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पुगलिया और बहल जैसे पत्रकारों की सोच कितनी घटिया है

Loose Lips sinks Ships, यानी बड़बोलापन जहाजों को डुबो देता है। ये लिखा है एएनआई की सम्पादक स्मिता प्रकाश ने, वो आगे अपनी ट्वीट में लिखती हैं, ‘This article damages India’s case on Kulbhushan like no other so far.’।

आखिर किस लेख की बात कर रही हैं वो? उस लेख का लिंक उन्होंने लिंक में दिया था, क्विंट के चंदन नंदी का वो लेख इतना हंगामाखेज था कि क्विंट को वो लेख वापस लेना पड़ा, अगर आप उस लिंक पर या क्विंट की साइट पर जाकर चैक करेंगे तो लिखा आएगा, ‘The Quint is Rechecking the Kulbhushan Jadhav Story’। इस लेख को पढ़कर आपको लगेगा कि किसी हिन्दुस्तानी पत्रकार ने नहीं बल्कि किसी पाकिस्तानी पत्रकार ने लिखा है, आलम ये है कि इस लेख को पढ़कर पाकिस्तान इतना खुश है कि क्विंट ने भले ही ये लेख अपनी साइट से हटा लिया है, लेकिन पाकिस्तान की मशहूर वेबसाइट डिफेंस डॉट पीके ने लगा रखा है।

जैसा कि एएनआई की सम्पादक स्मिता प्रकाश का मानना है कि इस लेख ने कुलभूषण मामले में इंडिया के पक्ष को इतना नुकसान पहुंचा दिया है जितना कि अब तक किसी ने नहीं तो ये वाकई में सच है। इतने गैरजिम्मेदार तरीके से इसे लिखा गया है कि खुद क्विंट प्रबंधन को इस लेख को वापस लेने को मजबूर होना पड़ा।

पहले जान लीजिए की इस लेख में ऐसा क्या है? उससे पहले मीडिया जगत के नवोदित पाठक जान लें कि क्विंट क्या है? दरअसल टीवी18 रिलायंस को बेचने के बाद उसके प्रमोटर राघव बहल ने एक नई मीडिया कंपनी की नींव डाली, जिसे नाम दिया क्विंट। अभी क्विंट टीवी पर नहीं बल्कि वेबजगत में ही अपने ऑपरेशंस चला रही है, सीएनबीसी आवाज के पूर्व संपादक संजय पुगलिया के पास इसकी कमान है।

क्विंट में पिछले शुक्रवार को छपे उस लेख की हैडिंग थी- ‘’Two Ex RAW Chiefs did not want Kulbhushan Jadhav recruited as spy’’। इस लेख की हैडिंग पढ़कर एक बात तय है कि लेखक ने ये मान लिया है कि कुलभूषण जाधव एक स्पाई यानी जासूस है, हैडिंग अपने आप में बताती है कि रॉ के दो पूर्व चीफ नहीं चाहते थे कि कुलभूषण जाधव को रॉ का जासूस बनाया जाए। बाकी की कहानी अंदर लिखी है कि कैसे ऐतराज के बावजूद कुलभूषण को हायर किया गया, उसके दो पासपोर्ट बनें, कैसे उसकी गिरफ्तारी के बाद उसका रिकॉर्ड मिटा दिया गया, उसके मां-बाप को बोलने के लिए मना किया गया।

ये पूरी कहानी रिपोर्टर ने अपने सोर्सेज के जरिए लिखी है, कोई सुबूत नहीं है और ना ही किसी का ऑफिशियल बयान है। एकबारगी मान भी लिया जाए कि ये सही है तो क्या कोई भी पत्रकार इतने संजीदा और सीक्रेट इश्यू पर भारत सरकार के खिलाफ स्टैंड ले सकता है? वो भी तब जब उसके पास सुबूत नहीं है और पाकिस्तान इस लेख को इंटरनेशनल कोर्ट ही नहीं कई इंटरनेशनल मंचों पर इस्तेमाल करके भारत की फजीहत कर सकता है।

साफ है अति उत्साह या खोजी पत्रकारिता के जुनून में लिखी गई इस स्टोरी में देश हित को ताक पर रख दिया गया है। पाकिस्तान के पास कुलभूषण जाधव के खिलाफ कोई पुख्ता सुबूत नहीं थे, लेकिन अब ये लेख उस दिशा में उसकी मदद कर सकता है, ऐसे में कुलभूषण जाधव की रिहाई और जिंदगी बचने की सारी उम्मीदें भी खत्म हो सकती हैं। कल को इस रिपोर्टर और क्विंट प्रबंधन पर भी सवाल उठ सकते हैं तमाम सवाल हैं, क्विंट प्रबंधन ने वो लेख अभी हटा लिया है। लेकिन आप उस लेख को पाकिस्तान साइट डिफेंट डॉट पीके के इस लिंक में पढ़ सकते हैं-

https://defence.pk/pdf/threads/two-ex-raw-chiefs-did-not-want-kulbhushan-jadhav-recruited-as-spy.537435/

ट्विटर पर लोगों ने क्विंट के खिलाफ ही मुहिम छेड़ दी है। यूजर्स ने ‘#ब्लॉकक्विंट’ #BlockQuint के जरिए इस डिजिटल प्लेटफार्म को बंद करने की मांग शुरू कर दी है। देश के आम पाठकों को चाहिए कि वो https://www.thequint.com/ को उसकी शर्मनाक पत्रकारिता के लिए लानत भेजें।

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