Tuesday, March 5, 2024
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भारत बन रहा है डिजिटल महाशक्ति !

भारत इस वर्ष जी-20 समूह (विकसित + विकासशील राज्यों )के समूह की अध्यक्षता कर रहा है। इस मंच का भारत को नेतृत्व करना इस तथ्य, मूल्य एवं आदर्श की उपादेयता है कि भारत का वैश्विक प्लेटफॉर्म पर उदीयमान व्यक्तित्व( नेताजी की भूमिका ,अर्थात जो सबको नेतृत्व प्रदान करें ,जो वैश्विक समस्याओं का समाधान करने के लिए योग्य नेतृत्व देने की क्षमता या इन समस्याओं के समाधान के लिए ‘ बड़े भाई ‘ की भूमिका में खड़ा हो)। वैश्विक स्तर के विकासशील देश (राज्य) भारत के नेतृत्व की ओर आशा से देख रहे हैं; कोरोनावायरस (कोविद- 19) के नकारात्मक प्रभाव से वैश्विक अर्थव्यवस्था मालगाड़ी की वेगकी स्थिति में आ चुकी है। रूस- यूक्रेन युद्ध इसी स्थिति में ला दिया है कि प्रत्येक विकासशील राष्ट्र संरक्षक खोज रहा है। हथियारों का आयात कर रहा है ;क्योंकि 22 वीं सदी भी रूस- यूक्रेन युद्ध के दौरान प्राकृतिक अवस्था (पूर्व – सामाजिक एवं पूर्व – राजनीतिक ) अवस्था में दिखाई दे रही है।

दक्षिण एशिया का शुभ संकेत है कि श्रीमान नरेंद्र मोदी जी के मंत्रिमंडल में लोमड़ी के समान चातुर्य विदेश मंत्री, जो अपने कूटनीतिक चातुर्य से वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक प्रभाव एवं कूटनीतिक वैधता का परचम लहराए हैं। दक्षिण एशिया में ड्रैगन को हाथी से बराबर की स्थिति में ला खड़ा कर दिए है अर्थात शक्ति – संतुलन की स्थिति को बनाए बनाए रखने में भारत अपना सामर्थ्य दिखा दिया है।पाकिस्तान की राजनीति में वैश्विक मदद की इतनी आवश्यकता है कि वहां की सेना की स्थिति भारी पड़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अप्रैल, 2022 से 1 वर्ष की अवधि के लिए रुपए डेबिट कार्ड और कम मूल्य वाले bhim- upi लेनदेन ( व्यक्ति से व्यापारी) को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दिया था।

रुपे डेबिट कार्ड और कम मूल्य वाले भीम – यूपीआई लेनदेन(P2M)को बढ़ावा देने के लिए 2600 करोड़ रुपए को अनुमति दिया है। युक्त योजना के तहत चालू वित्त वर्ष 2022- 23 के लिए रुपे डेबिट कार्ड और कम मूल्य के भीम- यूपीआई का लेनदेन करके(P2M) का उपयोग करके पॉइंट ऑफ – सेल (पीओएस )और ई-कॉमर्स लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए अधिग्रहित किए जाने वाले बैंकों को वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा। कुल डिजिटल भुगतान लेन-देन में 59% की साल – दर – साल वृद्धि दर्ज की गई है ,जो वित्तीय वर्ष 2020-21 में 55 54 करोड़ से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2021- 22 में 8840 करोड़ हो गया है। भीम – यूपीआई ने 106%साल – दर साल वृद्धि दर्ज की है, जो वित्त वर्ष 2020 – 21 में 22 33 करोड़ से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2021- 2022 में 4597 करोड़ राशि हो गया है।

डिजिटल भुगतान प्रणाली के विभिन्न क्षेत्रों को लाभ होगा ,अर्थात बौद्धिक संपदा और व्यक्तिगत सूचना की सुरक्षा के साथ साइबर सुरक्षा प्रदान करेगा ।विभिन्न देशों के बीच डाटा शेयरिंग को लेकर आपसी सहमति बनने से वैश्विक डिजिटल इकोनामी को अधिक बूस्ट मिलेगा और इसका लाभ भारत को भी मिलेगा। डिजिटल भुगतान प्रणाली के विभिन्न धारकों और भारतीय रिजर्व बैंक(RBI) ने डिजिटल भुगतान संबंधी इकोसिस्टम के विकास पर शून्य एमडीआर शासन के संभावित प्रतिकूल प्रभाव के विषय में मामले को सुलझाना होगा ।नेशनल पेमेंट्स कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया (NPCI)ने भीम- यूपीआई और रुपे- डेबिट कार्ड लेनदेन को प्रोत्साहित करने के लिए इको सिस्टम से जुड़े हित धारकों के लिए किफायती मूल्य प्रस्ताव तैयार करने, व्यापारियों द्वारा इसकी स्वीकृति बढ़ाने और नगद भुगतान के स्थान पर डिजिटल भुगतान को बढ़ाना होगा।

सरकार देश में डिजिटल भुगतान को बढ़ाने के लिए अनेक पहल कर रही है, डिजिटल भुगतान लेनदेन में जबरदस्त वृद्धि देखी गई है ,कोविड-19 संकट के दौरान डिजिटल भुगतान ने छोटे व्यापारियों सहित व्यवस्थाओं के कामकाज को सरल व सुगम बनाए रखने के लिए और सामाजिक दूरी बनाए रखने में बहुत सहयोग किया है यूपीआई ने दिसंबर, 2022 के महीने मे 12.85 लाख करोड़ रुपए के मूल्य के साथ 782.9 करोड़ डिजिटल भुगतान लेनदेन का रिकॉर्ड बनाया है। यह प्रोत्साहन योजना एक मजबूत डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम के निर्माण व भीम – यूपीआई डिजिटल लेन देन को बढ़ावा देने की सुविधा प्रदान करेगी।

लोकतंत्र में ‘ सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास एवं सबका प्रयास’ के अमृत मंथन एवं सहयोग से सब के कल्याण के लिए उपयोगी सिद्ध हो रही है। इस व्यवस्था से आशा की जाती है कि देश(राज्य) में सभी क्षेत्रों और लोगों के अन्य वर्गों में डिजिटल भुगतान को और अधिक प्रमुखता प्रदान करने में सक्षम बनाएगी. मैकेंजी के अनुमान के मुताबिक वैश्विक जीडीपी में2.3लाख करोड़ डालर का योगदान सीमा पार डाटा sharing का है ।भारत ने साल 2025 तक 1 ट्रिलियन डॉलर की डिजिटल इकोनामी बनाने का लक्ष्य रखा है, और इन सब प्रयासों से वैश्विक स्तर की सेवा भारतीयों को मिल सकेगी। भारत डिजिटल भुगतान में संसार में सबसे अव्वल देश (राज्य) हो चुका है।

भारत विकसित देशों( पूजी प्रवाह का ऊंचा स्तर, नई तकनीकी ,प्रति व्यक्ति आय उच्च स्तर एवं शोध एवं विकास का स्तर उच्चतम) एवं विकासशील देशों (पुजी प्रवाह का स्तर निम्न ,तकनीक के लिए दूसरे देशों पर निर्भर ,प्रति व्यक्ति आय मध्यम स्तर का एवं शोध एवं विकास का स्तर निम्न) को प्रदान कर रहा है, इससे असंगठित क्षेत्र के किसानों ,श्रमिकों एवं मजदूरों के बीच डिजिटल लेन-देन का वातावरण रहेगा। डिजिटल ट्रांजेक्शन में 59% और भीम यूपीआई ट्रांजैक्शन में 106% की बढ़ोतरी हुई है।

(लेखक दिल्ली विश्विद्यालय दिल्ली में कार्यरत हैं)
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