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अभी नहीं जागे तो कोई नहीं बचा पाएगा

जनसांख्यिक दृष्टि से आज का समय सनातन संस्कृति के लिए चुनौती का समय है।

भारत की जनसंख्या में लगभग 20% पहले ही गैर सनातनी हैं, जिसमें मुस्लिम, ईसाई सम्मिलित हैं। शेष 50% आरक्षित वर्ग (ST/SC/OBC) को भी सनातन से काटने का अभियान चलाया जा रहा है।

एक ओर सनातन इतिहास को मिथ्या व काल्पनिक बताने का अभियान जोरों पर है, वहीं दूसरी और ‘शोषण, शोषक व शोषित’ जैसी शब्दावली का प्रयोग कर सामाजिक वैमनस्यता बढ़ाई जा रही है।

वामपंथी प्राध्यापक अपने घर पर कुछ SC/ST/OBC छात्रों को बुलाता है, और उन्हें कहता है –

“औकात क्या थी आपकी, इन सवर्णों के सामने? वह तो भला हो बाबा साहेब का जो अड़ गए, और आप लोगों को आरक्षण दिलवा कर माने। अन्यथा हिंदू धर्म ने आपको दिया क्या है?”
…और बस 5 मिनट में हो गया ब्रेन वाश।

यह लोग यह नहीं बताते कि मध्यकाल का अधिकांश संत साहित्य गैर ब्राह्मणों द्वारा रचित है।
यह लोग यह भी नहीं बताते कि पूरा पश्चिमी भारत गजनवी, गौरी, तैमूर, नादिरशाह, अब्दाली और तत्कालीन लूटनीति के समर्थक शासकों की लूट के बाबजूद, आज भी समृद्ध क्यों है।

यह लोग यह भी नहीं बताएंगे कि जिन जातियों पर सामन्तवाद का आरोप लगाया जाता है, उसके युवा ईस्ट इंडिया कंपनी की फौज में कुछ रूपये महीने की सिपाही की नौकरी कर जान की बाजी लगा रहे थे।

यह इस बिंदु पर शोध नहीं करते कि ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन से पूर्व मुस्लिम शासन काल में, अधिकांश ब्राह्मणों की जीविका किस प्रकार चलती थी।

यह वामपंथी वास्तव में ‘क्रिप्टो क्रिश्चियन’ अर्थात् हिंदू नाम वाले ईसाई हैं। इनकी कोशिश है कि हिंदू धर्म के ज्यादा से ज्यादा लोग हिंदू धर्म छोड़ कर, ST-ईसाई हो जाएं, और SC/OBC बौद्ध।

भारत की सनातन संस्कृति में जितना वैमनस्यता का भाव भरा जाएगा, भारतीय राष्ट्र उतनी ही कमजोर होता जाएगा, जिससे विदेशी विचारधाराओं की जड़े द्रुत गति से मजबूत होती जाएंगी।

ऐसा ही कुछ 1946 में हुआ था, जब जोगेंद्र नाथ मंडल के नेतृत्व में शेड्यूल्ड कास्ट फैडरेशन ऑफ इंडिया ने मुस्लिम लीग के साथ समझौता कर लिया था। नतीजा 16 अगस्त 1946 को पंजाब व बंगाल में शेष हिंदुओं का भीषण कत्लेआम हुआ। अपने को हिंदू न मानने वाले शेड्यूल्ड कास्ट के समर्थन से 12 हिंदू बाहुल्य जिले पाकिस्तान को मिल गए। कुल 17 प्रतिशत के आसपास यह शेड्यूल्ड कास्ट वाले लोग पाकिस्तान के नागरिक बने, जो वर्तमान में वहाँ 2 प्रतिशत से भी कम रह गए हैं। आजादी के बाद पूर्वी व पश्चिमी पाकिस्तान में हुए भीषण कत्लेआम ने अधिकाँश ने इस्लाम अपना लिया। इनके दुष्ट नेता जोगेंद्र नाथ मंडल ने भाग कर भारत में ही शरण ली।*

आप अपने में मगन रहिए और आने वाले आसन्न संकट से बेफिक्र रहिए। आपकी संतानें झेलेंगी, आपको क्या?

समय रहते, संगठित होईए। जागिए और जगाईए।

यशभान सिंह तोमर
राष्ट्रीय संयोजक
*’राष्ट्रवादी लेखक संघ’*

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