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अलख जगा रही है स्वस्थ भारत यात्रा

महाशिवरात्रि को तीर्थों में तीर्थ रामेश्वरम में पहुंचा स्वस्थ भारत यात्रा दल, देश भर से पहुंचे यात्रियों से किया संवाद
रामेश्वरम् में है मंदिरों की भरमार, हर महीने होते हैं 10-10 दिन के महाउत्सव
उच्ची शिक्षा के लिए नहीं है कॉलेज, बालिकाओं को जाना पड़ता है कोसो दूर
विश्वविख्यात तीर्थस्थल रामेश्वरम की बालिकाएं होती हैं बहुत बीमार, खान-पान एवं जल से पैदा होती हैं बीमारियां
मछुवारा समुदाय झेलता है अनेक कठिनाइयां
समुद्र, मंदिर और ताड़ के पेड़ हैं आजीविका के साधन
तीर्थयात्री रहते हैं साफ-सफाई में लापरवाह, बहुत जूझना पड़ता है सफाई कर्मचारियों को
तमिल की अस्लील फिल्मों पर लगाई जा रही है रोक, समाज और सरकार की ओर से हुई है पहल

कन्याकुमारी से प्रस्थान कर स्वस्थ भारत यात्रा दल विश्व विख्यात धार्मिक-सांस्कृतिक स्थल रामेश्वरम पहुंचा। और वहां शिवरात्रि के मौके पर रामेश्वरम् पहुंचे यात्रि दल के सदस्यों को दुनिया भर से आए तीर्थयात्रियों में कुछ से संवाद करने का मौका मिला। इस मौके पर मंदिर स्थल पर भारत के सभी प्रदेशों के लोग दिखाई पड़े। विदेशों से भी यहां लोग पहुंचे हुए थे। पंडित-पुजारियों, गाय-बकरियों व भिखारियों से अटे पड़े इस तीर्थ स्थल पर अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि के लिए अनुष्ठान करते यात्रि हर किसी का ध्यान आकृष्ट कर रहे थे।

रामेश्वरम एक छोटा सा द्विप है, जो भारत की जमीन से कुछ अलग होकर समुद्र के बीच में है। तमिलनाडु के पामन और मंडप नाम के दो रेलवे स्टेशनों के ऊपर बंधी हुई रेल की पटरियां जोड़ती हैं। पामन से उत्तर पश्चिम में रामेश्वरम है और पूर्व पश्चिम में धनुषकोटि है। धनुषकोटि रेलवे पटरियां हाल ही में आए भीषण तुफान के कारण नष्ट हो गयी है। रामेश्वरम में रामनाथ स्वामी का मंदिर है जो विश्वविख्यात है। स्थानीय लोगों का जीवन मंदिर, समुद्र और मुसाफिरों पर निर्भर है। यह मंदिर अपनी बनावट के कारण विश्व में अद्वितीय है। इसके स्थाप्त्य की सौंदर्यपूर्ण विशालता और विविधता हरेक यात्री को अभिभूत कर देती है। मंदिर का निर्माण 12 वीं शताब्दि में लंका का राजा पराक्रमबाहु ने किया। बाद में 15वीं शताब्दि में मदुरई के एक व्यापारी ने मंदिर में कई नए निर्माण कराए। रामनाथ स्वामी मंदिर के भीतर विभिन्न मंदिरों का समुच्चय है, जिसमें शिव, गणेश, कार्तिकेय साथ अनेक देवी देवता प्रतिस्थापित हैं। मंदिर में विशाल स्वर्णध्वज के साथ विशालकाय नंदी की प्रतिमा भी आकर्षण के केंद्र हैं।

स्वस्थ भारत यात्रा के प्रमुख और स्वस्थ भारत (ट्रस्ट) के चेयरमैन आशुतोष कुमार सिंह एवं वरिष्ठ पत्रकार प्रसून लतांत ने रामेश्वरम पहुंचकर प्रमुख मंदिर की परिक्रमा के बाद, दुनिया भर से आए तीर्थयात्रियों में कुछ से संवाद किया। समुद्र के किनारे स्थित इस मंदिर में ज्यादातर लोग पूजा अर्चना के लिए आते हैं। रामेश्वरम वैसे यात्रियों के ठहरने के लिए बेसुमार होटल है लेकिन प्रमुख रामनाथ स्वामी मंदिर के आस-पास तीर्थयात्रियों के लिए बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। शौचालयों की कमी है। ज्यादातर शौचालय निजी है। जिनका इस्तेमाल करने के लिए लोगों को ज्यादा शुल्क चुकाना पड़ता है। यात्री दल के सदस्यों ने रामेश्वरम में 50 से अधिकर सफाई-कर्मचारियों से मुलाकात की। सफाई कर्मचारियों के मुताबिक शौचालय मालिकों द्वारा ज्यादा शुल्क की मांग करने के कारण बहुत से यात्री इधर-उधर ही दैनिक क्रियाओं से निवृत होने के लिए विवश होते हैं। मंदिर के सामने समुद्र के घाट पर रोजना हजारों तीर्थ यात्री स्नान करते हैं लेकिन यहां पर बालिकाओं एवं महिलाओं के लिए कपड़े बदलने के लिए सुरक्षित जगह नहीं है। आशुतोष कुमार सिंह सफाई कर्मचारियों के बीच यात्रा के उद्देश्यों की जानकारी दी और स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का संदेश भी दिया। सफाई कर्मचारियों ने इस मौके पर अपनी अनेक कठिनाइयों का जिक्र किया और स्वस्थ भारत के निर्माण में सफाई के महत्व को उजागर किया।

रामेश्वरम पहुंचने पर यात्री दल के सदस्यों ने विवेकानंद केंद्र की प्रमुख सरस्वती से मुलाकात की। सरस्वती ने बताया कि रामेश्वरम तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिला के अंतर्गत है। रामेश्वरम में नगरपालिका कार्यरत है, जिसमें 31 वार्ड हैं। उन्होंने बताया कि रामेश्वरम में मछुवारा समुदाय के लोग बहुतायत में हैं, जिनकी बालिकाएं जलजनित बीमारियों की शिकार होती रहती हैं। यहां की बालिकाएं कुपोषित भी हैं क्योंकि वे सिर्फ मछली भात ही खाती हैं। ज्यादातर बालिकाएं अनेमिया और पथरी जैसी बिमारी के चपेट में आती रहती हैं। कुछ दिन पहले तक इस इलाके में डेंगू का भी प्रकोप था।

रामेश्वरम में हरियाली के फैलाव प्रकल्प के तहत विवेकानंद केंद्र की ओर से कई गतिविधियां संचालित की जाती हैं। सरस्वती ने इस प्रकल्प की जानकारी देते हुए बताया कि इस इलाके में बालिकाओं के लिए शिक्षण संस्थाओं का अभाव है। ऊच्ची शिक्षा के लिए एक कॉलेज चलता था जो अब बंद हो गया है। जिस कारण उन्हें उच्ची शिक्षा के लिए बहुत दूर जाना पड़ता है और बहुत सी बालिकाएं ऊच्च शिक्षा से वंचित रह जाती हैं। मछुवारा समुदाय की बेटियों की हालत दैनीय है। उन्हें परिवार की आजीविका के लिए मछली पकड़ने भी जाना पड़ता है, स्कूली शिक्षा पूर्ण नहीं करने का एक कारण यह भी है। इस इलाके में लिंगानुपात बराबर है। इलाके के लोगों के लिए ताड़ के पेड़ आजीविका के महत्वपूर्ण साधन हैं। ताड़ के पत्ते, फल, रस एवं तनो का प्रयोग यहां के दैनिक जीवन में किया जाता है। रामेश्वरम के गांव-गांव में लोग देवी पूजा में विश्वास रखते हैं और इस कारण साल के दो महीने (जून-जुलाई) केवल कुल देवियों के पूजा पाठ को समर्पित रहते हैं। सरस्वती ने इस बात को स्वीकार किया कि तमील की अस्लील फिल्मों के खिलाफ लोगों में आक्रोश है। ऐसी फिल्मों के बुरे असर से बचाने के लिए लोग अपनी बेटियों की शादी कम उम्र में करने के लिए विवश हो गए थे लेकिन अब स्थिति में सुधार हो रहा है। ऐसी फिल्मों पर रोक के लिए सरकारी एवं गैरसरकारी स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं।

इस तीर्थ स्थल पर अनेक विदेशी यात्रियों में से एक क्रिस्टिना एवं मैरी ने यात्रा दल के सदस्यों को बताया कि भारत में महिलाओं की सेहत की स्थिति सही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वे दोनों पुडुचेरी में बहुत दिनों से रह रहीं है, वहां पर पुरूष शराब पीकर अपनी पत्नियों को पीटते हैं। ऐसे में महिलाओं की शिक्षा एवं स्वास्थ्य का सवाल बहुत गंभीर है। स्वस्थ भारत यात्रा की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं को उनकी शिक्षा एवं सेहत के लिए जागरूक करना बहुत जरूरी है।

स्वस्थ भारत यात्रा के अगले पड़ाव के बारे में स्वस्थ भारत (न्यास) के न्यासी धीप्रज्ञ द्विवेदी ने कहा कि विजयवाडा से यह यात्रा हैदराबाद, वर्धा, नागपुर होते हुए जबलपुर जायेगी। फिर रायपुर होते हुए भुवनेश्वर की ओर प्रस्थान करेगी। उन्होंने बताया कि अभी तक यात्री दल ने 11 राज्यों में 6700 किमी की दूरी तय कर ली है। इस दौरान स्वस्थ भारत (न्यास) ने 91 बालिकाओं को स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एबेंसडर मनोनित किया है।
गौरतलब है कि स्वस्थ भारत यात्रा भारत छोड़ो आंदोलन के 75वीं वर्षगांठ पर गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के मार्गदर्शन में स्वस्थ भारत (न्यास) द्वारा शुरू किया गया है। नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने इसे हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इस यात्रा को गांधी स्मृति एंव दर्शन समिति, संवाद मीडिया, राजकमल प्रकाशन समूह, नेस्टिवा अस्पताल, मेडिकेयर अस्पताल, स्पंदन, जलधारा, हेल्प एंड होप फाउंडेशन, सर्च फाउंडेशन, आर्यावर्त लाइव, आइडिया क्रैकर्स, वर्ल्ड टीवी न्यूज, पंचायत खबर सहित अन्य कई संस्थानों का समर्थन है।
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