ताजा सामाचार

आप यहाँ है :

“जब सचिन ने मुझे बैट दिया था तब मैं सिर्फ आठ साल का थाः पृथ्वी शॉ

बेहद साधारण पृष्ठभूमि वाले पृथ्वी शॉ का क्रिकेटिंग स्टारडम वर्षों की कड़ी मेहनत और समर्पण का परिणाम है। क्रिकबज़ के शो स्पाइसी पिच के लेटेस्ट एपिसोड में, गिफ्टेड हिटर ने जीवन के हर मोड़ पर किए गए उन बलिदानों के बारे में बात की जिसकी वजह से आज वे एक सफल क्रिकेटर बन पाए हैं। न सिर्फ अपने बल्कि अपने पिता के भी।

शॉ याद करते हुए बताते हैं, “मेरी प्रैक्टिस के लिए हमें हर रोज विरार से निकलना होता था– हर रोज सुबह लगभग साढ़े चार से पांच बजे हम उठ जाते और देर रात बारह से एक बजे के बीच लौटते। यहां तक की रविवार को भी, मैच न भी होता तो भी मैं मैदान पर जाता और अपनी फिटनेस पर काम करता। मेरे खेल के लिए पिताजी ने सब कुछ छोड़ दिया था– अपना कारोबार और करिअर भी।”

लेकिन शॉ के पिता को कुछ और भी दांव पर लगाना पड़ा। वे भावनात्मक रूप से शॉ की बल्लेबाज़ी से बहुत अधिक जुड़ गए थे जिसका इस युवा खिलाड़ी के प्रदर्शन पर बुरा प्रभाव पड़ने लगा था।

शॉ के पिता बताते हैं कि, “मुझे याद है, सचिन तेंदुलकर मेरे बेटे की बल्लेबाज़ी में विशेष दिलचस्पी ले रहे थे। लेकिन उन्होंने महसूस किया कि मेरा हस्तक्षेप मेरे बेटे के प्रदर्शन को प्रभावित करने लगा है। एक दिन वे मेरे पास आए और बोले कि मुझे थोड़ा दूर बैठ कर खेल देखना चाहिए– मेरी उपस्थिति मेरे बेटे की मनःस्थिति को प्रभावित कर रही थी, जिसकी वजह से उसका प्रदर्शन प्रभावित हो रहा था। उस दिन से, मैंने हमेशा दूर से ही पृथ्वी के मैच देखे हैं।”

लेकिन तेंदुलकर का उनके जीवन में कहीं अधिक महत्वपूर्ण भूमिका रही है। शॉ बताते हैं, “उन्होंने पहली बार मुझे खेलते हुए तब देखा था जब मैं सिर्फ आठ साल का था। मेरा खेल अभी आधा ही खत्म हुआ था, इसलिए उन्होंने मेरे खेल के खत्म होने का इंतजार किया– चुपचाप मैच देखते रहे। खेल खत्म होने के बाद जब मैं उनसे मिला, उन्होंने मुझसे कहा कि यदि मैं ऐसे ही बल्लेबाज़ी करता रहा तो बहुत दूर तक जा सकता हूँ और फिर उन्होंने मुझे एक शानदार बैट उपहार में दी। मैं कुछ भी बोल नहीं पाया था– बस उन्हें धन्यवाद कहा और हाँ में अपना सिर हिला दिया था। ”

“जब मैंने उस बैट को उठाया, तब मुझे पता था कि मुझे कुछ कर दिखाना है। मुझे अभी भी याद है कि वह बैट कितनी शानदार थी– वह मेरे द्वारा इस्तेमाल की गई किसी भी बैट से बहुत अच्छी थी। वह पल मेरे जीवन का निर्णायक पल बन गया– उस पल ने मुझे एक ऐसे क्रिकेटर बनने के लिए प्रेरित किया जैसा कि आज मैं हूँ।”

क्या आप शॉ की प्रेरक सफर के बारे में और जानना चाहते हैं? तो क्रिकबज़ के स्पाइसी पिच का लेटेस्ट एपिसोड देखें। यह एपिसोड शनिवार, 20 जून से क्रिकबज़ की वेबसाइट और एप पर उपलब्ध है ।

Prithvi Shaw Episode

image_pdfimage_print


सम्बंधित लेख
 

Back to Top