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आपका फेसबुक पेज आपको किसी दूसरी कंपनी के यहाँ कैसे गिरवी रख देता है

सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट फेसबुक विवादों में घिर गई है। इसके पांच करोड़ यूजर्स की जानकारियां लीक हो गई हैं। फेसबुक के संस्‍थापक मार्क जुकरबर्ग ने भी इस मामले में गलती मानते हुए कहा है कि यूजर्स के डाटा की सुरक्षा करना हमारी जिम्‍मेदारी है लेकिन इस तरह की चूक हुई है. दरअसल कहा जा रहा है कि ब्रिटेन की कैंब्रिज एनालिटिका कंपनी ने इस जानकारी को या तो चुराया या फेसबुक से खरीदा। इस मामले की जांच हो रही है. कैंब्रिज एनालिटिका कंपनी इलेक्‍शन कंसल्‍टेंसी फर्म है। यह चुनावी अभियान के लिए संभावित वोटरों का प्रोफाइल तैयार करती है।

कैंब्रिज एनालिटिका ने एक ऐप के जरिये फेसबुक यूजर्स की जानकारियों में सेंध लगाई गई. दरअसल कहा जा रहा है कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति चुनावों से पहले वोटरों का रुझान जानने के लिए बड़े पैमाने पर डाटा की जरूरत थी. लिहाजा इस डाटा को हासिल करने के लिए thisisyourdigitallife ऐप बनाया गया. इसके बारे में कैंब्रिज एनालिटिका ने कहा कि यह लोगों की पर्सनालिटी का आकलन करने के लिए है. लिहाजा 100 सवालों पर आधारित एक क्विज तैयार किया गया. यूजर को बताया गया कि शैक्षिक अध्‍ययन के लिए इसका इस्‍तेमाल किया जाएगा. इस क्विज में शामिल होने वाले लोगों ने प्रोफाइल डाटा और फ्रेंड लिस्‍ट तक की जानकारी दे दी. तकरीबन पौने तीख लाख यूजर्स ने क्विज में हिस्‍सा लिया. इसकी बदौलत करीब पांच करोड़ लोगों के डाटा चुरा लिए गए। इनमें से अधिकांश अमेरिकी लोग थे।

दरअसल इस तरह के क्विज में ऐसे सवाल पूछे गए थे जिससे कि यूजर की पसंद-नापसंद समेत उनकी मानसिकता का आकलन किया जा सके. उसके बाद इसका विश्‍लेषण कर 2016 में अमेरिकी राष्‍ट्रपति चुनाव से पहले डोनाल्‍ड ट्रंप के चुनाव अभियान से जुड़े लोगों को बेच दिया गया.

कहा जा रहा है कि 2016 के अमेरिकी राष्‍ट्रपति चुनाव में फेसबुक से मिले इस डाटा का इस्‍तेमाल कर उसने सोशल मीडिया में डोनाल्‍ड ट्रंप के पक्ष में माहौल बनाया। भारत में भी बीजेपी और कांग्रेस एक-दूसरे पर इसकी सेवाएं लेने का आरोप लगा रही हैं. इस बीच पिछले एक हफ्ते में डाटा लीक होने की घटना सार्वजनिक होने के बाद फेसबुक को 58 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है. इन सबके चलते फेसबुक की साख पर संकट मंडरा रहा है.

2015 में इस डाटा को चुराया गया। 2016 अमेरिकी चुनाव और ब्रेक्जिट जनमत संग्रह में इसका इस्‍तेमाल किया गया. इस तरह की रिपोर्टें आने के बावजूद फेसबुक ने लगातार इस तरह की घटना से इनकार किया। लेकिन अब कैंब्रिज एनालिटिका के एक पूर्व कमर्चारी ने व्हिसिल ब्‍लोअर की भूमिका में आने के बाद फेसबुक ने पहली बार माना है कि उसके डाटा चुराए गए.

इस बात के सामने आने के बाद अमेरिका से भारत तक हंगामा बरपा है. देश में बीजेपी और कांग्रेस एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं. फेसबुक के भारत में 25 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं. ऐसे में अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि फेसबुक के सहारे इस देश की राजनीति को किस कदर प्रभावित किया जा सकता है.


कैसे होता है ये खेल

जैसे ही कोई फेसबुक पर अपना अकाउंट खोलता है वैसे ही शुरू डेटा इकट्ठा करने का खेल शुरू हो जाता है. सबसे पहले साइनअप के लिए अपनी ईमेल आईडी देनी पड़ती है जिसके बाद डेट ऑफ बर्थ और सेक्स/जेंडर जैसी बाकी की जानकारी देने पर आपको इसमें लॉगइन करने की इजाजत मिलती है. लॉग इन करने से पहले ही आप खुद से जुड़ी तीन महत्वपूर्ण जानकारियां फेसबुक को दे चुके होते हैं.

इसके बाद आपसे आपकी कॉन्टैक्ट डिटेल मांगी जाती है जिसके पीछे हवाला ये दिया जाता है कि इसके जरिए आपको आपके दोस्तों से जोड़ा जाएगा. अगर आप बिना डिटेल दिए आगे बढ़ते हैं तो फेसबुक आपको याद भी दिलाता है कि फेसबुक दोस्तों के बिना बेकार है. अगले स्टेप पर आते ही फेसबुक आपसे आपकी फोटो मांगता है. आपकी जानकारी इकट्ठा करने का सिलसिला इसके बाद भी चलता रहता है.

आप किन ग्रुप्स में शामिल हुए या किन ग्रुपों को आपने इग्नोर किया. आपने किन पेजों को लाइक किया. सिर्फ इतना ही नहीं, किसी के अकाउंट पर क्लिक करते ही उसकी टाइमलाइन के अलावा एक अबाउट भी ऑप्शन आ जाता है. इसमें अबाउट के ऑप्शन में आप कहां काम करते हैं, आपने कहां से पढ़ाई की है, आप किस शहर में रहते हैं, आपका होमटाउन क्या है जैसी तमाम जानकारियां मिल जाती हैं.

मामला सिर्फ यहीं नहीं रूकता. आप कौन सी भाषा जानते हैं, आपके धार्मिक विश्वास क्या हैं, आपके राजनीतिक विचार क्या हैं, आपकी पारिवारिक स्थिति क्या है, आपके परिवार में कौन-कौन हैं, आप कौन सा खेल पसंद करते हैं, आपको कौन सा म्यूजिक पसंद है, आपके टीवी प्रोग्राम, आपकी किताबें हर चीज फेसबुक पूछता है.

जब आप फोटो अपलोड करते हैं तब फोटो अपने साथ बहुत सी जानकारी लिए होती है. यहां तक की फेसबुक अपने आप चेहरों को पहचान लेता है. आप कब कहां गए यानी लोकेशन जानने के लिए तो फेसबुक को पूछने की जरूरत भी नहीं पड़ती. यहां तक सब कानूनी है क्योंकि इसके लिए आपने फेसबुक को अनुमति दे रखी होती है.


इस डेटा का फेसबुक क्या करता है और कैसे हुआ ग़लत इस्तेमाल

इस वादे के साथ फेसबुक इस डेटा को अपने विज्ञापनों के लिए इस्तेमाल करता रहा है कि इसे किसी और के साथ साझा नहीं किया जाएगा. लेकिन पिछले कई सालों से एक बड़ा खेल चोर दरवाजे से खेला जाता रहा है. बहुत सी एप्लीकेशनस को फेसबुक ने इसे रोचक बनाने के लिए अपने प्लेटफॉर्म पर जगह दी. दुनिया के बाकी लोगों की तरह भारत में भी लोगों ने इन एप्लीकेशनस पर गेम्स खेले, मजाक भरी तस्वीरें और पोस्ट बनाए. लेकिन इसी बहाने सबने इस एप्लीकेशन्स को भी अपने डेटा के इस्तेमाल की इजाजत दे दी.

इन सबके बीच Cambridge Analytica नाम की ब्रिटिश कंपनी ने फेसबुक की एक कमजोरी ढूंढ निकाली. इसने फेसबुक के इस सारे डेटा को बिना अनुमति के पढ़ना शुरू कर दिया. जैसे आप कहां गए, आपने किस पेज, ग्रुप, या शख्स को लाइक किया. इसे नाम दिया गया डेटा हारवेस्टिंग. यानी जिस प्राइवेसी की बात फेसबुक करता रहा है उन सारे नियमों की Cambridge Analytica ने धज्जियां उड़ा दीं।

अब जरा सोचिए कि Cambridge Analytica को ये पता है कि कितने लोगों किस नेता या व्यक्ति के पेज को पिछले एक महीने में लाइक किया और कितनों ने अनलाइक किया. उसे ये भी पता है कि राहुल गांधी या नरेंद्र मोदी के समर्थन वाले पोस्टों पर कितने लाइक आ रहे हैं और पहले कितने आते थे. कंपनी को ये भी पता है कि किस शहर में किस पार्टी के प्रति रूख क्या है और कितने शख्स किस पार्टी के लिए कट्टर हैं या कितने हवा के साथ चलते हैं. ये सारा डेटा इन कंपनियों के पास इकट्ठा हो जाता है. इसी हिसाब से पार्टियां अपनी रणनीति तय कर सकती हैं.

सिर्फ इतना ही नहीं, इन कंपनियों के पास हर व्यक्ति की एक पर्सनेलिटी प्रोफाइल तैयार हो जाती है. वो भी ईमेल और फोन नंबर के साथ. ऐसे में चुनाव से पहले असमंजस में पड़े लोगों को किसी खास पार्टी से जुड़े संदेश फोन और ईमेल के जरिए भेजा जा सकता है. यानी कंपनियां फेसबुक इस्तेमाल करने वाले के विचार को प्रभावित करने की ताकत रखती हैं. बताया जा रहा है कि इसी के सहारे अमेरिका में ट्रंप को राष्ट्रपति चुनाव तक जितवा दिया गया और यही चीज फेसबुक को सबसे खतरनाक बनाती है.



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