आती है।राजस्थानी-भाषी गुजराती सीख ले तो ठीक है।इन प्रदेशों की भौगोलिक सीमाएं आपस में मिलती हैं, अतः व्यापार या परस्पर व्यवहारआदि के स्तर पर इससे भाषा सीखने वालों को लाभ ही होगा।अब आप कश्मीरी-भाषी से कहें कि वह तमिल या उड़िया सीख लें या फिर पंजाबी-भाषी से कहें कि वह बँगला या असमिया सीख ले (क्योंकि इससे भावनात्मक एकता बढेगी) तो आप ही बताएं यह बेहूदा तर्क नहीं है तो क्या है?
इस तर्क से अच्छा तर्क यह है कि अलग-अलग भाषाएँ सीखने के बजाय सभी लोग हिंदी सीख लें ताकि सभी एक दूसरे से सीधे-सीधे जुड़ जाएँ।वह भी इसलिए क्योंकि हिंदी देश की अधिकाँश जनता समझती-बोलती है।
 

 (डॉ. शिबन कृष्ण रैणा)
 Member,Hindi Salahkar Samiti,Ministry of Law & Justice
 (Govt. of India)
 SENIOR FELLOW,MINISTRY OF CULTURE
 (GOVT.OF INDIA)
 2/537 Aravali Vihar(Alwar)
 Rajasthan 301001
 Contact Nos; +919414216124 and 01442360124
 Email: [email protected],

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