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साहित्यकारों को सम्मानित करने का इफको का काम प्रशंसनीयः श्री प्रभु

नई दिल्ली। हिन्दी के चर्चित कवि अष्टभुजा शुक्ल को साल 2015 के श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान प्रदान किया गया। दिल्ली के कमानी ऑडिटोरियम में आयोजित एक समारोह में केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने सम्मान राशि 11 लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र और शॉल भेंट कर अष्टभुजा शुक्ल को सम्मानित किया। वर्ष 1954 में बस्ती में जन्मे अष्टभुजा शुक्ल की कविताओं में केदारनाथ अग्रवाल और नागार्जुन की झलक देखने को मिलती है। पद-कुपद, चैत के बादल, दुःस्वप्न भी आते हैं, इसी हवा में अपनी भी दो चार साँस है आदि अष्टभुजा शुक्ल के प्रमुख काव्य-संग्रह हैं। सम्मान के लिए अष्टभुजा शुक्ल का चयन उनके व्यापक साहित्यिक योगदान को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

यह प्रतिष्ठित पुरस्कार किसी ऐसे रचनाकार को दिया जाता है जिसकी रचनाओं में ग्रामीण और कृषि जीवन से जुड़ी समस्याओं, आकांक्षाओं और संघर्षों को मुखरित किया गया हो। अब तक यह सम्मान विद्यासागर नौटियाल, शेखर जोशी, संजीव एवं मिथिलेश्वर को प्रदान किया गया है। पुरस्कृत साहित्यकार को प्रतीक चिह्न, प्रशस्ति पत्र तथा ग्यारह लाख रुपये की राशि दी जाती है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम कर रहे रचनाकारों को इफको की ओर से सम्मानित किए जाने की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि कृषि और सहकारी क्षेत्र में काम कर रही संस्था साहित्य और साहित्यकारों के लिए भी काम करे तो यह अपने आप में बहुत बड़ी बात है।

उर्वरक बनाने और बेचने वाली विश्व की सबसे बड़ी सहकारी संस्था इफको द्वारा वर्ष 2011 में स्थापित इस पुरस्कार को हिन्दी साहित्य-जगत के सर्वाधिक प्रतिष्ठित सम्मानों में शुमार किया जाता है। अपने स्वागत-संबोधन में इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने अष्टभुजा शुक्ल को बधाई देते हुए कहा कि उनकी कविताओं से गुजरते हुए हमें किसानों की संस्कृति के कई रूपों के सहज दर्शन होते हैं। इस मौके पर सम्मानित साहित्यकार अष्टभुजा शुक्ल ने अपनी रचना-यात्रा से जुड़े विभिन्न अनुभवों का जिक्र किया।

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