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बेकारअति उत्तम 
  
जियो तो ऐसे जियो |   शिवानी जोशी |  बुधवार , 20 फ़रवरी 2008
इस देश के घर-घर और मंदिरों में जिसके शब्द बरसों से गूंज रहे हैं, दुनिया के किसी भी कोने में बसे किसी भी सनातनी हिंदू परिवार में ऐसा व्यक्ति खोजना मुश्किल है जिसके ह्रदय-पटल पर बचपन के संस्कारों में उसके लिखे शब्दों की छाप न पड़ी हो। उनके शब्द उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत के हर घर और मंदिर मे पूरी श्रध्दा और भक्ति के साथ गाए जाते हैं। बच्चे से लेकर युवाओं को और कुछ याद रहे या न रहे इसके बोल इतने सहज, सरल और भावपूर्ण है कि एक दो बार सुनने मात्र से इसकी हर एक पंक्ति दिल और दिमाग में रच-बस जाती है।

हम बात कर रहे हैं देश और दुनियाभर के करोड़ों हिन्दुओं के रग-रग में बसी ओम जय जगदीश की आरती की। हजारों साल पूर्व हुए हमारे ज्ञात-अज्ञात ऋषियों ने परमात्मा की प्रार्थना के लिए जो भी श्लोक और भक्ति गीत रचे, ओम जय जगदीश की आरती की भक्ति रस धारा ने उन सभी को अपने अंदर समाहित सा कर लिया है। यह एक आरती संस्कृत के हजारों श्लोकों, स्तोत्रों और मंत्रों का निचोड़ है। लेकिन इस अमर भक्ति-गीत और आरती के रचयिता पं. श्रध्दाराम शर्मा के बारे में कोई नहीं जानता और न किसी ने उनके बारे में जानने की कोशिश की। हमारे हजारों पाठकों ने हमारा ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि हम ओम जय जगदीश की आरती के लेखक के बारे में कुछ बताएं। प्रस्तुत है इस अमर रचनाकार का जीवन परिचय।

shraddharam.jpg
पं. श्रध्दाराम शर्मा 
चित्र-ट्रिब्यून, चंडीगढ़ से साभार

ओम जय जगदीश की आरती जैसे भावपूर्ण गीत के रचयिता थे पं. श्रध्दाराम शर्मा। प. श्रध्दाराम शर्मा का जन्म 1837 में पंजाब के लुधियाना के पास फुल्लौर में हुआ था। उनके पिता जयदयालु खुद एक अच्छे ज्योतिषी थे। उन्होंने अपने बेटे का भविष्य पढ़ लिया था और भविष्यवाणी की थी कि यह एक अद्भुत बालक होगा। बालक श्रध्दाराम को बचपन से ही धार्मिक संस्कार तो विरासत में ही मिले थे। उन्होंने बचपन में सात साल की उम्र तक गुरुमुखी में पढाई की। दस साल की उम्र में संस्कृत, हिन्दी, पर्शियन, ज्योतिष, और संस्कृत की पढाई शुरु की और कुछ ही वर्षो में वे इन सभी विषयों के निष्णात हो गए।

पं. श्रध्दाराम ने पंजाबी (गुरूमुखी) में 'सिखों दे राज दी विथिया' और 'पंजाबी बातचीत' जैसी किताबें लिखकर मानो क्रांति ही कर दी। अपनी पहली ही किताब 'सिखों दे राज दी विथिया' से वे पंजाबी साहित्य के पितृपुरुष के रूप में प्रतिष्ठित हो गए। इस पुस्तक मे सिख धर्म की स्थापना और इसकी नीतियों के बारे में बहुत सारगर्भित रूप से बताया गया था। पुस्तक में तीन अध्याय है। इसके अंतिम अध्याय में पंजाब की संकृति, लोक परंपराओं, लोक संगीत आदि के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई थी। अंग्रेज सरकार ने तब होने वाली आईसीएस (जिसका भारतीय नाम अब आईएएस हो गया है) परीक्षा के कोर्स में इस पुस्तक को शामिल किया था।

ओम जय जगदीश की आरती

1870 में उन्होंने ओम जय जगदीश की आरती की रचना की। प. श्रध्दाराम की विद्वता, भारतीय धार्मिक विषयों पर उनकी वैज्ञानिक दृष्टि के लोग कायल हो गए थे। जगह-जगह पर उनको धार्मिक विषयों पर व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया जाता था और तब हजारों की संख्या में लोग उनको सुनने आते थे। वे लोगों के बीच जब भी जाते अपनी लिखी ओम जय जगदीश की आरती गाकर सुनाते। उनकी आरती सुनकर तो मानो लोग बेसुध से हो जाते थे। आरती के बोल लोगों की जुबान पर ऐसे चढ़े कि आज कई पीढियाँ गुजर जाने के बाद भी उनके शब्दों का जादू कायम है।

उन्होंने धार्मिक कथाओं और आख्यानों का उध्दरण देते हुए अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ जनजागरण का ऐसा वातावरण तैयार कर दिया कि अंग्रेजी सरकार की नींद उड़ गई। वे महाभारत का उल्लेख करते हुए ब्रिटिश सरकार को उखाड़ फेंकने का संदेश देते थे और लोगों में क्रांतिकारी विचार पैदा करते थे। 1865 में ब्रिटिश सरकार ने उनको फुल्लौरी से निष्कासित कर दिया और आसपास के गाँवों तक में उनके प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई। जबकि उनकी लिखी किताबें स्कूलों में पढ़ाई जाती रही।

पं. श्रध्दाराम खुद ज्योतिष के अच्छे ज्ञाता थे और अमृतसर से लेकर लाहौर तक उनके चाहने वाले थे इसलिए इस निष्कासन का उन पर कोई असर नहीं हुआ, बल्कि उनकी लोकप्रियता और बढ गई। लोग उनकी बातें सुनने को और उनसे मिलने को उत्सुक रहने लगे। इसी दौरान उन्होंने हिन्दी में ज्योतिष पर कई किताबें भी लिखी। लेकिन एक इसाई पादरी फादर न्यूटन जो पं. श्रध्दाराम के क्रांतिकारी विचारों से बेहद प्रभावित थे, के हस्तक्षेप पर अंग्रेज सरकार को थोड़े ही दिनों में उनके निष्कासन का आदेश वापस लेना पड़ा। पं. श्रध्दाराम ने पादरी के कहने पर बाईबिल के कुछ अंशों का गुरुमुखी में अनुवाद किया था। पं. श्रध्दाराम ने अपने व्याख्यानों से लोगों में अंग्रेज सरकार के खिलाफ क्रांति की मशाल ही नहीं जलाई बल्कि साक्षरता के लिए भी ज़बर्दस्त काम किया। 

आज जिस पंजाब में सबसे ज्यादा कन्याओं की भ्रूण हत्याएं होती है इसका एहसास उन्होंने बहुत पहले कर लिया था। 1877 में भाग्यवती नामक एक उपन्यास प्रकाशित हुआ (जिसे हिन्दी का पहला उपन्यास माना जाता है), इस उपन्यास की पहली समीक्षा अप्रैल 1887 में हिन्दी की मासिक पत्रिका प्रदीप में प्रकाशित हुई थी। इसे पंजाब सहित देश के कई राज्यो के स्कूलों में कई सालों तक पढाया जाता रहा। इस उपन्यास में उन्होंने काशी के एक पंडित उमादत्त की बेटी भगवती के किरदार के माध्यम से बाल विवाह पर ज़बर्दस्त चोट की। इसी  इस उपन्यास में उन्होंने भारतीय स्त्री की दशा और उसके अधिकारों को लेकर क्रांतिकारी विचार प्रस्तुत किए।

पं. श्रध्दाराम के जीवन और उनके द्वारा लिखी गई पुस्तकों पर गुरू नानक विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के डीन और विभागाध्य्क्ष श्री डॉ. हरमिंदर सिंह ने ज़बर्दस्त शोध कर तीन संस्करणों में श्रध्दाराम ग्रंथावली का प्रकाशन भी किया है। उनका मानना है कि पं. श्रध्दाराम का यह उपन्यास हिन्दी साहित्य का पहला उपन्यास है। लेकिन यह मात्र हिन्दी का ही पहला उपन्यास नहीं था बल्कि कई मायनों में यह पहला था। उनके उपन्यास की नायिका भाग्यवती पहली बेटी पैदा होने पर समाज के लोगों द्वार मजाक उडा़ए जाने पर अपने पति को कहती है कि किसी लड़के और लड़की में कोई फर्क नहीं है। उन्होने इस उपन्यास के जरिए बाल विवाह जैसी कुप्रथा पर ज़बर्दस्त चोट की। उन्होंने तब लड़कियों को पढाने की वकालात की जब लड़कियों को घर से बाहर तक नहीं निकलने दिया जाता था, परंपराओं, कुप्रथाओं और रुढियों पर चोट करते रहने के बावजूद वे लोगों के बीच लोकप्रिय बने रहे। जबकि वह ऐक ऐसा दौर था जब कोई व्यक्ति अंधविश्वासों और धार्मिक रुढियों के खिलाफ कुछ बोलता था तो पूरा समाज उसके खिलाफ हो जाता था। निश्चय ही उनके अंदर अपनी बात को कहने का साहस और उसे लोगों तक पहुँचाने की जबर्दस्त क्षमता थी।

हिन्दी के जाने माने लेखक और साहित्यकार पं. रामचंद्र शुक्ल ने पं. श्रध्दाराम शर्मा और भारतेंदु हरिश्चंद्र को हिन्दी के पहले दो लेखकों में माना है। पं.श्रध्दाराम शर्मा हिन्दी के ही नहीं बल्कि पंजाबी के भी श्रेष्ठ साहित्यकारों में थे, लेकिन उनका मानना था कि हिन्दी के माध्यम इस देश के ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपनी बात पहुँचाई जा सकती है। पं. श्रध्दाराम का निधन 24 जून 1881 को लाहौर में हुआ। 


पं.श्रध्दाराम शर्मा के बारे में अंग्रेजी में लेख यहाँ और यहाँ उपलब्ध है।

ओम जय जगदीश की आरती

ओम जय जगदीश, स्वामी जय जगदीश हरे
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे

जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का
सुख-सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का

मात पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी
तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी

तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी

तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता
मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति

दीनबंधु दुःखहर्ता, तुम रक्षक मेरे.
करुणा हस्त बढ़ाओ, द्वार पडा तेरे

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा

ओम जय जगदीश, स्वामी जय जगदीश हरे

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टिप्पणियाँ (31)add comment
rachana: ...
शिवानी जी

आपने पंडित जी के बारे मे बता के बहुत अच्छा किया है मुझे तो ये सब मालूम नही था
आपने लिखा भी बहुत अच्छा है
आप का धन्यवाद
रचना
1

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मार्च 13, 2008
मत: +15
jagdishjain: ...
शिवानी जी,
आपने पं. श्रध्दाराम शर्मा जी के बारे में एक बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी देकर पाठकों का बड़ा उपकार किया है. ऐसी महान विभूति के बारे में जानकर श्रद्धा से उनके प्रति मस्तक झुक गया है. ऐसी मत्वपूर्ण जानकारी के लिए आप भी बधाई की पात्र हैं.
2

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नवम्बर 24, 2008
मत: +8
suresh s. maheshwari, Vashi, Navi Mumbai: ...
शिवानी जी

आपने पंडित जी के बारे मे बता के बहुत अच्छा किया है, मालूम नही था
आपने लिखा भी बहुत अच्छा है, आपका धन्यवाद
3

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दिसम्बर 05, 2008
मत: +3
आचार्य संजीव 'सलिल', संपादक दिव्या नर्मदा: ...
आचार्य संजीव 'सलिल', संपादक दिव्या नर्मदा
संजिव्सलिल.ब्लागस्पाट.कॉम / सलिल.संजीव@जीमेल.कॉम

आत्मीय!
वंदे-मातरम.

परिचय श्रद्धाराम का, जन-गण को उपहार.
रचना सबको याद है, बिसरा रचनाकार.

होता है अभिव्यक्त ख़ुद परमब्रम्ह हर बार.
शब्द ब्रम्ह जब कलम से लेता है आकार.

कवि है केवल माध्यम, सृजन नहीं व्यापार.
मान्य न भारत में रहा, प्रतिलिपि का अधिकार.

श्रुति-स्मृति की प्रथा की, ऋषियों ने स्वीकार.
सार्थक स्मृति में रहे, जो बिसरे बेकार.

किया शिवानी ने पुनः, सच का आविष्कार.
साधुवाद देता 'सलिल', बार-बार आभार.
4

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दिसम्बर 19, 2008
मत: +14
narendar kumar jangra: ...
मेरा नाम नरिंदर कुमार है मैं स्पेन मैं रह रहा हूँ मैं पुंजाब के शहर नवांशहर गावं जाडला टाऊन का हूँ मुझे पंडित शरदा राम शर्मा जी के बारे मैं जान कर बहुत खुशी हुई एक महान इंसान के बारे मैं आप लोगों नें हमें बताया मेरे ह्केअल मैं बहुत ही कम लोग जानते होंगे की ॐ जय जगदीश आरती किसने लिखी आप का बहुत बहुत धनेअबाद के आप ने इस के बारे मैं हमें बताया


5

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दिसम्बर 31, 2008
मत: +3
Dr. Gautam Sachdev: ...
पंडित श्रद्धाराम शर्मा से सम्बंधित लेख है तो सारगर्भित और पठनीय, लेकिन इस में कई अशुद्धियाँ हैं. पहली अशुद्धि तो पंडित जी के जन्मस्थान के नाम के बारे में है. यह स्थान फुल्लौरी नहीं, फुल्लौर है, जहाँ के निवासी होने के नाते पंडित जी ने अपने जातिनाम के स्थान पर स्थानवाची नाम फुल्लौरी लिखा है और वे हिन्दी साहित्य के इतिहास में श्रद्धाराम फुल्लौरी के नाम से जाने जाते हैं. दूसरी अशुद्धि अधिक गंभीर है. आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने अपने इतिहास में कहीं नहीं लिखा कि पंडित श्रद्धाराम फुल्लौरी हिन्दी के पहले लेखक या पहले गद्यकार थे. शुक्ल जी ने केवल यह लिखा है कि "जिस दिन उनका (पंडित श्रद्धाराम का) देहांत हुआ, उस दिन उनके मुहँ से सहसा निकला कि भारत में भाषा के दो लेखक हैं - एक काशी में, दूसरा पंजाब में. परन्तु आज एक ही रह जायेगा." ज़ाहिर है कि शुक्ल जी ने पंडित जी के शब्दों को उद्धृत किया है, न कि स्वयं यह लिखा है. और पंडित जी ने भी ख़ुद को हिन्दी का पहला लेखक नहीं कहा. वर्षों पहले मैं ने बीबीसी के कार्यक्रम हमसे पूछिए में आरती के रचयिता के बारे में एक श्रोता के प्रश्न का उत्तर देते हुए काफ़ी विस्तार से बताया था.
गौतम सचदेव
6

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जनवरी 01, 2009
मत: +2
Savita Shukul: ...
Shivani you have done great service by bringing this fact to our knowledge about the writer of Om Jai Jagdeesh...This aarti has become almost eternal truth in all hindu families.Thanks and may god be with you.
7

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जनवरी 08, 2009
मत: +2
shobhana: ...
bhut hi bhumuly jankari
8

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जनवरी 13, 2009
मत: +1
mahendra verma: ...

पंडित श्रद्धाराम शर्मा पर आपका लेख पढ़ कर बहुत अच्छा लगा . 'ॐ जय जगदीश हरे ' आरती के विषय में भी जान कर प्रसन्नता हुई .

महेंद्र वर्मा
यॉर्क, यू . के.
9

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अप्रेल 23, 2009
मत: +2
H. P. Bahuguna: ...
well done great service by bringing about the writer of Om Jai Jagdeesh. in Thanks and may god be with you.
10

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जुलाई 03, 2009
मत: +0
Dr.C.M.Yadav: ...
पंडितजी के बारे में विस्तृत जानकारी देकर आपने कृतार्थ किया. पंडित श्रद्धाराम जी के श्री चरणों में सादर वंदन. कृपया ये भी बताने की अनुकम्पा करें ,की इस आरती की धुन किसने बनाई है,क्योंकी ये एक ऐसी शाश्वत धुन बन पडी है जिसे कोई भी गा सकता है,चाहे उसे संगीत का ज्ञान हो या ना हो.
11

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जुलाई 05, 2009
मत: +5
Digamber: ...
pandit जी के बारे में जान कर बहुत ही अच्छा लगा............. jinhone कालजयी रचना इस समाज को दी है उमके चरणों में मेरा शीश jhuka कर namr वंदन है .................. ati uttam जानकारी ............
12

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जुलाई 26, 2009
मत: +5
deepak: ...
रचना ऐसे ही प्रसिद्ध नहीं हो जाती है किसी रचना के प्रसिद्धि के पीछे रचनाकार का संस्कार विद्युत, चुम्बक,प्रेरक तथा उत्प्रेरक की तरह कार्य करता है और यह बतलाता है की रचनाकार का इसके पीछे कितना समर्पण, तप, तथा साधना लगा हुआ है.
आपको इनके बारे में जानकारी देने के लिए कोटि कोटि धन्यवाद, भगवान् जगदीश की आप पर कृपा बनी रहे ,
13

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अगस्त 10, 2009
मत: +0
M.S.Arora: ...
pandit shri shardha Ram ji ki bare mai jankar bahut achha laga. Aaj se pahale ye maloom nahi tha ki Aarti kai rachiyata aap hai, Shivani ji aap ko sadhu vad is jankari dane kai liy.
M.S. Arora
14

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अगस्त 11, 2009
मत: +0
Aditya0786: ...
aap ne jo ye jankari di hai uske liye bahut bahut dhanyawad. Is internet ke yug ka ese hi sadupyog karke logon ko jankari dete raho.


Dhanyawad
Aditya
15

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अक्टूबर 05, 2009
मत: +0
LAKHIPRASADJOSHI ..AURANGABAD,M.S.: ...
OM JAY JAGDISH HARE,AARTI KE JANKARI WRITER KA NAM AAP NE BATYA THANK'S
16

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नवम्बर 18, 2009
मत: +4
vkse izdk'k tks'kh , Hkksiky: ...
vkse t; txnh'k ds jfp;rk ds ckjs esa tkudjh izkIr gqbZ jpuk ds ys[k ds ckjs ds vufHkx jgk !bl ds fy;s dksfV'k /kU;okn!
vkselk/kuk, Hkksiky
17

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जनवरी 05, 2010
मत: +1
Devilal Chouhan: ...
Sir,
Pandit Ji ke bare me jo jankari apne di waha bahute hi umda hai.

dEVILAL Chouhan
18

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जनवरी 11, 2010
मत: +0
vijay goel: ...
aapne panditji ke lekh main aarti ke rachaiyta ki jankari dene ke liye dhanyabad
19

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मार्च 06, 2010
मत: +0
ePandit: ...
पण्डित जी के बारे में आपने जो जानकारी दी वह हम में से बहुत ही कम लोगों को मालूम थी। इस जानकारी को बाँटने के लिये बहुत-बहुत धन्यवाद।
20

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अप्रेल 12, 2010
मत: +0
vinod kumar verma123: ...
om jai jagdish ke rachnakar ke bare me jankar bahut hi khushi hui, hume esase pahle nahi pata tha ki es sunder arti ka rachnakar kaun hai, after all thank a lot.
21

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मई 04, 2010
मत: +0
mittal sunil: ...
एक स्त्री की मौन साधना से रचा गया Brahmasutra
I find following facts about the above articles from archives

It was not Brahmasutra but its commentary by Pandit Vachaspati Mishra. Brahmasutra, Upanishads, Mahabharat and 18 Purans were all written by Maharshi VedaVyas.

2. There is no mention of the neighbour, the lady in this text, in our mythology. Pandit Vachaspati noticed the existence of his wife after so-many years, in his old age, was impressed by her selfless services, and named his commentary (Tika- in Hindi & Sanskrit) after Bhamti.

3. Also, there is no mention of Bhamti’s father visiting her.

4. Adi Shankaracharya, so far is the only one who has written commentaries on Brahmasutra, Upanishads and Gita (Prasthan Trayi). The belief is that no one can ever complete commentaries on these three in one life span (as they are so complex and lengthy).

I shall be grateful if you kindly inform us the facts about the history.
regds
22

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सितम्बर 16, 2010
मत: +0
कृष्‍ण प्रसाद : ...
आपका लेख बहुत बहुत उत्‍तम है। यह जानकारी हमें अतीत से जोड़ने के साथ कई नई बातें भी बताती है, आज ही लेख को पढ़ा यह लिंक किसी मित्र ने बताया था, एक विनती है आपसे कि पंडित जी का नाम सही लिख दीजिए यह पं. श्रध्दाराम नहीं बल्कि पं. श्रद्धाराम है. इस त्रुटि की ओर ध्‍यान दिलाने के लिए क्षमायाचना सहित
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दिसम्बर 16, 2010
मत: +1
anil bhargava : ...
thanks for good knowalge
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जनवरी 24, 2011
मत: +0
sandeepan kr.arya shastri: ...
संदीपन कुमार आर्य शास्त्री
19 शताब्दी में ब्रिटिश पंजाब के लाहौर में अनेक समाज सुधारक, क्रातिकारी ,देशभक्त हुएँ हैं जिस काल में पंडित श्रधा राम जी हुए तब वहां आर्यसमाज का प्रचार जोरों पर था उस धार्मिक और सामाजिक आन्दोलन ने अंग्रेंजों के खिलाफ अनेक क्रांतिकारियों को जन्म दिया था ऐसे समय में पंडित जी ने ॐ जय जगदीश प्रभु भक्तिमय प्रारथना लिखकर तथा उसके रागमयी बनाकर ,गाकर भारतीय जनमानस में सदा के लिए अमर हो गए वस्तुत ; इसके रचयिता के बारे में कोइ भी नहीं जानता है शिवानी जी आपने यह जानकारी देकर बहुत उपकार किया है एतदर्थ आपको बहुश; धन्यवाद स्वागतम अंत में नमस्ते
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मई 15, 2011
मत: +1
TARUN GORAI: ...
मै बचपन से हमेशा सोचा करता था कि इतनी लोकप्रिय और इतनी प्रचलित आरती " ओम जय जगदीश हरे " के रचयिता कौन हैं? मेरी इतनी पुरानी जिज्ञासा को मिटाने के लिए और ऐसे महापुरुष के बारे में जानकारी देने के लिए मै हमेशा आपका आभारी रहूँगा, आपको शत शत नमन I
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सितम्बर 26, 2011
मत: +0
kishan lal: ...
om jai jagdish aarti gate mere akho se ashu nikalte he is aarti me bhagwan ki itni mahima gai he

thanks is informetion ke liye
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नवम्बर 05, 2011
मत: +0
ashok kumar sharma: ...
pandit shraddharam sharma ko shraddhapurn naman karte huye es bhavpurna parichay hetu shivaniji ko kotishah sadhuvad......
28

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फ़रवरी 26, 2012
मत: +0
Suryansh: ...
Thanks Sir is jankari ke lya
29

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अप्रेल 07, 2012
मत: +0
PAWAN SHARMA: ...
श्रीमान जी बहुत बहुत धन्यवाद् ये जानकर मै बहुत खुश हु मुझे आरती के लेखक के बारे मै आज ही पत्ता लगा है मै आपका एक बार फिर से धन्यवाद् करता हू
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जून 30, 2012
मत: +0
मनोज सिंह रावत : ...
बहुत ही सुन्दर और अमूल्य जानकारी दी है आपने शिवानी जी...
.
एक हिन्दू होने के नाते अपनी संस्कृति के बारे में जानना गर्व की बात है...
31

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अगस्त 05, 2012
मत: +1

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