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नेपाल-भारत बॉर्डर का खुलना, किस तरह से दोनों देशों के लिए फ़ायदेमंद हो सकता है?

यह बेहद आश्चर्यजनक है कि भारत और नेपाल के बीच की सीमा पिछले आठ महीने से बंद है, और उसके खुलने की संभावनाओं को ले कर अब भी अस्पष्टता है.

नेपाल और भारत के बीच 1,753 किलोमीटर की बॉर्डर सीमा, में, जिसके साथ नेपाल अपनी 1,400 किलोमीटर की अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा खुली सीमा प्रणाली के तहत एक अनूठी व्यवस्था है, जो एक देश से दूसरे देश में सीमा पार लोगों की अप्रतिबंधित आवाजाही की सुविधा प्रदान करती है. इन देशों के नागरिकों को दो देशों के भीतर यात्रा करने के लिए वीज़ा या पासपोर्ट रखने की आवश्यकता नहीं है. लेकिन चीन के मामले करता है, दोनों देशों के नागरिकों के लिए वीज़ा या पासपोर्ट रखना अनिवार्य है- उन सीमावर्ती निवासियों को छोड़कर जिन्हें, नेपाल और चीन की सीमा के 30 किलोमीटर के भीतर, बार्टर ट्रेड (barter trade) के लिए, बिना वीज़ा और पासपोर्ट के, सीमा पार करने की अनुमति है. लेकिन कोविड 19 के प्रकोप के बाद, नेपाल ने 24 मार्च से भारत और चीन दोनों के साथ अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमाएं बंद कर दी हैं.

नेपाल और भारत के बीच खुली सीमा प्रणाली के बावजूद, कभी-कभी इसे कुछ समय के लिए अस्थायी रूप से बंद किया गया है, जब सीमा के दोनों ओर भारत या नेपाल में चुनाव होते हैं, लेकिन इसे जल्द ही फिर से खोल दिया जाता है.

नेपाल और भारत के बीच खुली सीमा प्रणाली के बावजूद, कभी-कभी इसे कुछ समय के लिए अस्थायी रूप से बंद किया गया है, जब सीमा के दोनों ओर भारत या नेपाल में चुनाव होते हैं, लेकिन इसे जल्द ही फिर से खोल दिया जाता है. ऐसे में यह बेहद असामान्य है और ऐसा शायद पहली बार हुआ है कि भारत नेपाल सीमा आठ महीने से बंद पड़ी है, और इसके दोबारा खुलने की संभावना को लेकर अभी भी अनिश्चितता है. इस से उन हज़ारों-हज़ार लोगों का जीवन प्रभावित हुआ है जो सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, आर्थिक और यहां तक कि राजनीतिक कारणों के लिए हर दिन सीमा पार करते थे.

नेपाल और भारत दोनों ही देशों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में अधिक सुरक्षा बलों को तैनात कर रखा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोविड-19 एक देश से दूसरे देश में न फैले. सीमा पार करने का प्रयास करते हुए अक्सर लोगों को परेशान किया जाता है. सीमा पार करने के प्रयास के दौरान कई बार, लोगों की हत्या और उनके घायल होने के मामले भी सामने आए हैं. हालांकि, सीमा पार लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध के बावजूद, कुछ लोग अभी भी उन जगहों से सीमा पार करने की कोशिश करते हैं, जहां निगरानी कमज़ोर है. लेकिन लोगों के क्रॉस-मूवमेंट के ऐसे मामले बहुत आम नहीं हैं.

लेकिन नेपाल-भारत सीमा बंद होने की स्थिति के बावजूद, हज़ारों नेपाली नागरिक रोज़गार की तलाश में भारत आने के लिए देश छोड़ने को मजबूर हैं. इस तरह की खबरें हैं कि नेपाल के सुदूर पश्चिमी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग भारत में नौकरियों की तलाश में त्रिनगर-गौरीफंटा और गद्दाचौकी इलाक़ों के माध्यम से सीमा पार कर रहे हैं. ये लोग पहले भारत में बढ़ते कोविड-19 मामलों के कारण और अक्टूबर के अंत में दशहरे के त्योहार के दौरान नेपाल लौट आए थे. लेकिन चूंकि नेपाल में रोज़गार और कामकाज की कोई वास्तविक संभावनाएं नहीं हैं, इसलिए उनके पास भारत लौटने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है.

यहां तक कि नेपाल-भारत सीमा बंद होने की स्थिति में भी, हज़ारों नेपाली नागरिक रोज़गार की तलाश में भारत आने के लिए अपना देश छोड़ने को मजबूर हैं. अनुमान है कि नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों के छह से आठ मिलियन लोग अपनी आजीविका के लिए भारत पर निर्भर हैं.

यहां तक कि नेपाल-भारत सीमा बंद होने की स्थिति में भी, हज़ारों नेपाली नागरिक रोज़गार की तलाश में भारत आने के लिए अपना देश छोड़ने को मजबूर हैं. अनुमान है कि नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों के छह से आठ मिलियन लोग अपनी आजीविका के लिए भारत पर निर्भर हैं. उनके लिए घर पर रहना मुश्किल है, क्योंकि उनके पास खेती या जीवन यापन के लिए अन्य वैकल्पिक साधनों के लिए पर्याप्त ज़मीन नहीं है. नेपाल में प्रांतीय और संघीय दोनों ही सरकारों ने विदेशों में काम करने वाले नेपाली नागरिकों के लिए रोज़गार के नए अवसर पैदा करने के लिए बजटीय आवंटन किया है, लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह कि व्यावहारिक रूप से, इस दिशा में कुछ भी ठोस नहीं किया गया है.

वर्तमान में नेपाल-भारत सीमा के दोनों ओर सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के कारण, स्थानीय निवासियों के लिए सीमा पार करना मुश्किल हो रहा है. अगर भारत लेज़र तकनीक से लैस दीवारों (laser walls) या नेपाल-भारत सीमा पर इन्फ्रारेड बाड़ (infrared fencing) लगाता है तो स्थिति और भी ख़राब हो सकती है. उत्तर प्रदेश में नेपाल-भारत सीमा पर सोनौली चेक-पोस्ट पर इन्फ्रारेड बाड़ लगाने की संभावना अधिक है, जिस का दायरा उत्तराखंड सीमा क्षेत्र तक बढ़ाया जा सकता है.

लेज़र से लैस दीवारें अदृश्य होती हैं और उपग्रह आधारित सिग्नल कमांड सिस्टम के माध्यम से उन्हें संचालित किया जाता है. यह निगरानी का एक ऐसा उपकरण है जो रात के अंधेरे में या उस स्थिति में जब कम दिखाई दे रहा हो, तब भी काम करता है, जैसे कि कोहरा होने पर. इन्फ्रारेड बाड़ लगाने और अन्य इलेक्ट्रॉनिक निगरानी उपकरणों के इस्तेमाल का ख़ाका नई दिल्ली में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) मुख्यालय में तैयार किया गया था. इस से पहले, भारत ने आतंकवादियों की घुसपैठ को रोकने और नशीले पदार्थों को लाने ले जाने संबंधी गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर इन्फ्रारेड बाड़ लगाई है. इस तरह की रिपोर्ट सामने आई हैं कि नेपाल और भारत की सीमा को बंद रखने से नेपाल सरकार को भारी नुकसान हो रहा है. स्थानीय लोगों के मुताबिक भारत नेपाल सीमा बंद होने के बावजूद भी अनधिकृत व्यापार जारी है. इससे पहले, आधिकारिक सीमा शुल्क के माध्यम से माल के निर्यात और आयात से नेपाल सरकार को भारी राजस्व लाभ प्राप्त होता था. लेकिन सीमा को बंद करने के बाद, कई वस्तुओं को केवल अनधिकृत मार्गों के माध्यम से यानी तस्करी के ज़रिए ही लाया व ले जाया जा रहा है, जिसने दोनों देशों के लिए सीमा शुल्क से मिलने वाला राजस्व लाभ प्रभावित हो रहा है.

गौरतलब है कि कोविड-19 की महामारी फैलने के चलते लगाए गए लॉकडाउन के दौरान भी, नेपाल और भारत के बीच आवश्यक वस्तुओं के परिवहन में कोई समस्या नहीं हुई, हालांकि लोगों का सीमा पार आना जाना बहुत हद तक प्रभावित हुआ था. हालांकि चीन के साथ नेपाल ने लोगों की आवाजाही के अलावा, भूमि मार्गों के माध्यम से माल का आना जाना व व्यापार संबंधी गतिविधियां भी लगभग दस महीने तक बंद रहा था. नतीजतन, चीन से आए लगभग 800 कंटेनरों को नेपाल में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई और इस की वजह से यह कंटेनर अब भी नेपाल-चीन सीमा पर तीन की तरफ खड़े हुए हैं. नेपाल के कई व्यापारी घबराए हुए हैं, क्योंकि इस के चलते उन्हें भारी नुकसान हो रहा है. नेपाली व्यापारियों के सामने आने वाली कठिनाइयों को द्खते हुए, नेपाल-चीन चैंबर ऑफ कॉमर्स ने नेपाली सरकार को एक आंदोलन व विरोध प्रदर्शन तक करने की धमकी दी है, उस स्थिति में जब दोनों देशों के बीच कस्टम संबंधी गतिविधियों को खोलने की उनकी मांग को सुना नहीं जाता है.

सीमा को बंद रखने के लिए नेपाल के पास कोई वास्तविक तर्क नहीं है. भारत ने, कुछ समय पहले नेपाल के साथ अपनी सीमा को फिर से खोला, हालांकि नेपाल ने अभी तक जवाबी कार्रवाई के रूप में अपनी ओर से सीमा खोलने संबंधी कोई क़दम नहीं उठाया है.

ऐसा लगता है कि सीमा को बंद रखने के लिए नेपाल के पास कोई वास्तविक तर्क नहीं है. भारत ने, कुछ समय पहले नेपाल के साथ अपनी सीमा को फिर से खोला, हालांकि नेपाल ने अभी तक जवाबी कार्रवाई के रूप में अपनी ओर से सीमा खोलने संबंधी कोई क़दम नहीं उठाया है. शुरुआत में, जब भारत नेपाल सीमा को बंद कर दिया गया था, तो दोनों देशों की सरकारों ने यह कहा था कि यह क़दम कोविड-19 के संक्रमण के प्रसारण को रोकने के लिए उठाया जा रहा है. इस बीच, नेपाल में कुछ तबकों में यह बात कही जाने लगी की भारतीय वायरस, इतालवी या चीनी वायरस से भी अधिक घातक है और यह भी कि भारत में कोरोनोवायरस के मामले नेपाल की तुलना में बहुत अधिक थे. लेकिन पिछले कुछ हफ्तों से, स्थिति उलट गई है, क्योंकि भारत में कोरोनावायरस के रोज़ाना के मामले सितंबर के बाद से लगभग आधे हो गए हैं; जबकि नेपाल में, खासकर काठमांडू घाटी और पोखरा क्षेत्रों में यह अब भी अपने चरम पर हैं. इसलिए, जितनी जल्दी नेपाल और भारत सीमा को खोला जाएगा, उतना ही यह दोनों देशों के लिए बेहतर होगा.

ये लेखक के निजी विचार हैं।

साभार – https://www.orfonline.org/hindi से

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