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इस बार युध्द हुआ तो भारत से मात खा जाएगा चीन

जब भी भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ता है, तो 1962 के युद्ध का जिक्र भी जरूर आता है। उस युद्ध के बादअब स्थितियां बदल गई हैं।चीन के पास इस समय विकसित हथियारों का जखीरा है, लेकिन भारत भी उससे किसी मामले में कम नहीं है। 62 के युद्ध और अभी के वक्त में काफी बदलाव आ चुका है। आज भारत दुनिया की मजबूत सैन्य ताकतों में शुमार है।

भारतीय सेना के टॉप कमांडर्स ने यह आकलन पेश किया है। इन कमांडर्स का दावा है कि वे युद्ध नहीं चाहते लेकिन बस वे यथार्थवादी हैं और हर तरह की स्थिति के लिए तैयार हैं। बता दें कि पीएम मोदी पेइचिंग के साथ संबंधों में आई कड़वाहट को दूर करने के लिए 27-28 अप्रैल को चीन दौरे पर रहेंगे।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘भारत युद्ध नहीं चाहता है। लेकिन अगर लगातार उकसाया जाएगा तो हम तैयार हैं। बीते कुछ सालों से लगातार हमारे संकल्प की परीक्षा लेने, खासतौर पर डोकलाम विवाद के बाद चीन को यह स्वीकार करने के लिए मजबूर होना पड़ा है कि भारत को हराना अब आसान नहीं है।’

अमरीका को रोकने के लिए ताकत बढ़ा रहा चीन
चीन परमाणु शस्त्रागार के अलावा पांरपरिक सैन्य शक्ति के मामले में भारत से आगे दिखता है। फिर चाहे पनडुब्बी हो, फाइटर्स हो टैंक हो या तोपखाने हों लेकिन, 1962 वाली बात अब नहीं रही। चीन ने अपनी अधिकांश सैन्य ताकत दक्षिण चीन सागर और ताइवान स्ट्रेट में अमेरिका और अन्य देशों की घुसपैठ को रोकने के मकसद से बढ़ाई है लेकिन, इस बात को लेकर अभी भी आशंका है कि क्या इस ताकत का इस्तेमाल पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश के बीच भारत से सटती 4,057 किलोमीटर लंबी सीमा पर कर सकता है या नहीं।

एक वरिष्ठ सैन्य ऑफिसर ने बताया, ‘भारत-चीन सीमा का भूगोल ऐसा नहीं है जहां PLA को हमले करने की जगह मिले और हमारे पास चीन के हमलों का जवाब देने की क्षमता है।’ चीन के सीमावर्ती इलाके में भारत के पास 15 इनफैंटरी डिविजन (हर डिविजन में 12 हजार से ज्यादा सैनिक) हैं। इसके साथ ही तोपखाने, मिसाइलें, टैंक और एयर डिफेंस रेजिमेंट भी हैं।

1 भारतीय जवान का सामना करने के लिए चाहिए 6 चीनी सैनिक
उन्होंने बताया कि भारत 17 माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स 2021-2022 तक तैयार कर लेगा। इन 17 दस्तों में कुल 90 हजार 274 सैनिक होंगे। इनको इस तरह से प्रशिक्षित किया जाएगा कि अगर वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC से सटे पहाड़ियों पर PLA को युद्ध करना है तो उसे हर एक भारतीय जवान से लड़ने के लिए 6 जवान भेजने होंगे।

समुद्री क्षेत्र में भारतीय युद्धपोत आसानी से ऊर्जा आयात के लिए चीन के समुद्री मार्गों को बाधित कर सकते हैं। एक वरिष्ठ नौसेना ऑफिसर ने कहा, ‘पीएलए नौसेना बहुत बड़ी हो सकती है लेकिन हिंद महासागर में अनुभव के मामले में वह बहुत पीछे हैं।’

भले ही तिब्बत पठार में चीन के पास 14 बड़े एयरफील्ड, अडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड और हैलिपैड हैं, लेकिन भारतीय वायुसेना आक्रामक रूप से अपने विरोधी को बाहर कर सकता है। चीनी फाइटर्स में अपने हवाई अड्डों से 9 हजार से 10 हजार फीट की ऊंचाईं तक ही हथियार और ईंधन ले जाने की क्षमता है। प्रमुख लक्ष्य चीन को किसी भी तरह के हमले से रोकने के लिए सामरिक प्रतिरोध का निर्माण करना है और भारत धीरे-धीरे ही सही लेकिन लगातार उस तरफ बढ़ रहा है।

साभार- टाईम्स ऑफ इंडिया से



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