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माँ के साथ चूड़ियाँ बेचने वाला बना आईएएस

फिल्म ‘ओम शांति ओम’ का डायलॉग- कहते हैं अगर किसी चीज को शिद्दत से चाहो तो पूरी कायनात तुम्हें उससे मिलाने की कोशिश में लग जाती है, हर किसी को याद होगा। ये डायलॉग IAS रमेश घोलप पर बिल्कुल फिट बैठते हैं। महाराष्ट्र के जिला सोलापुर के छोटे से गांव महगाओं निवासी रमेश ने अपना बचपन बेहद अभाव में गुजारा है। शराब की लत के कारण कम उम्र में ही उनके सिर से पिता का साया उठ गया। घर खर्च के लिए रमेश अपनी मां के साथ गांव में चूड़ियां बेचते थें। इतना ही नहीं, उनके बाएं पैर में पोलियो हो गया, इसके बावजूद भी रमेश ने हार नहीं मानी और साल 2012 में सिविल सेवा परीक्षा में 287वां स्थान प्राप्त किया। आइए जानते हैं उनकी सफलता की कहानी-

चाचा के पास रहकर की पढ़ाई: रमेश इस बात से वाकिफ थे कि केवल शिक्षा ही उनके परिवार की गरीबी को मिटा सकती है। प्राइमरी शिक्षा गांव में करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए वो अपने चाचा के पास बर्शी चले गए। 12वीं के परीक्षा की तैयारी के समय ही उनके पिताजी का देहांत हो गया। इसके बावजूद उन्होंने बारहवीं की परीक्षा में 88.5 प्रतिशत अंक अर्जित किये।

शिक्षक बन करियर में की शुरुआत: स्कूलिंग खत्म करने के बाद जल्दी पैसे कमा कर घर के हालात बेहतर करने के उद्देश्य से डिप्लोमा इन एजुकेशन यानि कि डी.एड करने का सोचा। डी.एड की पढाई के साथ ही उन्होंने ओपन यूनिवर्सिटी से आर्ट्स में बैचलर्स की डिग्री हासिल की और साल 2009 में शिक्षक बनकर अपने करियर की शुरुआत की। हालांकि, अधिक दिन उनका मन इस नौकरी में नहीं लगा क्योंकि उनके दिमाग में अफसर बनने का जुनून सवार था। रमेश ने नौकरी छोड़ दी और दिन-रात यूपीएससी की इस परीक्षा की तैयारी करने लगे।

पहली बार में नहीं मिली सफलता: मां को गाय खरीदने के लिए मिले लोन से रमेश ने IAS की तैयारी शुरू कर दी। पुणे के कोचिंग सेंटर में तैयारी करने के बाद साल 2010 में उन्होंने पहली बार UPSC परीक्षा के लिए आवेदन किया लेकिन उन्हें सफलता हाथ नहीं लगी। इसके बावजूद वो हताश नहीं हुए और दोगुनी मेहनत के साथ दोबारा तैयारी में जुट गए। हालांकि, इस बार उन्होंने किसी भी कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया। कड़ी मेहनत के बाद आखिरकार उन्होंने 2012 में सिविल सेवा परीक्षा में 287वीं रैंक हासिल की।

टैलेंट को तो आगे बढ़ना ही है: वर्तमान में झारखंड के खूंटी जिले में बतौर एसडीएम तैनात रमेश घोलप के अनुसार टैलेंट को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। जिस व्यक्ति में टैलेंट की कोई कमी नहीं, वो बाकी हर कमी का डटकर सामना कर सकता है और विषम परिस्थिति में उभर कर नजर आ सकता है। वो कहते हैं कि अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण सबसे ज्यादा जरूरी है।

साभार- जनसत्ता से

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