आप यहाँ है :

अंबानी-बिड़ला को कैसे बाहर का रास्ता दिखाया इस कारोबारी ने

लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) के गैर-कार्यकारी अध्यक्ष ए एम नाइक नाइक ने बताया कैसे अंबानी, बिड़ला समेत कई घरानों ने एल ऐंड टी पर कब्जा करने की कोशिश कीऔर उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया गया।

देश की बड़ी इंजीनियरिंग फर्म लार्सन एंड टुब्रो (एलऐंडटी) के गैर-कार्यकारी चेयरमैन ए एम नाइक की जीवनी दि नेशनलिस्ट बाजार में आ गई है। पुस्तक के विमोचन समारोह में अनिल एम नाइक ने एलऐंडटी के कारोबार को तीन चरणों में बांटने की बातों को भी याद किया। इसके आधार पर यह इंजीनियरिंग, विनिर्माण और परियोजना क्रियान्वयन के क्षेत्रों में टॉप कंपनी बनकर उभरी। किताब में बताया गया है कि नाइक ने किस तरह अंबानी और बिडला द्वारा एलएंडटी के अधिग्रण के प्रयासों को विफल किया। उस समय कंपनी लगभग उनके हाथ से फिसल चुकी थी। दि नेशनलिस्ट को मिनहाज मर्चेंट ने लिखा है।

श्री नाइक ने बाताया कि अंबानी, बिड़ला समेत कई कॉर्पोरेट की तरफ से हो रही टेकओवर की कोशिशों से कंपनी को बेहद मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा था। ऐसे में नाइक ने अपने कर्मचारियों को भी समझाया कि यदि हम सब इसके मालिक रहेंगे तो कोई भी बाहर का व्यक्ति दोबारा कंपनी को खरीदने की कोशिश नहीं करेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री के सामने भी यह प्रस्ताव रखा। महीनों तक चली चर्चा के बाद एलएंडटी के कर्मचारियों के ट्रस्ट ने बिड़ला की पूरी हिस्सेदारी खरीद ली और बिड़ला को बाहर का रास्ता दिखाया।

श्री नाइक ने बताया कि अंबानी की टेकओवर की कोशिशें बेहद गंभीर थीं, लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि एलएंडटी के तत्कालीन चेयरमैन एनएम देसाई और अंबानी के बीच क्या बातचीत हुई थी। इस तरह की सभी बातचीत देसाई और अन्य 5-6 लोगों तक सीमित थीं। नाइक उस समय बोर्ड में भी नहीं थे। नाइक के मुताबिक अंबानी कंपनी को छाबड़िया से बचाने के लिए आए थे। धीरूभाई एलएंडटी के अधिग्रहण की दिशा में धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे। उन्होंने अपने दोनों बेटों (मुकेश और अनिल) को भी बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में जगह दिला दी। एलएंडटी बोर्ड इस बात को भांप रहा था कि अंबानी कंपनी पर पूरा होल्ड चाहते हैं।
इलाहाबाद में आयोजित हुई 33वीं अखिल भारतीय इंदिरा मैराथन

उस समय एलएंडटी में धीरूभाई की स्थिति इतनी मजबूत हो गई थी कि उन्होंने कंस्ट्रक्शन कंपनी के नाम पर बाजार से करोड़ों रुपए भी उठा लिए थे। तब तक कंपनी में अंबानी की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 19 फीसदी तक हो चुकी थी, लेकिन 1989 में राजनीतिक परिदृश्य इस तरह बदला कि धीरूभाई के हाथ से यह मौका भी निकल गया। इस बार एलआईसी (उस वक्त की सबसे बड़ी शेयरहोल्डर) आगे आई और उसकी पहल पर अंबानी को एलएंडटी से बाहर जाना पड़ा।

लारसन एंड टूब्रो के नॉन-एग्जिक्यूटिव चेयरमैन एएम नाइक को मुकेश अंबानी पहला और असली मेक इन इंडिया मैन मानते हैं। रिलायंस इंड्स्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने नाइक की बायॉग्रफी ‘दि नेशनलिस्ट’ की लॉन्चिंग पर यह बात कही। बायॉग्राफी में नाइक के लारसन ऐंड टूब्रो में 53 सालों के सफर को बताया गया है।

Print Friendly, PDF & Email


सम्बंधित लेख
 

ईमेल सबस्क्रिप्शन

PHOTOS

VIDEOS

Back to Top