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इलाज के नाम पर डॉक्टरों ने लूट भी लिया और जान भी गई

मुंबई। ठाणे के रहने वाले मीठूलाल बाफना (43) ने बहुत मुश्किल से अपनी पत्नी के इलाज के लिए 43 लाख रुपये जुटाए, जिनकी पिछले महीने मौत हो गई। लेकिन उन्हें यह बात खाए जा रही है कि हिंदुजा हॉस्पिटल में टॉप हर्ट स्पेशिऐलिस्ट्स की मौजूदगी में ऑपरेशन होने के बावजूद उनकी पत्नी के हर्ट में ‘वॉल्व’ गिर कैसे गया।

महाराष्ट्र मेडिकल कौसिंल को किए शिकायत में बाफना ने कहा, ‘डॉक्टरों ने मुझे आश्वस्त किया था कि ट्रांसकैथेटर माइट्रल वॉल्व रिपेयर की नई प्रक्रिया 200 फीसदी सेफ है और मेरी पत्नी केवल 5 दिनों में ही स्वस्थ होकर घर लौट जाएंगी। हालांकि उन्होंने 60 दिनों के बाद हॉस्पिटल छोड़ा और वो भी कोमा की हालत में और ऐम्बुलेंस में बैठने के कुछ ही मिनट बाद उनकी मौत हो गई।’

हॉस्पिटल में बाफना के इलाज में 43 लाख रुपये खर्च हुए। इसमें से उन्हें हिंदुजा हॉस्पिटल से 12.47 लाख रुपये और मेडिकल इंश्योरेंस से 11 लाख रुपये रिफंड हुए। मृतका के दामाद ने कहा, ‘पहले हमें बताया गया था कि इलाज में 20 लाख ही लगेंगे, लेकिन फिर यह खर्च दोगुना हो गया। वह पूरी तरह से स्वस्थ थीं और अपने घर से मेरे घर करीब एक किलोमटर रोजाना चलकर ही आती थीं।’

वहीं इलाज में शामिल रहे डॉक्टरों ने किसी भी तरह की असावधानी या चूक से इनकार किया है। मृतका मंजू का 6 साल पहले ऑपरेशन कर चुके सीनियर सर्जन कौशल पांडेय ने बताया, ‘हमने केवल वॉल्व को रिपेयर किया। 6 साल पहले ओपन हर्ट सर्जरी हुई थी, जिसके 6 महीने बाद ही उन्हें सांस लेने में दिक्कत आने लगी, लेकिन दूसरी ओपन हर्ट सर्जरी की संभावना को खारिज कर दिया गया क्योंकि यह बहुत रिस्की होता। उनका केस रिस्की था और ऐसे जटिल केसों में वॉल्व स्लिप की संभावना 20 फीसदी तक बढ़ जाती है।’

साभार- मुंबई मिरर से



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