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हॉकी के जादूगर ध्यानचंद वाकई एक महानायक थे

राज्यसभा टीवी ने भारत के टीवी इतिहास में एक और शानदार अध्याय लिखा है। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जीवन गाथा पर पहली बार एक घंटे की बायोपिक फिल्म का निर्माण किया गया है। इसमें ध्यानचंद की ज़िंदगी के अनेक अनछुए पहलुओं को उजागर किया गया है। RSTV के एग्जीक्यूटिव डारयेक्टर राजेश बादल द्वारा निर्मित ये बायोपिक आज आप टीवी पर देख सकते हैं।

ध्यानचंद हॉकी के इतने दीवाने थे कि पेड़ से हॉकी के आकार की लकड़ी काटकर उससे रात रात भर चाँद की रौशनी में हॉकी खेला करते थे। इसी हॉकी प्रेम के चलते सालाना परीक्षा में हर विषय में ज़ीरो अंक मिलते थे। पिताजी तब डंडों से पीटते थे।

यह सब आप सुन सकते हैं खुद मेजर ध्यानचंद की अपनी आवाज़ में। यह भी दिलचस्प है कि ओलिम्पिक खेलों से हॉकी हटा दी गई थी और हिन्दुस्तान की कोशिश के कारण ही हॉकी ओलिम्पिक खेलों में दोबारा शामिल की गई। इतना ही नहीं एक ओलिम्पिक में तो खिलाड़ियों को भेजने के लिए पैसे नहीं थे।पंजाब नेशनल बैंक ने क़र्ज़ दिया तो टीम जा पाई। ओलिम्पिक से स्वर्णपदक लेकर लौटे तो भी क़र्ज़ नहीं चुका सके। तीन हज़ार रूपए का बकाया क़र्ज़ चुकाने के लिए टीम ने नुमाइशी मैच खेलकर बैंक की उधारी चुकाई।

डॉन ब्रेडमेन ने ध्यानचंद से कहा, आप तो ऐसे गोल करते हैं जैसे मैं क्रिकेट में रन बनाता हूँ । ज़िंदगी में उन्होंने हज़ार गोल से ज़्यादा किए। यह कभी न टूटने वाला रिकॉर्ड है। हॉकी का ये बेमिसाल जादूगर ज़िंदगी के आख़िरी दिनों में पैसों के लिए मोहताज़ रहा।

कमेंटेटर गुरुदेवसिंह से उन्होंने फोटो खींचने से मना कर दिया था क्योंकि उनका पेन्ट फटा हुआ था और वो नहीं चाहते थे कि ऐसा फोटो देख कर नई पीढ़ी हॉकी खेलना छोड़ देगी। हिन्दुस्तान का ये सपूत आज भारत रत्न के लिए तरस रहा है। यह कमाल की फ़िल्म राज्य सभा टीवी पर देखी जा सकती है…

साभार- http://samachar4media.com/ से

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