ताजा सामाचार

आप यहाँ है :

दूसरे के नज़रिए और वज़ूद के सम्मान से बढ़ती है मानव अधिकारों की गरिमा – डॉ. चन्द्रकुमार जैन

राजनांदगांव। पीटीएस में आयोजित रिफ्रेशर कोर्स में दिग्विजय कालेज के प्रोफ़ेसर, कलमकार और प्रख्यात मोटिवेशनल वक्ता डॉ. चन्द्रकुमार जैन ने कहा कि मानव अधिकारों के लिए जारी हर लड़ाई को ताकत मिलना जरूरी है । दूसरों के नज़रिये और वज़ूद को सम्मान देने में ही इन अधिकारों की रक्षा संभव है। डॉ. जैन ने कहा कि भारत के संविधान से लेकर मानव अधिकार आयोग और मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम तक ऎसी पहल लगातार की जा रही है जिससे ज़िंदगी से लेकर अपनी बात कहने और तरक्की से लेकर अपनी राह पर चलने के बुनियादी हक़ को कोई छीन न सके। देश भक्ति और जन सेवा के संकल्प के साथ बढ़ने वाली पुलिस से इस दिशा में ज्यादा उम्मीदें हैं। हम निगरानी पर ही बेहतर व्यवहार न करें, बात तो तब बनेगी जब हमें कोई देख भी न रहा हो और हमारा व्यवहार नियंत्रित रहे।

पीटीएस में दो दशक से कई अहम विषयों पर व्याख्यान, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन करते आ रहे डॉ. चंद्रकुमार जैन को मानव अधिकार और व्यवहार कला पर विशेष अतिथि सम्बोधन के लिए आमंत्रित किया गया था। आरम्भ में संस्थान के अधिकारी श्री ज़ाकिर अली ने डॉ. जैन का भावपूर्ण शब्दों में परिचय देते हुए उनकी सेवाओं तथा उपलब्धियों को प्रेरणास्पद निरूपित किया। संस्था द्वारा उनका स्वागत किया गया। बाद में डॉ. जैन ने सीधे संवाद शैली में कहा कि किसी भी इंसान को जिंदगी,आजादी, बराबरी, गरिमा और अपनी बात कहने के सम्मान का अधिकार है। यही मानवाधिकार का आधार है। भारतीय संविधान ही नहीं भारत की सहिष्णु परंपरा ने भी इस अधिकार की रक्षा को बल दिया है।

रेफ्रेशर कोर्स के उत्साही महिला बैच को डॉ. जैन ने बताया कि भारत में 1993 से मानव अधिकार संरक्षण कानून अमल में आया और राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग का गठन किया। उन्होंने कहा कि आयोग के कार्यक्षेत्र में नागरिक और राजनीतिक के साथ आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकार भी आते हैं। बाल मजदूरी, एचआईवी/एड्स, स्वास्थ्य, भोजन, बाल विवाह, महिला अधिकार, हिरासत और मुठभेड़ में होने वाली मौत, अल्पसंख्यकों और अनुसूचित जाति और जनजाति के अधिकार सब मानव अधिकारों की सुनवाई के दायरे में आते हैं। लेकिन यह भी याद रखना होगा कि एकमात्र अधिकार जो किसी मनुष्य का हो सकता है, वह सदैव अपना कर्तव्य करने का अधिकार है। कर जो अपना कर्तव्य कर रहा है उसे हर तरह का सहयोग और सम्मान मिलना चाहिए।

व्याख्यान के दूसरे भाग में डॉ. जैन ने कहा कि मानव व्यवहार को समझकर पुलिस बेहतर काम कर सकती है। यह व्यवहार हरेक का एक समान नहीं होता है। दूसरे के विचार और व्यवहार के लिए उसे दोष आसान है किन्तु अपने ही विचार और व्यवहार पर नियंत्रण रखने में लोग अक्सर चूक जाते हैं। यही बात पुलिस की ड्यूटी के दौरान भी लागू होती है। हम पता लगाने की कोशिश करें कि इंसान के व्यवहार का समाज के विकास और क़ानून व व्यवस्था को बनाये रखने में क्या भूमिका है। डॉ. जैन ने कहा कि कठोर सतह, दूसरों के साथ आपके संबंधों को बहुत अधिक जटिल बनाती है और आप दूसरों के साथ और अधिक कठोर पेश आते हैं। इसलिए, क़ानून के दायरे में रहते हुए भी मानव मूल्यों और मानवीय व्यवहार की अहमियत को कभी मत भूलें।



Leave a Reply
 

Your email address will not be published. Required fields are marked (*)

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>

सम्बंधित लेख
 

Back to Top