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बीस वर्ष में डॉ. देवीसहाय पांडेय ने 44 हजार पृष्ठों में लिख दिया चारों वेदों का महाभाष्य

उम्र के जिस पड़ाव पर पहुंचकर लोग खुद को थका हुआ पाते हैं, उस अवस्था में अयोध्या निवासी डॉ. देवीसहाय पांडेय ‘दीप’ दुनिया को वेदों की रोशनी से आलोकित करने में जुटे हैं। वैदिक संस्कृत का हिंदी महाभाष्य तैयार करने का संकल्प उन्होंने 20 वर्ष पहले लिया था। आज 82 की उम्र में उनकी साधना महाग्रंथों के रूप में फलित हो रही है। ऋग्वेद के पांच खंड प्रकाशित हो चुके हैं, जबकि अथर्ववेद की प्रूफिंग का काम इसी जुलाई में पूरा हुआ है।

रोजाना आठ से दस घंटे की कड़ी मेहनत
अयोध्या के लवकुश नगर निवासी डॉ. देवीसहाय पांडेय ‘दीप’ के बेटे मनीष पांडेय ने बताया कि वेद भाष्यकार उनके पिता हर दिन आठ से दस घंटे कार्य करते हैं। पिछले आठ माह से वह अथर्ववेद की प्रूफ़िंग को अंतिम रूप देने में लगे हुए थे। उन्होंने बताया कि उम्मीद है कि 2022 तक अथर्ववेद महाभाष्य ग्रंथ के रूप में आ जाएगा। इसका प्रकाशन चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान, नई दिल्ली द्वारा किया जा रहा है। ऋग्वेद महाभाष्य के पांच खंड इसी वर्ष प्रकाशित हुए हैं।

चारों वेदों की पांडुलिपियों का वजन 80 किलोग्राम से ज्यादा
मनीष पांडेय बताते हैं कि डॉ. देवीसहाय पांडेय ‘दीप’ ने चारों वेदों के सभी मंत्रों का हिंदी में अन्वयपरक शब्दार्थ, अनुवाद व पद्यानुवाद किया है। इस प्रकार का सृजन एक व्यक्ति द्वारा किया गया विश्व का अनूठा अद्वितीय कार्य है। चारों वेदों के अनुवाद व पद्यानुवाद की पांडुलिपियों का वजन 80 किलो से भी ज्यादा है। यह 400 पेज के 110 रजिस्टर से भी ज्यादा होगा। इस गणना से कुल 44 हजार पृष्ठ होते हैं। इसके अलावा डॉ. दीप ने हिंदी और संस्कृत में लगभग 30 पुष्ट ग्रंथों की रचना की है। वर्तमान में जयतुभारतम् संस्कृत उपन्यास लिखने के बाद सांख्यकारिका पर लेखन कर रहे हैं।

ऋग्वेद की कंपोजिंग में लग गए पांच साल
मनीष पांडेय बताते हैं कि पिता जी ने चारों वेदों के महाभाष्य के लेखन का कार्य करीब तीन वर्ष पहले पूरा कर लिया था। छपाई की प्रक्रिया से पूर्व कंपोजिंग तथा प्रूफिंग का काम काफ़ी समय लेने वाला है। अथर्ववेद महाभाष्य का प्रूफ जांचने में ही आठ माह लग गए। इससे पूर्व प्रेस में ऋग्वेद की कंपोजिंग में ही पांच साल का वक्त लग गया था।

वेदविभा यूट्यूब चैनल पर वेदों की सरलतम व्याख्या
डॉ. दीप वेद मंत्रों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से वेदविभा यूट्यूब चैनल के माध्यम से वेदमन्त्रों की सरलतम व्याख्या भी कर रहे हैं। चारों वेदों के लोकप्रचलित मंत्रों की व्याख्या ‘वेदविभा’ में संग्रहीत किया गया है। इस वर्ष उनकी दो पुस्तकें आई हैं—काव्य कादंबिनी और शौर्यवैभवम्। डॉ. देवीसहाय पांडेय फैजाबाद स्थित कॉलेज से 1999 में सेवानिवृत्त हुए। कॉलेज में उन्होंने हिंदी विषय का अध्यापन किया। मौलिक कृतियों का सृजन उन्होंने संस्कृत में किया है।

साभार https://news.prolingoeditors.com/ से

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