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कैसे कैसे लोग जो प्रधान मत्री भी बन गए!

पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा ने पीएम को लिखे पत्र में कहा है कि भारत को राष्ट्रवादी बयानबाजी बंद करनी चाहिए, और चीनी सामानों के बहिष्कार की बात बंद करनी चाहिए।

देवेगोड़ा भारतीय शासक व अभिजात वर्ग के शर्मनाक उदाहरण है। भारत के शासक वर्ग का भारत के लिए सिर्फ एक संदेश है: ” *सिर नीचे रखो, चुप रहो*। कभी भी तुम पर हमला करने वाले किसी का विरोध मत करो। उसे जो करना है उसे करने दो। नहीं तो उसे गुस्सा आ जाएगा।” जो हमारा ये शासक वर्ग अनकहा छोड़ देता है, यह है, “हमें सत्ता मिल गई है। हमें शांति से लूटने दो। जब स्तिथि नियंत्रण से बाहर हो जाएंगी, तो हम तो यूरोप भाग जाएंगे, तुम लोग दासता मे जीना।”

चीन मसूद अजहर को बचाता है। चीन एनएसजी में हमारी एंट्री को रोकता है। चीन विभिन्न देशों के साथ हमारे परमाणु समझौते को अवरुद्ध करने की कोशिश करता है। चीन नक्सलियों, वामपंथी आतंकवादियों को फंड देता है। लेकिन हमारा शासक वर्ग हमें समझाता है कि हमें केवल चीन के प्रति नरमी बरतनी चाहिए, जब भी चीन हमें थप्पड़ मारता है, हमें केवल दूसरे गाल को आगे करना चाहिए। क्योंकि हमें ठगने वाले ठगों को शांति से लूटना है। वे लूट में रूकावट नहीं चाहते हैं। रक्षा पर खर्च की वजह से इन को लूटने के लिए उपलब्ध माल में कमी नहीं चाहिए।

चीन मानव जाति के इतिहास के अधिकांश भाग के लिए, यानी इतिहास की शुरुआत से लेकर 1987 तक यह हमसे ज्यादा गरीब था। मंगोलिया और जापान जैसे अत्यंत छोटे देशों ने जब चाहा इसे ग़ुलाम बना लिया और क्रूरताये की इसके साथ।

लेकिन 1950 के बाद से, हम पर शासन करने वाले लुटेरे हमें यह समझाने में व्यस्त हैं कि हमें चीन के सामने आत्मसमर्पण करना चाहिए, हमारे पास और कोई विकल्प नहीं है। और 2014 तक हम तेजी से ये जहर पचा भी रहे थे। हम मानसिक रूप से विघटित हो रहे थे। हमारे पूर्वजों ने अपने समय के सबसे मजबूत साम्राज्यों: मुगलों और ब्रिटिशों से लड़ने मे हिचकिचाहट नही दिखायी और अंततः दोनों को समाप्त कर दिया। लेकिन हमारा लुटेरा शासक वर्ग हमें चीन के सामने आत्मसमर्पण करने की सलाह दे रहा है क्योंकि इन लुटेरों को लूटपाट करते समय शांति की जरूरत है।

जर्मन क़ैदी शिविरों में, *कैपो* नामक यहूदी थे। कैपोस शिविर के कैदियों और शिविर प्रशासन के बीच की कड़ी होते थे। वे कैदियों को नियंत्रण में रखते थे, उन्हें गैस चैंबरों में ले जाते थे, व इसके पस्चात शवों को भट्टियों में ले जाते थे। बदले में उन्हें अधिक राशन मिलता था, और वे सबसे आखिरी में मारे जाते थे। भारतीय सत्तारूढ़ अभिजात वर्ग वही केपो हैं और यह भी हमारे दुश्मनों द्वारा हमारे विनाश की देखरेख कर रहा है। यह देश और लोगों को बचाने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रहा है। यह वास्तव में प्रतिरोध की आग को बुझाता है जब भी यह किसी को प्रतिरोध मे खड़े होते देखता है।

*मोदी और शाह वास्तव में इस अभिजात वर्ग से अलग, बाहरी लोग हैं*। उन्हें इस देश से प्यार है और इसके लोगों में विश्वास है। वे सोचते हैं कि भारतीय अन्य सभी मनुष्यों के बराबर हैं, और उन्हें स्वतंत्र जन्म लेने वाले मनुष्यों के रूप में जीने का पूरा अधिकार है, उन्हें अपने देश की रक्षा और विकास करने का अधिकार है। और इसलिए मोदी, शाह दोनो पर अनवरत हमले जारी हैं।

इंटरनेट ईश्वर का वह वरदान है जिसका हम इंतजार कर रहे थे। इंटरनेट के कारण ही हम भारत के स्थायी, आभिजात शासक वर्ग का असली चेहरा देख पा रहे हैं। वे लोग मीडिया और लोकप्रिय संस्कृति और शिक्षा को नियंत्रित रखते हैं। केवल इंटरनेट के माध्यम से हम देखा पाए है कि भारत का स्थायी, आभिजात शासक वर्ग हमें दुश्मन के हाथ बेचने की तैयारी मे था।

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