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गिलगिट बास्टिस्तान को लेकर भारत को आगे आना होगा

गिलगिट बल्टिस्तान को लेकर भारत सरकार को स्पष्ट नीति अपनाना चाहिए, क्योंकि ये क्षेत्र शताब्दियों से भारतीय क्षेत्र रहा है और आज भी यहाँ के लोग चाहते हैं कि उनके बच्चों के लिए भारत के मेडिकल, इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेजों में कोटा रखा जाए।
 
ये बात दक्षिण एशियाई राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ श्री आलोक बंसल ने मुंबई में जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र द्वारा आयोजित एक सेमिनार में व्यक्त किए। श्री बंसल ने कहा कि पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर के जिस हिस्से पर कब्जा कर रखा है उसमें 15 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र मीरपुर क्षेत्र में है और 85 प्रतिशत गिलगिट बाल्टिस्तान में है। जबकि मीरपुर मुज़फ्फराबाद और गिलगिट बाल्टिस्तान में आबादी का प्रतिशत क्रमशः क्षेत्र 70 और 30 प्रतिशत है।
 
श्री बंसल ने कहा कि गिलगिट बाल्टिस्तान आज अपनी मूल पहचान जिसे हम प्रिइस्लामिक पहचान कह सकते हैं, को पाने के लिए संघर्ष कर रहा है। दूसरी ओर पाकिस्तान ने विगत 60 सालों में मीरपुर और गिलगिट बाल्टिस्तान की अपनी मूल सांसकृतिक पहचान नष्ट करने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गिलगिट बाल्टिस्तान के युवाओं के संगठन ने अपनी सांस्कृतिक पहचान को बचाने और पाकिस्तान के अत्याचारों से मुक्ति पाने के लिए संघर्ष का जो शंखानाद किया है उसमें उन्होंने अपना जो झंडा बनाया है उसका प्रतीक चिन्ह स्वस्तिक रखा है। गिलगिट बाल्टिस्तान में पाकिस्तानी कट्टरपंथी संगठनों को  बसाया जा रहा है जबकि नियमानुसार वहाँ बाहर के लोग जमीन भी नहीं खरीद सकते। 1988-2000 के दौरान गिलगिट बाल्टिस्तान में बाहरी लोगो को बसाए जाने के कारण वहगाँ की आबादी 63 प्रपतिशत तक बढ़ गई।
 
इसी तरह पाकिस्तान ने मीरपुर मुज़फ्फराबाद में मंगला बाँध बनाया और ये पूरा क्षेत्र डूब में आ गया पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर की धरती पर बाँध बनाया  और उसका पानी और बिजली पाकिस्तान को मिल रही है थ।अब पाकिस्तान गिलगिट बाल्टिस्तान में भासा पर बाँध बनाने जा रहा है इससे गिलगिट बाल्टिस्तान का बड़ा इलाका तो डुबेगा और बिजली पाकिस्तान को मिलेगी।
 
श्री बंसल ने कहा कि सामरिक रूप से गिलगिट बाल्टिस्तान भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यही वह क्षेत्र है जो पाकिस्तान को चीन से जोड़ता है। उन्होंने बताया पानी के 80 प्रतिशत स्त्रोत कि गिलगिट-बाल्टिस्तान में हैं। वहाँ कई दुर्लभ और महंगी खनिज संपदा है। 1996-97 तक पाकिस्तान जाने वाले सबसे ज्यादा पर्यटक गिलगिट बास्टिस्तान जाते थे। आज पाकिस्तान वहाँ चीन की मदद से 32 पन बिजली योजनाएँ चला रहा है।
 
गिलगिट बाल्टिस्तान के इतिहास का उल्लेख करते हुए श्री बंसल ने कहा कि  वहाँ की चित्राल रियासत जम्मू कश्मीर के राजा के अधीन थी। दुनिया की सबसे बड़ी 8 पर्वत श्रृंखलाएँ, दुनिया के सबसे बड़े ग्लैशियर गिलगिट बाल्टिस्तान में है। यहाँ की के कुछ क्षेत्रों में बोली जाने वाली भाषा बुशुश्की दुनिया की सबसे विलक्षण भाषाओं में गिनी जाती है, क्योंकि यह भाषा दुनिया की किसी  भी भाषा के वर्ग में नहीं है। वहाँ की मूल भाषा बाल्टी है अब पाकिस्तान ने बाल्टी भाषा को उर्दू में लिखवाना शुरु कर दिया है जबकि वहाँ के लोग इसका विरोध कर रहे हैं। वहाँ की आबादी शिया मुस्लिमों की है और पाकिस्तान के सुन्नी मुसलमान इन पर हमला करते रहते हैं।
ऐतिहासिक रूप से गिलहगिट ब्ल्टिस्तान मौर्य साम्राज्य का हिस्सा रहा है, यहाँ बुध्द प्रतिमाएँ और कुशण कालीन सिक्के प्रचुर मात्रा में पाए गए हैं। यह क्षेत्र अतीत में कश्मीर के राजा ललितादित्य के दीन था, जिनका साम्राज्य उज्जैन से लेकर दक्षिण तक था।
 
श्री बंसल ने बताया कि 1850 में जम्मू कश्मीर राज्य की स्थापना हुई थी। उन्होंने बताया कि आज जम्मू कश्मीर में पाकिस्तान द्वारा जो समस्याएं पैदा की जा रही है उसकी शुरुआत जिन्ना के सिपाहसालार कैप्टन हसन खान ने रची थी।
 
श्री बंसल ने कहा कि पाकिस्तान की राजनीति ऐसी है कि वे अपने यहाँ होने वाली किसी बी घटना के लिए आरोप  लगाने के  लिए शिकार खोजते रहते हैं। पह1947 से 1971 तक वहाँ हिन्दुओं पर आरोप लगाया जाता था, लेकिन जब 1971 के बाद हिन्दुओं की संख्या कम हो गई तो पाकिस्तान ने एक नई चाल चलते हुए अहमदिया मुसलमानों को गैर मुस्लिम होने का तमगा देते हुए हर घटना के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। अहमदियाँ शिया मुसलमान हैं उन्हें मस्जिदों में नमाज अता नहीं करने दी जाती है, पाकिस्तान में अहमदिया वोट नहीं डाल सकते।
 
उन्होंने कहा कि गिलगिट बाल्टिस्तान में चीन की मदद से पाकिस्तान 32 परियोजनाओं पर काम कर रहा है। लेकिन पाकिस्तानी लोग चीनियों को कतई पसंद नहीं करते हैं। पाकिस्तानियों के एक समूह ने नंदा पर्वत जैसी ऊँची चोटी पर जाकर 3 चीनी नागरिकों को मार दिया, इसके बाद से चीनी कंपनियाँ पाकिस्तान से भागने लगी। अब पाकिस्तान सरकार पाकिस्तान में परियोजनाएँ पर काम करने वाले चीनी लोगों के लिए एक विशेष सुरक्षा दल बना रही है।
 
श्री बंसल ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से हमने कभी गिलगिट बास्टिस्तान को लेकर की सोच ही पैदा नहीं की, भारत को  चाहिए कि वह बाल्टिस्तान और लेह लद्दाख से जोड़े।  
 
श्री बंसल ने कहा कि 19 फरवरी, 2014 को चीन के राष्ट्रपति झाई जिन पिंग और पाकिस्तान के राष्ट्रपति ममनून हुसैन, जो अपनी पहली विदेश यात्रा पर चीन गए हैं, ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे को विकसित करने का करार किया है। इस परियोजना में ग्वादर बंदरगााह पर नया हवाई हड्डा बनाना, कराकोरम राजमार्ग को उन्नत करना और गिलगित-बाल्टिस्तान इलाके के ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी क्षेत्र में से रेल मार्ग और पाइप लाइन गुजारना शामिल है। संवैधानिक और कानूनी रूप से यह क्षेत्र भारत का अभिन्न अंग है। लेकिन यह 2000 किलोमीटर लम्बा गलियारा चीन के सिंक्यांग प्रान्त में काशगर को बलूचिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से जोड़ेगा।
 
 
श्री बंसल ने बताया कि लोग ग्वादर को अपनी धरती को उपनिवेश बनाने की इस्लामाबाद की चाल का एक औजार मानते हैं। उनको लगता है कि ग्वादर से जुड़े फैसले बलूचिस्तान के बाहर लिए जा रहे हैं। क्योंकि ग्वादर कराची से जुड़ा है, न की मुख्य बलूच भूमि से। यही कारण है कि वे ग्वादर से जुड़े कामों और कामगारों पर हमले बोलते रहे हैं। उन्होंने चीनी हितों पर भी खासतौर पर निशाना साधा है क्योंकि उन्हें लगता है कि चीन उनकी धरती को उपनिवेश बनाने की इस्लामाबाद की साजिश में मदद दे रहा है।

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