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वेब पर बढ़ता हिंदी का वर्चस्व ,साहित्य के रिश्ते , ए मोहब्बत –एक शाम बेगम अख्तर के नाम’ , कविता के रंग .

लखनऊ : अब वेब पर हिंदी का वर्चस्व बढ़ता ही जा रहा है .जागरण संवादी के दुसरे दिन वेब की दुनिया के बादशाहों की कहानियाँ ‘वेब की दुनिया के बादशाह ‘ सत्र में भरत नागपाल ,प्रवाल शर्मा से मुकुल श्रीवास्तव रूबरू हुए .

प्रवाल शर्मा उर्फ शर्माजी टेक्निकल ने कहा कि मैं हिंदी में यूट्यूब चैनल बनाकर कुछ अलग करना चाहता था। इसके लिए मैंने संघर्ष किया नौकरी के साथ बैंगलोर जहां पर कम हिंदी बोली जाती है, हिंदी में यूट्यूब चैनल बनाया। मैंने खुद को चैलेंज दिया और आज 15 लाख यूट्यूब सब्‍सक्राइबर हमारे दर्शक हैं। प्रवाल शर्मा ने कहा कि कुछ ऐसा काम करो जो सबसे अलग हो तभी लोग उसे अच्छे से अपनाएंगे क्योंकि मेरी रुचि शुरुआत से ही कंप्यूटर के लिए थी इसलिए मैंने यूट्यूब चैनल बनाने का फैसला लिया।

भरत नागपाल ने कहा कि मैंने आइज्ञान इसलिए बनाया ताकि लोगों को तकनीकी ज्ञान दे सकूं। मैंने कभी भी फेमस होने की कोशिश नहीं की। भरत ने कहा कि मैंने सबसे पहले 2010 में अपने ब्रदर इन लॉ के आईफोन को शो की अमेरिका की सिम पर ही चल रहा था और इंडिया का बंद हो गया था। उसे अनलॉक करने के लिए एक ट्यूटोरियल बनाया और ऑनलाइन किया। इसके बाद से मुझे आईज्ञान कंपनी बनाने की प्रेरणा मिली, क्योंकि उस पर मुझे काफी अच्‍छा रिस्पॉन्स मिला।

क्या बिकता है ,क्या छपता है सत्र में हिंदी के प्रकाशकों राजकमल प्रकाशन से अलिंद माहेश्वरी, राजपाल एंड संस से प्रणव जौहरी, हिन्द युग्म से शैलेश भारतवासी से गिरिराज किराडू ने बातचीत की . प्रकाशकों ने इस सत्र में बताया की कैसे किसी पाण्डुलिपि प्रकाशित करते हैं .प्रणव जौहरी ने कहा ‘जब हम किसी पाण्डुलिपि को पहलीबार पढ़ते हैं और अगर हमें लगता है कि यह पुस्तक अच्छी तरह बिक सकती है to हम उस पाण्डुलिपि को प्रकाशित कर देते हैं .कई बार ऐसी भी पाण्डुलिपि मिलती हैं की उसका कंटेंट दमदार होता है तो हम उसे प्रकाशित करते ही करते हैं .अलिंद माहेश्वरी ने कहा ‘ जो किताब हमारे पास आती है तो सबसे पहले हमारी संपादकीय टीम उसका मूल्याकन करती है ,अगर उनको कंटेंट पसंद आ जाता है तो फिर हम लेखक के साथ बेठ कर पुस्तक पर गहन चर्चा करते है ,हम यह कह सकते हैं कि पुस्तक को चुनने और प्रकाशित करने में संपादकीय टीम का अहम रोल होता है . शैलेश भारतवासी ने कहा ‘ हमारे यहां सम्पादकीय टीम को अधिकार होता है कि वे पाण्डुलिपि को पढ़ देख सकते हैं कि उसमे कितना दम है ,पुस्तक प्रकाशन में संपादकों की प्राथमिक भूमिका होती है .

साहित्य में रिश्ते में मशहूर कलमकार मैत्रेयी पुष्पा ,सूर्यबाला ,यतीन्द्र मिश्र से अनुराधा गुप्ता ने बात की .मंच पर स्त्री के विद्रोही तेवरों को शब्द देने वाली प्रसिद्ध कथाकार मैत्रेयी पुष्पा हों, रिश्तों में अगाध विश्वास रखने वाली कहानीकार सूर्यबाला हों तो विमर्श को ऊंचाइयां मिलनी ही थीं और लेखक यतींद्र मिश्र ने इसे और सार्थक बना दिया। संचालन कर रही अनुराधा गुप्ता ने जब यह सवाल उठाया कि 80 के दशक से अब तक के साहित्य में रिश्तों में किस तरह का फर्क आया है तो सूर्यबाला को यह कहने में कोई झिझक नहीं हुई कि अब वह गर्मजोशी नहीं रही। रिश्ते अब इस्तेमाल की चीज हो गए हैं। मैत्रेयी पुष्पा ने रिश्तों के दायरे को और विस्तार दिया कि रिश्ते सिर्फ पारिवारिक नहीं होते। प्रेम के होते हैं, मुहब्बत के होते हैं, संवेदना के होते हैं। अपने पात्रों के बारे में उनका कहना था कि वह शोषित, दलित और सताए लोग थे। उनका बातें कहने पर ही मेरे ऊपर ‘परिवार तोड़ू’ के आरोप लगे।

कविता के रंग सत्र में काव्य जगत के महारथी बुद्धिनाथ मिश्र, माहेश्वर तिवारी ,सर्वेश अस्थाना , एन पी सिंह , आशुतोष दुबे से रश्मि भारद्वाज रूबरू हुई .इन नामचीन कवियों ने हास्य , नवगीत ,प्रेम –प्रसंग ,व्यंग्य और मानवीय भावनाओं को बुनती कविताओं से श्रोताओं को गुदगुदाने के साथ साथ सोचने पर भी मजबूर किया .

दुसरे दिन के अंतिम सत्र ‘ए मोहब्बत –एक शाम बेगम अख्तर के नाम’ में शास्त्रीय संगीत गायिका विद्या शाह ने जहां बेगम अख्तर की गाई एक से बढ़कर एक सुरीली गजलों को सुनाकर कार्यक्रम में मौजूद हर श्रोता का दिल जीत लिया वहीं बेगम अख्तर की जिंदगी के विभिन्न पहलुओं से श्रोताओं को रूबरू भी करवाया। हर गीत सुनने वालों के दिल में उतर रहा था और वाह-वाह की आवाज गूंज उठी .हमको मिटा सके ये ज़माने में दम नही , हमसे जमाना खुद है ,हम जमाने नही जैसे गीतों से शाम को हसीन बना दिया .

संपर्क
संतोष कुमार
M -9990937676



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